Employee Rights In India: अक्सर देखा जाता है कि कई कंपनियां टैलेंटेड कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए जॉइनिंग के समय ऊंचे वेतन, बोनस, वर्क-फ्रॉम-होम या प्रोमोशन बड़े-बड़े वादे करती हैं। मगर नौकरी शुरू करने के कुछ महीनों बाद ही मैनेजमेंट अपने वादों से मुकर जाता है, जिसे 'ब्रीच ऑफ प्रॉमिस' भी कहा जाता है।
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Job Rights: जॉइनिंग के समय किए गए वादे से मुकर गई कंपनी? तो जान लें अपने अधिकार
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shikhar Baranawal
Updated Wed, 08 Apr 2026 05:37 PM IST
सार
Breach Of Employment Contract: अक्सर ऐसा होता है कि लोग जब कोई नौकरी का इंटरव्यू देने जाते हैं तो कंपनी उनसे बड़े वादे करती है, लेकिन बाद में मुकरने लगती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि ऐसी स्थिति में आपके पास क्या अधिकार हैं?
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कंपनी जब वादे से मुकरे तो क्या करें?
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लिखित सबूतों को बनाएं अपनी ताकत
- जॉइनिंग के समय मिला ऑफर लेटर और अपॉइंटमेंट लेटर आपका सबसे बड़ा कानूनी ढाल है।
- एचआर (HR) या मैनेजर के साथ हुई बातचीत का ईमेल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, जिसमें वादों का जिक्र हो।
- अगर वादा मौखिक था, तो उसे किसी ईमेल के जरिए कन्फर्म करने की कोशिश करें ताकि वह लिखित रिकॉर्ड बन जाए।
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कंपनी के खिलाफ आपके कानूनी विकल्प
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कंपनी के खिलाफ क्या हैं आपके कानूनी विकल्प?
- अगर बात आपसी बातचीत से न बने, तो आप इन कानूनी रास्तों को अपना सकते हैं।
- आप एक वकील के माध्यम से कंपनी को औपचारिक लीगल नोटिस भेजकर अपने अधिकारों की मांग कर सकते हैं।
- वेतन या बोनस के वादे पूरे न होने पर आप स्थानीय लेबर कमिश्नर कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- अगर मामला कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन का है, तो सिविल कोर्ट में हर्जाने के लिए दावा किया जा सकता है।
ये गलती न करें
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इस्तीफा देने गलती न करें
- गुस्से में आकर अचानक नौकरी छोड़ना आपके खिलाफ जा सकता है।
- इस्तीफा देने से पहले कंपनी की एग्जिट पॉलिसी और नोटिस पीरियड के नियमों को अच्छी तरह पढ़ लें।
- सीधे कोर्ट जाने से पहले कंपनी के 'इंटरनल ग्रीवांस सेल' या उच्च अधिकारियों को लिखित में अपनी समस्या बताएं।
- जब तक दूसरी जगह नौकरी पक्की न हो जाए, तब तक वर्तमान नौकरी से इस्तीफा देने में जल्दबाजी न करें।
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जागरुक कर्मचारी बनें
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जागरूक कर्मचारी ही सुरक्षित है
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य कानूनी जागरूकता के लिए है। हर व्यक्ति का मामला अलग हो सकता है, इसलिए किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले कानूनी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
- आज के बदलते वर्क कल्चर में अपनी वैल्यू और अधिकारों को समझना बहुत जरूरी है।
- इंटरव्यू के दौरान ही हर वादे को ईमेल या ऑफर लेटर में शामिल करवाने का आग्रह करें।
- अन्य कर्मचारियों से बात करें कि क्या उनके साथ भी ऐसा हुआ है; सामूहिक आवाज ज्यादा असरदार होती है।
- अगर मामला गंभीर है, तो श्रम कानून के विशेषज्ञ से सलाह लेने में देरी न करें।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य कानूनी जागरूकता के लिए है। हर व्यक्ति का मामला अलग हो सकता है, इसलिए किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले कानूनी विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।