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Succession: बिना वसीयत के संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है? जान लें हिंदू और मुस्लिम पर्सनल लॉ के बारीक अंतर

यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Sun, 29 Mar 2026 07:05 PM IST
सार

Succession Laws In India: संपत्ति के बटवारे को लेकर अक्सर लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल होते हैं। इसमें से एक बड़ा सवाल होता है कि वसीहत न होने की स्थिति में संपत्ति का बटवारा कैसे होता है? आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Intestate Succession Guide: Key Differences Between Hindu and Muslim Personal Laws on Property Division
बिना वसीयत कैसे करें संपत्ति का बंटवारा? - फोटो : Amar Ujala

Property Division Without Will: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अगर उसने कोई वसीयत नहीं छोड़ी है, तो उसकी संपत्ति का बंटवारा 'उत्तराधिकार कानूनों' के तहत होता है। भारत में धर्म के आधार पर उत्तराधिकार के नियम अलग-अलग हैं। हिंदुओं, सिखों, जैनियों और बौद्धों के लिए 'हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956' लागू होता है, जबकि मुसलमानों के लिए उनके 'पर्सनल लॉ' के नियम प्रभावी होते हैं। आज के कानूनी परिदृश्य में, संपत्ति विवादों से बचने के लिए इन नियमों को समझना अत्यंत आवश्यक है। 



ध्यान देने वाली बात यह है कि बहुत से लोगों को ये मालूम भी नहीं होता है कि हिंदू और मुस्लिम में संपत्ती को लेकर अलग-अलग कानून हैं। जहां हिंदू कानून में बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार दिए गए हैं, वहीं मुस्लिम कानून में विरासत का हिस्सा तय करने के लिए गणितीय फॉर्मूले और जेंडर आधारित अलग-अलग प्रावधान हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि वसीयत न होने की स्थिति में कानूनी वारिसों का क्रम और उनका हिस्सा कैसे निर्धारित किया जाता है।

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शादी के बाद पिता की संपत्ति में बेटी का कितना होता है अधिकार? - फोटो : Adobe Stock

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के मुख्य नियम

  • हिंदू कानून के तहत संपत्ति का वितरण श्रेणियों में विभाजित है।
  • श्रेणी-1 के वारिस: संपत्ति पर पहला अधिकार पत्नी, बच्चों (बेटा-बेटी) और मां का होता है। इन सभी को संपत्ति में बराबर का हिस्सा मिलता है।
  • बेटियों का अधिकार: 2005 के संशोधन के बाद, बेटियों को जन्म से ही पिता की संपत्ति में बेटों के समान 'सह-दायक' का अधिकार प्राप्त है।
  • श्रेणी-2 के वारिस: अगर श्रेणी-1 में कोई जीवित नहीं है, तो संपत्ति पिता, भाई-बहन या अन्य नजदीकी रिश्तेदारों को हस्तांतरित की जाती है।
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शादी के बाद पिता की संपत्ति में बेटी का कितना होता है अधिकार? - फोटो : Adobe Stock

मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत विरासत

  • एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी कुल संपत्ति का सिर्फ एक-तिहाई (1/3) हिस्सा ही वसीयत के जरिए किसी को दे सकता है, शेष हिस्सा अनिवार्य रूप से कानूनी वारिसों में बंटता है।
  • सामान्य नियम के अनुसार, विरासत में बेटे का हिस्सा बेटी के हिस्से से दोगुना होता है, क्योंकि पुरुष पर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी मानी जाती है।
  • संपत्ति बांटने से पहले मृतक के कर्ज और पत्नी की 'मेहर' की राशि का भुगतान करना अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया है।
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बिना वसीयत कैसे करें संपत्ति का बंटवारा? - फोटो : Adobe Stock

दोनों कानूनों के बीच कुछ प्रमुख और बारीक अंतर

  • जन्मसिद्ध अधिकार: हिंदू कानून में बच्चा जन्म लेते ही पुश्तैनी संपत्ति में हकदार बन जाता है, जबकि मुस्लिम कानून में विरासत का अधिकार केवल व्यक्ति की मृत्यु के बाद ही शुरू होता है।
  • हिंदू कानून पुश्तैनी और खुद की कमाई संपत्ति में अंतर करता है, लेकिन मुस्लिम कानून में ऐसी कोई श्रेणी नहीं होती; पूरी संपत्ति एक समान मानी जाती है।
  • हिंदू कानून में सगे भाई-बहनों को प्राथमिकता मिलती है, जबकि मुस्लिम कानून के तहत कुछ विशेष स्थितियों में सौतेले भाई-बहनों के भी निश्चित हिस्से तय होते हैं।
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बिना वसीयत कैसे करें संपत्ति का बंटवारा? - फोटो : Adobe Stock
कानूनी स्पष्टता ही विवादों का समाधान है
  • संपत्ति से जुड़े अदालती मामलों की संख्या को देखते हुए, उत्तराधिकार के नियमों की जानकारी होना बहुत जरूरी है।  
  • वसीयत न होने पर कानून अपना काम करता है, लेकिन अक्सर जानकारी के अभाव में परिवार के भीतर कड़वाहट पैदा हो जाती है। 
  • संपत्ति के उत्तराधिकार की पेचीदगियों को समझने के लिए हमेशा किसी आधिकारिक कानूनी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
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