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LPG Crisis: जालसाजों ने सिलिंडर डिलवरी के नाम पर ठगने का निकाला नया तरीका, ये खबर पढ़कर पहले ही हो जाएं सतर्क

यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Sat, 16 May 2026 05:19 PM IST
सार

Fake Gas Booking Fraud: इन दिनों गैस की डिलिवरी के लिए अधिकतर जगहों पर DAC नंबर अनिवार्य कर दिया गया है। जालसाज इसी कोड के आधार पर उपभोग्ताओं के साथ ठगी कर रहे हैं। आइए इस लेख में समझते हैं कि आखिर किन नए तरीकों से ठगी हो सकती है।

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LPG Delivery Scam: Fraudsters Exploit Cylinder Bookings, New Cyber Fraud Alerts and Safety Tips Explained
गैस डिलिवरी के नाम पर ऐसे हो रही है ठगी - फोटो : AI

LPG Cylinder Delivery Scam: देशभर में करोड़ों लोग रसोई गैस का इस्तेमाल करते हैं। इन दिनों गल्फ देशों में चल रहे तनाव की वजह से देशभर में गैस को लेकर क्राइसिस चल रही है, जिसकी वजह से डिलिवरी के लिए अब डिएसी नंबर अनिवार्य हो गया है। इसी का फायदा उठाकर साइबर जालसाजों ने ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका निकाला है। आजकल जालसाज गैस सिलेंडर की डिलीवरी के नाम पर ग्राहकों को निशाना बना रहे हैं। 



वे बुकिंग कन्फर्म करने, सब्सिडी अपडेट करने या दाम कम होने का झांसा देकर लोगों को फर्जी लिंक भेजते हैं या फोन कॉल करते हैं। जैसे ही कोई आम इंसान इनके झांसे में आकर अपनी बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी साझा करता है, वैसे ही उसका बैंक खाता खाली हो जाता है। आइए इसी के बारे में विस्तार से समझते हैं।

LPG Delivery Scam: Fraudsters Exploit Cylinder Bookings, New Cyber Fraud Alerts and Safety Tips Explained
LPG Gas - फोटो : Adobe Stock

सिलेंडर डिलीवरी फ्रॉड के सामान्य तरीके

1-  पहला तरीका- सबसे पहले आपके मोबाइल पर एक मैसेज आता है कि आपका सिलेंडर बुक हो गया है और डिलीवरी के लिए एक संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने को कहा जाता है। जैसे ही ग्राहक लिंक पर क्लिक करता है उसका फोन हैक हो जाता है, और सारी डीटेल्स ठग के पास जा सकती है।

2- दूसरा कुछ मामलों में गैस कनेक्शन में ई-केवाईसी न होने की वजह से ब्लॉक होने का डर दिखाकर तुरंत व्हाट्सएप या मैसेज पर आधार और बैंक डिटेल्स मांगी जाती हैं, और DAC(डिलिवरी ऑथेंकिकेशन कोड) के नाम पर ओटीपी लेकर बैंक खाता खाली किया जा सकता है।

3- तीसरा तरीका थोड़ा अलग है। इसमें जालसाज फोन करके कहते हैं कि आपकी रुकी हुई एलपीजी सब्सिडी सीधे खाते में भेजने के लिए आपको एक छोटा सा ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा। 
आप जब उस फार्म को देखेंगे तो उसमें आपकी निजी दस्तावेजों की जानकारी होगी जो सिर्फ आधिकारिक सरकारी अधिकारी को देनी होती है। इसमें जैसे ही आप अपनी गोपनीय जानकारी जैसे आधार नंबर और जन्मतिथि आदि भरते हैं, ये सारी जानकारी ठग के पास चली जाती है। 

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जालसाजों के जाल को कैसे पहचानें? - फोटो : अमर उजाला

जालसाजों के जाल को कैसे पहचानें?

  • आधिकारिक गैस एजेंसियां कभी भी किसी व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से कॉल नहीं करते हैं, और न ही आपसे कोई गोपनीय पिन या ओटीपी मांगते हैं।
  • मैसेज में आए ऐसे लिंक्स जिनमें स्पेलिंग की गलतियां हों या जो अनधिकृत वेबसाइट्स पर ले जाते हों, वे पूरी तरह फर्जी होते हैं।
  • अगर डिलीवरी बॉय के आने से पहले ही कोई ऑनलाइन लिंक के जरिए एडवांस या अतिरिक्त चार्ज मांगता है, तो सतर्क हो जाएं, वो फ्राड हो सकता है।
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Cyber Fraud - फोटो : FREEPIK

इस ठगी से बचने के अचूक उपाय

  • हमेशा अपने गैस सिलेंडर की बुकिंग और पेमेंट के लिए सिर्फ आधिकारिक ऐप्स (जैसे IndianOil One, HP Pay या BharatGas) का ही उपयोग करें।
  • अपने बैंक खाते की जानकारी, डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर या कोई भी ओटीपी कभी भी फोन पर किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
  • सबसे सुरक्षित तरीका है कि जब सिलेंडर घर पहुंच जाए, तभी डिलीवरी बॉय को डीएसी नंबर दें और सीधे नकद या आधिकारिक क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करें।
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धोखाधड़ी होने पर तुरंत यहां करें शिकायत - फोटो : Adobe Stock
धोखाधड़ी होने पर तुरंत यहां करें शिकायत
  • अगर आप इस तरह के किसी एलपीजी फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, तो बिना देरी किए तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
  • अपने क्षेत्र की स्थानीय गैस एजेंसी के दफ्तर जाकर इस फ्रॉड नंबर की जानकारी दें ताकि अन्य उपभोक्ताओं को भी सतर्क किया जा सके।
  • आप गृह मंत्रालय के आधिकारिक साइबर पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाकर भी इस ठगी की पूरी रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।
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