गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गयी थी। इसबार 107 नामों को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चुना गया है। जिसमें एक नाम सद्गुरु ब्रह्मेशानंद आचार्य स्वामी का भी है। इन्हें अध्यात्म के क्षेत्र में महान योगदान देने के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। ये स्वामीजी के प्रत्येक अनुयायी और श्री दत्ता पद्मनाभ पीठ के प्रत्येक भक्त के लिए, बहुत गर्व और खुशी का क्षण है। ये स्वामीजी के दिव्य कार्य की सरकार द्वारा मान्यता है, जो दुनिया भर में फैल गया है। आज हम आपको सद्गुरु ब्रह्मेशानंद आचार्य स्वामी के जीवन के बारे कुछ बातें बताने जा रहे हैं, जिसका एक कारण ये भी है कि इनका जीवन प्रेरणा से भरा हुआ है। 41 वर्षीय ब्रह्मेशानंद स्वामी का जन्म उत्तरी गोवा के सिरसैम में हुआ था। वह बचपन से ही ध्यान और आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित थे। दत्त पद्मनाभ संप्रदाय के तत्कालीन प्रमुख ब्रह्मानंदाचार्य स्वामी ने उन्हें अपने अधीन कर लिया। 21 साल की उम्र में, ब्रह्मानंद स्वामी को ब्रह्मानंद आचार्य स्वामी के उत्तराधिकारी के लिए पद्मनाभ शिष्य संप्रदाय का पांचवा पीठाधीश नियुक्त किया गया था। ब्रह्मेशानंद स्वामी ने 24 मई, 2002 को संप्रदाय की बागडोर संभाली।
Padma Awards 2022: जानिए कौन हैं सद्गुरु ब्रह्मेशानंद आचार्य स्वामी, जिनको किया गया पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 26 Jan 2022 01:35 PM IST
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