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यूपी के गाजीपुर में दर्दनाक हादसा: बाहर बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा था पिता, अंदर जल रहे थे मासूम बच्चे

Fri, 25 Dec 2020 09:46 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 25 Dec 2020 09:46 AM IST
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Tragic accident in Ghazipur, UP: A hut transformed into a ash
गाजीपुर हादसा: राख में तब्दील झोपड़ी - फोटो : अमर उजाला।

गाजीपुर जिले के जमानिया कोतवाली अंतर्गत लहूआर गांव में ईंट भट्ठे पर काम करने वाला एक मजदूर परिवार रिहायशी झोपड़ी डालकर रहता था। बुधवार रात दो बजे अचानक आग लगने से झोपड़ी में सो रहे तीन बच्चों की मौत हो गई। जबकि मां जीवन-मौत से जूझ रही है। उसका इलाज वाराणसी में चल रहा है। ईंट-भट्ठे की एक झोपड़ी में बुधवार रात अचानक आग लग गई।



अभी कोई कुछ समझ पाता कि पुआल की झोपड़ी धू-धू कर जलने लगी। पिता बबलू बनवासी बेबस और लाचार हो चीखता रहा, लेकिन बेटी और मासूम बेटों को नहीं बचा सका। नब्बे दिन पहले ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर पेट पालने के लिए परिवार के साथ पहुंचे मजदूर की हंसती-खेलती बच्चों की दुनिया आग में तबाह हो गई। घटनास्थल पर शवों को देखकर पत्थर दिल इंसान भी बिलख पड़े। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था। अग्निकांड ने मजदूर परिवारों का ऐसा जख्म दिया, जो वे कभी नहीं भूल सकेंगे। 
 

Tragic accident in Ghazipur, UP: A hut transformed into a ash
गाजीपुर हादसा: राख में तब्दील झोपड़ी - फोटो : अमर उजाला।

रात करीब दो बजे लहुआर गांव के एक ईंट-भट्ठे पर 15 मजदूर अपने परिवार व बच्चों के साथ झोपड़ी में सोए थे। अचानक बचाओ-बचाओ की आवाज सुनकर अन्य मजदूर एवं ग्रामीण बबलू बनवासी की झोपड़ी की तरफ दौड़ पड़े, वहां तीन झोपड़ियां धू-धू कर जल रहीं थीं। लपटें आसमान को छूने को बेताब थीं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि आग पर कैसे काबू पाया जाय।

कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई गई तब तक बबलू की बड़ी पुत्री पूजा एवं चंद्रिका की झुलसकर मौत हो चुकी थी। किसी तरह लोगों ने पत्नी भागीरथी देवी और छोटे पुत्र डमरू को बाहर निकाला। आग की लपटें तो शांत हो गई, लेकिन मजदूरों के रोने-बिलखने की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दे रही थी।

Tragic accident in Ghazipur, UP: A hut transformed into a ash
गाजीपुर हादसा: रोते-बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला।

आनन-फानन में गंभीर रूप से झुलसी भागीरथी और मासूम डमरू को जमानियां पीएचसी लाया गया, जहां से डाक्टरों ने उन्हें वाराणसी रेफर दिया। वहां इलाज के दौरान डमरू की भी मौत हो गई। तीन मासूमों बच्चों की मौत और पत्नी की हालत गंभीर देख बबलू बिलख पड़ रहा था। इधर चंदौली से पहुंचे उसके परिवार के अन्य सदस्य भी बिलखते-रोते बेहोश हो जा रहे थे। 

तीन झोपड़ियां जलकर हो गई राख
ईंट-भट्ठे पर बबलू बनवासी की झोपड़ी के बगल में मिर्जापुर निवासी नंदू और धर्मेंद्र की झोपड़ियां थी। बबलू की झोपड़ी में लगी आग ने पहले नंदू और फिर धर्मेंद्र की झोपड़ी को आगोश में ले लिया। एक साथ तीन झोपड़ियों की विकराल लपटों को देख वहां मौजूद मजदूर एवं ग्रामीण घबड़ा गए। हालांकि नंदू और धर्मेंद्र अपने परिवार के साथ सुरक्षित बाहर निकल गए थे। 
 

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Tragic accident in Ghazipur, UP: A hut transformed into a ash
गाजीपुर हादसा: घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला।

आग लगने का कारण नहीं हो सका  स्पष्ट  
झोपड़ी में किन परिस्थितियों में आग लगी। यह स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस अपने स्तर से छानबीन करने में जुटी हुई है। ईंट-भट्ठे पर रहने वाले अन्य मजदूरों से भी पूछताछ की जा रही है। लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। 
 

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Tragic accident in Ghazipur, UP: A hut transformed into a ash
गाजीपुर हादसा: घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला।
नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि व अधिकारी
तीन मासूमों के जिंदा जल जाने के बाद भी जिले के जिम्मेदार अधिकारी घटनास्थल नहीं पहुंचे। यही नहीं किसी जनप्रतिनिधि ने पीड़ितों के आंसू पोंछने की जरूरत नहीं समझी । घटनास्थल पर सिर्फ तहसीलदार, सीओ एवं कोतवाल ही पहुंच पाए थे। यही लोग अधिकारियों को हादसे की जानकारी दे रहे थे।
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