हल्द्वानी में प्रो. संतोष मिश्रा ने सामाजिक जागरूकता के लिए अलग मुकाम बनाया है। एमबीपीजी कॉलेज में विद्यार्थियों को हिंदी का ज्ञान देने के साथ ही प्रो. मिश्रा समाज में लोगों को मानवता का ज्ञान बांट रहे हैं। उनकी मुहिम का ही नतीजा है कि सैकड़ों लोग उनसे जुड़कर गरीबों और बेसहारा लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं। वह छुट्टियों में पब्लिक स्कूलों के बच्चों पर होमवर्क का ज्यादा बोझ न डालने के लिए भी ऑनलाइन मुहिम चला चुके हैं।
सामाजिक जागरूकता में इस शिक्षक ने पाया अनोखा मुकाम
प्रो. मिश्रा मूलरूप से प्रतापगढ़ उत्तरप्रदेश से हैं। 1997 में बतौर प्रवक्ता नौकरी ज्वाइन करने वाले प्रो. मिश्रा ने आज समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है। वह 2013 में हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज में आए। कॉलेज में विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ाने के साथ सामाजिक दायित्व का पाठ पढ़ाने की शुरुआत की। इस मुहिम में पत्नी गीता मिश्रा उनकी सारथी बनी। गीता सामान्य गृहणि हैं, लेकिन समाज में ठुकराए लोगों के प्रति उनके दर्द ने ही प्रो. मिश्रा को प्रेरणा दी।
सामाजिक जागरूकता में इस शिक्षक ने पाया अनोखा मुकाम
प्रो. मिश्रा और उनकी पत्नी गीता ने हल्द्वानी में देह दान और अंग दान की मुहिम चलाई। शुरुआत में उन्हें मुश्किल हुई। लेकिन लोगों को जब देह दान और अंग दान की जानकारी दी तो लोग उनसे जुड़ते गए। हल्द्वानी में 40 लोगों से देह दान और अंग दान करने की प्रक्रिया पूरी करवा चुके हैं। प्रो. मिश्रा ने प्लास्टिक रोकने के लिए अभियान चलाया। शुरुआत कॉलेज से की। कॉलेज में प्रोजेक्ट की फाइलों में प्लास्टिक बैग को पूरी तरह बंद करवा दिया।
सामाजिक जागरूकता में इस शिक्षक ने पाया अनोखा मुकाम
15 अगस्त और 26 जनवरी में प्लास्टिक के तिरंगे नहीं खरीदने के लिए भी विद्यार्थियों को प्रेरित किया। रिश्तों की गर्माहट मुहिम ने प्रो. मिश्रा को नई पहचान दी है। उन्होंने लोगों के घरों से पुराने कपड़ों और किताबों को एकत्र कर जरूरतमंदों में बांटने की मुहिम चलाई है। इसमें सैकड़ों लोग जुड़े हैं और शहर में अलग-अलग जगहों पर 15 कलेक्शन सेंटर खोले गए। सेंटरों में लोग अपने घरों से पुराने कपड़े और किताबें देते हैं। एकत्र कपड़ों और किताबों को प्रो. मिश्रा और उनकी टीम गरीब और मलिन बस्तियों में जरूरतमंदों को बांटती है।
सामाजिक जागरूकता में इस शिक्षक ने पाया अनोखा मुकाम
15 अगस्त और 26 जनवरी में प्लास्टिक के तिरंगे नहीं खरीदने के लिए भी विद्यार्थियों को प्रेरित किया। रिश्तों की गर्माहट मुहिम ने प्रो. मिश्रा को नई पहचान दी है। उन्होंने लोगों के घरों से पुराने कपड़ों और किताबों को एकत्र कर जरूरतमंदों में बांटने की मुहिम चलाई है। इसमें सैकड़ों लोग जुड़े हैं और शहर में अलग-अलग जगहों पर 15 कलेक्शन सेंटर खोले गए। सेंटरों में लोग अपने घरों से पुराने कपड़े और किताबें देते हैं। एकत्र कपड़ों और किताबों को प्रो. मिश्रा और उनकी टीम गरीब और मलिन बस्तियों में जरूरतमंदों को बांटती है।