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वो हॉकिंग ही थे जिन्होंने बताया था स्वर्ग सिर्फ डरने वालों की कहानी है
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 14 Mar 2018 11:12 AM IST
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Stephen Hawking
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असाध्य बीमारी एएलएस नाम से पीड़ित स्टीफन हॉकिंग चिकित्सा विशेषज्ञों के तमाम दावों को झुठलाते हुए उन्होंने अपनी जिंदगी के 76 साल बिताए। बुधवार को उनकी कैंब्रिज में उनके घर पर ही निधन होने की खबर आई। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि हम सभी यह जानते है कि हम कहां से आए हैं। वह सिर्फ महान वैज्ञानिक ही नहीं थे बल्कि एक महान लेखक भी थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम ने बिग बैंग सिद्धांत, ब्लैक होल, प्रकाश शंकु और ब्रह्मांड के विकास के बारे में नई खोजों का दावा कर दुनिया भर में तहलका मचाया था। 10 लाख से अधिक प्रतियों में बिक चुकी है। इस पुस्तक के प्रकाशित होने के बाद हॉकिंग न सिर्फ आम जनता में लोकप्रिय हो गए थे बल्कि विज्ञान जगत का चमकता सितारा भी बने थे।
1974 में दी थी ब्लैक होल थ्योरी
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1974 में ही हॉकिंग ने दुनिया को अपनी सबसे महत्वपूर्ण खोज ब्लैक होल थ्योरी से दी थी। उन्होंने बताया था कि कैसे ब्लैक होल क्वांटम प्रभावों की वजह गर्मी फैलाते हैं। महज 32 वर्ष की उम्र में वह ब्रिटेन की प्रतिष्ठित रॉयल सोसाइटी के सबसे कम उम्र के सदस्य बने जबकि पांच साल बाद ही वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बन गए। उनकी तुलना महान वैज्ञानिक आइंस्टीन से की जाती थी और यह वही पद था जिस पर कभी महान वैज्ञानिक आइनस्टीन भी नियुक्त थे।
मौत को दी मात
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हॉकिंग को बचपन में ही ऐसी बीमारी हो गई थी जिसमें शरीप का मांस पेशियां काम करना बंद कर देती हैं। उस बीमारी को एएलएस कहते हैं।
हॉकिंग पूरी तरह से व्हील चेयर पर ही रहते थे और चल फिर नहीं सकते थे। उन्होंने बातचीत के लिए कंप्यूटर का सहारा लिया था। उनकी बीमारी को देखते हुए डॉक्टरों का मानना था कि वह पांच साल से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकेंगे। लेकिन वह हर बार इन दावों को झुठलाते रहे और 76 साल की उम्र में उनकी मौत हुई।
हॉकिंग पूरी तरह से व्हील चेयर पर ही रहते थे और चल फिर नहीं सकते थे। उन्होंने बातचीत के लिए कंप्यूटर का सहारा लिया था। उनकी बीमारी को देखते हुए डॉक्टरों का मानना था कि वह पांच साल से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकेंगे। लेकिन वह हर बार इन दावों को झुठलाते रहे और 76 साल की उम्र में उनकी मौत हुई।
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हॉकिंग ने अपने व्हील चेयर को इतना आधुनिक बनाया था और उसमें इतने उपकरण लगाए थे जिसकी मदद से वह न केवल रोजमर्रा के काम करते थे बल्कि अपने शोध में भी जुटे रहते थे। बीते बरसों में हॉकिंग ने अपने सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करने के लिए भारतीय वैज्ञानिक और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अरुण मेहता से भी संपर्क किया था
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हॉकिंग ने लगाई ऊंची उड़ान
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2007 में विकलांगता के बावजूद उन्होंने विशेष रूप से तैयार किए गए विमान में बिना गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र में उड़ान भरी। वह 25-25 सेकेण्ड के कई चरणों में गुरुत्वहीन क्षेत्र में रहे। इसके बाद उन्होंने अंतरिक्ष में उड़ान भरने के अपने सपने के और नजदीक पहुचने का दावा भी किया। वहीं उन्होंने स्वर्ग की परिकल्पना को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने स्वर्ग को सिर से डरने वालों की कहानी करार दिया था।