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Amritsar: 400 करोड़ के बीआरटीएस प्रोजेक्ट में बही जनता की कमाई, भिखारियों ने बनाया रहने का ठिकाना
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: Nivedita
Updated Fri, 27 Mar 2026 02:07 PM IST
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सार
बसों को दोबारा चलाने के लिए बीआरटीएस एकता यूनियन के प्रधान सर्बजीत सिंह कई बार सरकार से अपील कर चुके है। उन्होंने कहा कि बसों को दोबारा चलाने के लिए वह शहर के सभी विधायकों और मंत्रियों से भी मिल चुके है। लेकिन अभी तक सिवाए आश्वासन के कुछ नहीं मिला।
बस शेल्टर
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पूरे भारत के 30 शहरों में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रोजेक्ट (बीआरटीएस) के तहत लोगों को सुविधा देने के लिए बसों को चलाया गया था। 2016 में अकाली-भाजपा सरकार के समय अमृतसर में जनता का 400 करोड़ खर्च कर 93 बसों को शुरू किया गया था, लेकिन 2017 में कांग्रेस सरकार आने पर 2018 में इसे घाटे का सौदा करार देते बंद कर दिया था।
2019 में लोकसभा चुनाव को देखते और लोगों को आ रही परेशानी के चलते इसे दोबारा शुरू किया गया। हालांकि बीआरटीएस प्रोजेक्ट के तहत 1500 लोगों को रोजगार मिला था। लेकिन समय-समय पर सरकारों के बदलने के चलते बसों के पहियों को ब्रेक लगती गई।
आम आदमी पार्टी सरकार ने बिना किसी नोटिफिकेशन के इसे बंद कर दिया। इस कारण 1500 कर्मचारी बेरोजगार हो गए, वहीं शहर के हजारों-लाखों लोग जो कम पैसों में सफर करते थे, उनको दोबारा ऑटो रिक्शा का सहारा लेना पड़ा। वहीं वेरका बाईपास स्थित बीआरटीएस बस टर्मिनल में बसों की सही ढंग से देखभाल न होने के चलते उनकी हालत कंडम हो चुकी है।
बीआरटीएस प्रोजेक्ट के तहत 3 बड़े स्टेशन बनाए गए थे, जबकि छोटे-छोटे 10 स्टेशन बने थे। जिनमें से बटाला रोड, लारेंस रोड, बस स्टैंड, छेहर्टा, पुतलीघर के स्टेशनों पर भिखारियों ने रहने का ठिकाना बना लिया है। बस स्टेशनों के हालात यह बन चुके है कि वहां पर न तो टिकट काउंटर पर कोई उपकरण बचा है और न ही दरवाजें।
हालांकि बसों को दोबारा चलाने के लिए बीआरटीएस एकता यूनियन के प्रधान सर्बजीत सिंह कई बार सरकार से अपील कर चुके है। उन्होंने कहा कि बसों को दोबारा चलाने के लिए वह शहर के सभी विधायकों और मंत्रियों से भी मिल चुके है। लेकिन अभी तक सिवाए आश्वासन के कुछ नहीं मिला।
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2019 में लोकसभा चुनाव को देखते और लोगों को आ रही परेशानी के चलते इसे दोबारा शुरू किया गया। हालांकि बीआरटीएस प्रोजेक्ट के तहत 1500 लोगों को रोजगार मिला था। लेकिन समय-समय पर सरकारों के बदलने के चलते बसों के पहियों को ब्रेक लगती गई।
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आम आदमी पार्टी सरकार ने बिना किसी नोटिफिकेशन के इसे बंद कर दिया। इस कारण 1500 कर्मचारी बेरोजगार हो गए, वहीं शहर के हजारों-लाखों लोग जो कम पैसों में सफर करते थे, उनको दोबारा ऑटो रिक्शा का सहारा लेना पड़ा। वहीं वेरका बाईपास स्थित बीआरटीएस बस टर्मिनल में बसों की सही ढंग से देखभाल न होने के चलते उनकी हालत कंडम हो चुकी है।
बीआरटीएस प्रोजेक्ट के तहत 3 बड़े स्टेशन बनाए गए थे, जबकि छोटे-छोटे 10 स्टेशन बने थे। जिनमें से बटाला रोड, लारेंस रोड, बस स्टैंड, छेहर्टा, पुतलीघर के स्टेशनों पर भिखारियों ने रहने का ठिकाना बना लिया है। बस स्टेशनों के हालात यह बन चुके है कि वहां पर न तो टिकट काउंटर पर कोई उपकरण बचा है और न ही दरवाजें।
हालांकि बसों को दोबारा चलाने के लिए बीआरटीएस एकता यूनियन के प्रधान सर्बजीत सिंह कई बार सरकार से अपील कर चुके है। उन्होंने कहा कि बसों को दोबारा चलाने के लिए वह शहर के सभी विधायकों और मंत्रियों से भी मिल चुके है। लेकिन अभी तक सिवाए आश्वासन के कुछ नहीं मिला।