गैंगलैंड बन रहा चंडीगढ़: गैंगस्टरों के लिए बना सेफ जोन, ओपन बॉर्डर सबसे बड़ी सहूलियत; 22 रास्तों से भागना आसान
चंडीगढ़ के सेक्टर-9 में बुधवार को प्रॉपर्टी डीलर प्रीत नागरा उर्फ चीनी नागरा (31) की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने जिम से निकलकर कार में बैठते ही नागरा पर गोलियां बरसा दीं थी।
विस्तार
चंडीगढ़ अपराधियों के लिए आसान टारगेट बनता जा रहा है। गैंगस्टर और शातिर बदमाश शहर को सेफ ऑपरेटिंग जोन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी आसानी से मोहाली और पंचकूला की ओर निकल जाते हैं जिससे पुलिस के हाथ खाली रह जाते हैं।
ट्राइसिटी का ओपन बॉर्डर अपराधियों के लिए सबसे बड़ी सहूलियत बन गया है। चंडीगढ़ में प्रवेश और निकास के कुल 22 रास्ते हैं जिनसे होकर बदमाश बिना सख्त जांच के शहर में दाखिल होते हैं और घटना के बाद कुछ ही मिनटों में सीमा पार कर लेते हैं। कई बॉर्डर प्वाइंट पर न तो कड़ी चेकिंग होती है और न ही पर्याप्त निगरानी व्यवस्था मौजूद है।
सीसीटीवी कैमरों का अभाव
मुल्लांपुर और तोगां बैरियर की ओर पड़ने वाले पांच बॉर्डर प्वाइंट सुरक्षा के लिहाज से सबसे कमजोर कड़ी माने जा रहे हैं। यहां कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों का अभाव है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों को ट्रेस करना पुलिस के लिए चुनौती बन जाता है। इस निगरानी की कमी का सीधा फायदा गैंगस्टर उठा रहे हैं।
कारोबारियों में डर का माहाैल
शहर के कारोबारी वर्ग में भी डर का माहौल है। बड़े कारोबारी, बिल्डर, होटल संचालक और क्लब मालिक गैंगस्टरों के डर से निजी सुरक्षा तक लेने को मजबूर हैं। रंगदारी, धमकी और गैंगवार की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में पहले भी बम ब्लास्ट जैसी घटनाएं हो चुकी हैं।
हालांकि चंडीगढ़ पुलिस अपने तेज रिस्पॉन्स टाइम का दावा करती है। वर्ष 2025 में औसतन 5.6 मिनट में मौके पर पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया गया, जो देश में सबसे बेहतर बताया गया लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। सवाल यह है कि जब आरोपी वारदात के तुरंत बाद शहर की सीमा पार कर जाते हैं तो केवल मौके पर जल्दी पहुंचने का क्या लाभ। पुलिस विभाग के सूत्रों का कहना है कि जब तक बॉर्डर सीलिंग, सीसीटीवी कवरेज और ट्राइसिटी के बीच बेहतर समन्वय नहीं होगा तब तक चंडीगढ़ अपराधियों के लिए आसान निशाना बना रहेगा।
गैंगस्टरों पर लगाम के लिए चंडीगढ़ में नहीं स्पेशल फोर्स
चंडीगढ़ में गैंगस्टरों से निपटने के लिए कोई अलग स्पेशल फोर्स मौजूद नहीं है। सेक्टर-9 में प्रॉपर्टी डीलर प्रीत नागरा उर्फ चीनी नागरा की दिनदहाड़े हत्या और एक दिन पहले पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्र नेता पर फायरिंग की घटनाओं ने चंडीगढ़ में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहर में आए दिन कारोबारियों और उद्योगपतियों को रंगदारी के लिए कॉल आ रही हैं और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। कई मामलों में रसूखदार लोगों के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बाहर फायरिंग की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। जानकारों का कहना है कि चंडीगढ़ में गैंगस्टर गतिविधियों के बढ़ने के पीछे एक बड़ी वजह समर्पित एंटी गैंगस्टर फोर्स की कमी है। जहां पंजाब में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) और हरियाणा में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) केवल गैंगस्टरों के खिलाफ ऑपरेशन चलाती हैं वहीं चंडीगढ़ में ऐसी कोई अलग यूनिट नहीं है। यहां केवल क्राइम ब्रांच, डिस्ट्रिक्ट क्राइम सेल और ऑपरेशन सेल ही सक्रिय हैं, जो सभी प्रकार के अपराधों को संभालती हैं।
इस बीच पुलिस नेतृत्व भी सवालों के घेरे में है। डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा और एसएसपी कंवरदीप कौर पर शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने के आरोप लग रहे हैं। एसएसपी कंवरदीप कौर को हाल ही में केंद्र सरकार ने एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया है। शहर गैंगस्टरों के लिए आसान टारगेट और सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है।
विशेष फोर्स बनाने की मांग तेज
पूर्व पार्षद सतीश कैंथ ने प्रशासन से मांग की है कि चंडीगढ़ में भी पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर एक समर्पित एंटी गैंगस्टर यूनिट गठित की जाए। जब तक गैंगस्टरों के खिलाफ अलग रणनीति और विशेष फोर्स नहीं बनाई जाती, तब तक इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।