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Punjab: अकाल तख्त सचिवालय पहुंचे DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका, ज्ञानी रघबीर सिंह को लेकर कही ये बात

संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: Ankesh Kumar Updated Fri, 27 Feb 2026 04:04 PM IST
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सार

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की कार्यकारिणी ने वीरवार को हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह को सेवा से रिटायर करने का कड़ा फैसला लिया था। यह निर्णय 72 घंटे के नोटिस के बावजूद एसजीपीसी प्रबंधन पर लगाए आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश न करने और सर्विस नियमों की अनदेखी करने के आधार पर लिया गया।

DSGMC President Harmeet Singh Kalka reached Akal Takht Secretariat
अमृतसर में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका। - फोटो : संवाद
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विस्तार

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका शुक्रवार को अपनी टीम के साथ अमृतसर के अकाल तख्त साहिब सचिवालय पहुंचे। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कालका ने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह जैसी शख्सियत, जिन्होंने पूरी जिंदगी गुरु घर की निडर होकर सेवा की है, उनका नाम इतिहास में पहले ही दर्ज हो चुका है। 2 दिसंबर को अकाल तख्त साहिब पर हुई घटना अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है और समूचा पंथ ज्ञानी रघबीर सिंह के साथ खड़ा है।

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कालका ने कहा कि ऐसी शख्सियत को जहां भी सम्मान मिलता है, उसे सहर्ष स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा किए गए खुलासों को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) को जवाब देना ही होगा, चाहे आज या भविष्य में।
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जत्थेदारों के साथ हो रहे व्यवहार को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कालका ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि जब भी कोई जत्थेदार अपने अधिकारों की बात करता है तो उसकी चरित्र हत्या कर उसे पद से हटा दिया जाता है। यह प्रवृत्ति पंथ के लिए चिंता का विषय है।

दो दिसंबर 2024 के फैसलों पर उन्होंने कहा कि इस मामले में अलग-अलग पक्षों की अलग राय है। कुछ लोग इन फैसलों को बादल से जोड़ते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि ये जत्थेदारों के अपने निर्णय थे। कालका के अनुसार यह घटना गुरु हरगोबिंद साहिब की मीरी-पीरी परंपरा से जुड़ी साहस की प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि 25 अक्तूबर को दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी की बैठक में गुरुद्वारों में कथित अनियमितताओं और आर्थिक गड़बड़ियों की जांच की मांग उठी थी। एक्ट के अनुसार कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के साथ व्यावसायिक लेन-देन नहीं कर सकता। कार्रवाई शुरू होने के बाद आया एक पत्र संदेह पैदा करता है, क्योंकि वह अरदास के बाद मौके पर पहुंचाया गया। संपर्क न होने के दावों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में ईमेल, फोन और अन्य कई माध्यम उपलब्ध हैं, ऐसे में जानबूझकर गलतफहमियां पैदा की जा रही हैं। 

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मामले पर कालका ने कहा कि बिना ठोस सबूत किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने दी जानी चाहिए। हर संस्था और धार्मिक स्थल की अपनी मर्यादा होती है और किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।

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