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पंजाब की धरती से अमेरिका को चेतावनी: अमृतसर पहुंचे ईरानी प्रतिनिधि बोले-100 गुना मिसाइल हमले करेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: Nivedita
Updated Thu, 09 Apr 2026 08:15 AM IST
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सार
ईरान प्रतिनिधिमंडल ने 12 अप्रैल को दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस में खामेनेई की शहादत के 40वें दिन के विशेष समागम के लिए श्री अकाल तख्त के जत्थेदार और एसजीपीसी अध्यक्ष को निमंत्रण दिया।
अमृतसर पहुंचा ईरानी प्रतिनिधिमंडल
- फोटो : संवाद
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विस्तार
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद उनका प्रतिनिधिमंडल दिल्ली से अमृतसर पहुंचा और श्री हरिमंदिर साहिब में मत्था टेका।
प्रतिनिधिमंडल ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम रविवार को होगा और खामेनेई की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। इजरायल हमले में उनकी मौत के बाद भारत समेत कई स्थानों पर शोक सभाएं हो चुकी हैं।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और भारत में ईरान के सुप्रीम नेता के प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियानिया ने कहा कि मौजूदा युद्धविराम केवल अस्थायी है जबकि ईरान स्थायी शांति चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में ईरान के बच्चों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाया गया। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि जो व्यक्ति दिन में ईरान को खत्म करने की बात करता है वही रात में युद्ध रोकने की अपील करता है।
जियानिया ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिका को अपनी दस शर्तें मानने के लिए 10 दिन का समय दिया है। यदि इस अवधि में शर्तें नहीं मानी गईं और नुकसान की भरपाई नहीं हुई तो 11वें दिन अमेरिका और इजराइल पर पहले से 100 गुना अधिक मिसाइलों से हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की ठोस गारंटी के बिना ईरान किसी भी युद्धविराम पर भरोसा नहीं करेगा।
उन्होंने बताया कि 12 अप्रैल को दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस में खामेनेई की शहादत के 40वें दिन का विशेष समागम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिख धर्म और इस्लाम में शहादत की भावना समान रूप से गहरी है और दोनों ही शहीदों को अमर मानते हैं। उन्होंने पंजाब विधानसभा द्वारा ईरान के समर्थन में पारित प्रस्ताव की सराहना की और भारत-ईरान के 5000 साल पुराने संबंधों का उल्लेख किया।
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प्रतिनिधिमंडल ने श्री अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को दिल्ली में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम रविवार को होगा और खामेनेई की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। इजरायल हमले में उनकी मौत के बाद भारत समेत कई स्थानों पर शोक सभाएं हो चुकी हैं।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और भारत में ईरान के सुप्रीम नेता के प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियानिया ने कहा कि मौजूदा युद्धविराम केवल अस्थायी है जबकि ईरान स्थायी शांति चाहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में ईरान के बच्चों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाया गया। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि जो व्यक्ति दिन में ईरान को खत्म करने की बात करता है वही रात में युद्ध रोकने की अपील करता है।
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जियानिया ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिका को अपनी दस शर्तें मानने के लिए 10 दिन का समय दिया है। यदि इस अवधि में शर्तें नहीं मानी गईं और नुकसान की भरपाई नहीं हुई तो 11वें दिन अमेरिका और इजराइल पर पहले से 100 गुना अधिक मिसाइलों से हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद की ठोस गारंटी के बिना ईरान किसी भी युद्धविराम पर भरोसा नहीं करेगा।
उन्होंने बताया कि 12 अप्रैल को दिल्ली स्थित ईरान कल्चर हाउस में खामेनेई की शहादत के 40वें दिन का विशेष समागम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिख धर्म और इस्लाम में शहादत की भावना समान रूप से गहरी है और दोनों ही शहीदों को अमर मानते हैं। उन्होंने पंजाब विधानसभा द्वारा ईरान के समर्थन में पारित प्रस्ताव की सराहना की और भारत-ईरान के 5000 साल पुराने संबंधों का उल्लेख किया।