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बेअदबी कानून में होगा संशोधन!: श्री अकाल तख्त के निर्देशों के बाद मंथन, एडवोकेट जनरल की अगुवाई में बनी टीम

Wed, 22 Jul 2026 08:37 AM IST
Nivedita मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 22 Jul 2026 08:37 AM IST
सार

पंजाब सरकार के बेअदबी कानून पर श्री अकाल तख्त साहिब ने आपत्ति जताई थी। 29 जून को सिख विधायकों और मंत्रियों को श्री अकाल तख्त पर तलब किया गया था। सरकार को एक महीने के भीतर सभी आपत्तियां दूर कर संशोधित विधेयक विधानसभा में लाने का निर्देश दिया गया था।

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Blasphemy law amended Deliberations follow Sri Akal Takht directives team formed under Advocate General
बेअदबी कानून - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब सरकार बेअदबी रोधी कानून द जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार विधेयक (संशोधन)-2026 में बदलाव की तैयारी कर रही है। इस संबंध में सरकार ने मंथन शुरू कर दिया है। 

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी संकेत दिए हैं कि विधेयक के कुछ प्रावधानों में संशोधन संभव है। सरकार ने इस संबंध में एडवोकेट जनरल की अगुआई में कानूनविदों की विशेष टीम गठित की है, जो कानून की सख्ती बरकरार रखते हुए श्री अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) की आपत्तियों का समाधान तलाश रही है।
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सरकारी सूत्रों के अनुसार टीम इस बात पर विचार कर रही है कि विधेयक में ऐसे कौन से बदलाव किए जाएं जिससे धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी बना रहे और कानून व्यावहारिक रूप से प्रभावी भी रहे। इसके लिए सरकार ने एसजीपीसी से भी चर्चा की है। समिति के सुझाव प्राप्त कर लिए गए हैं और इन्हीं के आधार पर संशोधन का नया मसौदा तैयार किया जा रहा है।

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मानसून सत्र में आएगा संशोधित विधेयक
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बेअदबी रोधी विधेयक में कुछ संशोधन संभव हैं। अंतिम निर्णय एडवोकेट जनरल की सिफारिशों के बाद लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार सरकार आगामी मानसून सत्र में संशोधित विधेयक विधानसभा में पेश कर उसे पारित कराने की तैयारी कर रही है।

29 जून को तलब हुए थे सिख मंत्री-विधायक
यह कदम 29 जून को श्री अकाल तख्त की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद उठाया गया है। उस दिन सिख विधायकों और मंत्रियों को तलब कर जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने विधेयक के कई प्रावधानों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पंथ से जुड़े इतने महत्वपूर्ण कानून पर न तो श्री अकाल तख्त से राय ली गई और न ही एसजीपीसी से परामर्श किया गया। श्री अकाल तख्त ने सरकार को एक महीने के भीतर सभी आपत्तियां दूर कर संशोधित विधेयक विधानसभा में लाने का निर्देश दिया था।

सरकार अब कानून की भाषा, परिभाषाओं और प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों पर भी पुनर्विचार कर रही है ताकि भविष्य में किसी तरह का भ्रम या कानूनी विवाद न रहे। साथ ही कानून के दुरुपयोग की आशंका समाप्त करने के लिए भी अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान जोड़े जा सकते हैं।

श्री अकाल तख्त ने क्या दिए थे निर्देश?
29 जून को श्री अकाल तख्त ने सिख विधायकों और मंत्रियों को तलब कर बेअदबी रोधी विधेयक पर आपत्ति जताई थी। जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा था कि पंथ से जुड़े कानून पर पहले श्री अकाल तख्त, एसजीपीसी, पांचों तख्तों के जत्थेदारों, सिख विद्वानों और पंथक संस्थाओं से परामर्श होना चाहिए। एक महीने के भीतर सभी आपत्तियां दूर कर संशोधित विधेयक विधानसभा सत्र में पारित कराने के निर्देश दिए गए थे।

इन प्रावधानों में हो सकते हैं बदलाव
सरकार विधेयक की भाषा और प्रारूप को सिख सिद्धांतों के अनुरूप बनाने पर विचार कर रही है। बेअदबी की परिभाषा को अधिक स्पष्ट किया जा सकता है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब को केस प्रॉपर्टी न मानने और जांच के लिए विशेष प्रक्रिया तय करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा प्रावधान जोड़े जा सकते हैं। एसजीपीसी के रिकॉर्ड, यूनिक आईडी व्यवस्था और कस्टोडियन की जवाबदेही से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन संभव है।
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