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रूस-यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा लुधियाना का बेटा: पिता ने कर्ज लेकर भेजा था विदेश, तिरंगे में लिपटकर आया समरजीत
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
Published by: Ankesh Kumar
Updated Fri, 13 Mar 2026 04:26 PM IST
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सार
पंजाब के लुधियाना का युवक पढ़ाई के लिए रूस गया था, लेकिन वहां उसे युद्ध में धकेल दिया गया और उसकी मौत हो गई। कई दिनों बाद युवक का शव आज उसके गांव पहुंचा तो चीख-पुकार मच गई। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
गांव पहुंचा सिमरजीत का शव।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
करियर बनाने और परिवार की गरीबी दूर करने का सपना लेकर रूस गए लुधियाना के 21 वर्षीय युवक समरजीत सिंह की यूक्रेन युद्ध में मौत हो गई। शुक्रवार को समरजीत का शव भारत पहुंचा। दिल्ली से लुधियाना के डाबा स्थित उसके घर लाया गया, जहां गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार किया गया। मृतक अपने माता-पिता का बड़ा बेटा था।
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समरजीत के पिता चरणजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने बेटे को सुनहरे भविष्य के लिए 16 जुलाई 2024 को रूस भेजा था। इसके लिए उन्होंने अपने घर की रजिस्ट्री गिरवी रखकर सात लाख रुपये का कर्ज लिया था। समरजीत ने एक्स-रे टेक्नीशियन का डिप्लोमा किया था और रूस में उसे तीन महीने का रशियन लैंग्वेज कोर्स करने के बाद अच्छी नौकरी का झांसा दिया गया था।
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शुरुआती दिनों में वह वहां खुश था, लेकिन जल्द ही उसे जबरन सेना की वर्दी थमा दी गई। परिवार और समरजीत के बीच आखिरी बातचीत 8 सितंबर को महज 22 सेकंड की वीडियो कॉल के जरिए हुई थी। उस कॉल में समरजीत ने सिर्फ इतना कहा था कि वह ठीक है और पापा-मम्मी अपना ख्याल रखना। इसके दो दिन बाद 10 सितंबर को एक ड्रोन हमले में उसकी मौत हो गई। एक सप्ताह पहले रूसी भाषा में आए एक पत्र और डेथ सर्टिफिकेट से उसकी मौत की पुष्टि हुई। डेथ सर्टिफिकेट में मौत का समय दिसंबर अंकित है।
इस घटना ने विदेश मंत्रालय और पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चरणजीत सिंह ने बताया कि बेटे की सलामती के लिए उन्होंने लुधियाना से लेकर दिल्ली तक के चक्कर काटे। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर, एनआरआई मंत्री संजीव अरोड़ा के स्टाफ और सांसद राजा वड़िंग के दफ्तर में गुहार लगाई, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले। समरजीत के पिता उन परिवारों में थे, जिन्होंने जंतर-मंतर पर धरना देकर रूस में फंसे 27 भारतीय युवाओं की सूची विदेश मंत्रालय को सौंपी थी। दुर्भाग्यवश, जब तक मंत्रालय की जांच आगे बढ़ती, समरजीत का शव तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा।
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