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कारगिल विजय दिवस: सीएम मान ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, पूर्व एयर चीफ मार्शल ने भी की शिरकत
Sun, 26 Jul 2026 12:34 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sun, 26 Jul 2026 12:34 PM IST
सार
आज कारगिल युद्ध के 27 साल पूरे हो गए हैं। इसी को लेकर पंजाब के सीएम मान ने चंडीगढ़ में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी।
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सीए मान ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ सेक्टर-3 के बार मेमोरियल में कारगिल विजय दिवस के मौके पर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर कई अन्य सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्य तौर पर पूर्व एयर चीफ मार्शल धनोआ भी यहां पहुंचे। वहीं, छात्रों ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
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#WATCH | Chandigarh: Punjab CM Bhagwant Mann lays a wreath and pays tribute to the heroes of the Kargil War, on the occasion of 27th #KargilVijayDiwas pic.twitter.com/wnhHVhwGNX
— ANI (@ANI) July 26, 2026विज्ञापन
कार्यक्रम में पहुंची स्कूली छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
26 जुलाई को कारगिल युद्ध के 27 साल पूरे हो गए हैं। इसी दिन भारत को पाकिस्तान के खिलाफ एक बार फिर युद्ध में विजय मिली थी। जिस इलाके में ये युद्ध लड़ा गया। वहां सर्दियों में तापमान माइनस 30 से माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। सर्दियों के मौसम में इन इलाकों को खाली कर दिया जाता था। इसी का फायदा उठाकर पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की गई। इस घुसपैठ में पाकिस्तान की सेना ने भी मदद की।
सीएम मान शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए
- फोटो : अमर उजाला
3 मई को घुसपैठियों के दिखने की सूचना मिलने के बाद 5 मई, 1999 को भारतीय सेना ने पेट्रोलिंग पार्टी को घुसपैठ वाले इलाके में भेजा। पेट्रोलिंग पार्टी जब घुसपैठ वाले इलाके में पहुंची तो घुसपैठियों ने पांचों जवानों को मार दिया। सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के शव से बर्बरता भी की गई। घुसपैठिए लेह-श्रीनगर हाईवे पर कब्जा कर लेना चाहते थे। इसके जरिए वह लेह को बाकी हिन्दुस्तान से काट देना चाहते थे।
मौके पर मौजूद पंजाब पुलिस के जवान
- फोटो : अमर उजाला
9 मई को कारगिल जिले में पाकिस्तानी सेना का तोप का गोला गिरा और भारत के गोला बारूद डीपो को उड़ा दिया। 10 मई, 1999 को द्रास, काकसर, बटालिक सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों को देखा गया। उस वक्त ये अंदाजा लगाया गया कि करीब 600 से 800 घुसपैठिये भारतीय चौकियों पर कब्जा कर चुके हैं। 15 मई, 1999 के बाद कश्मीर के अलग-अलग इलाकों से सेना को भेजने की शुरुआत हुई।
कार्यक्रम में पहुंचे रिटायर सैन्य अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
26 मई को भारतीय वायुसेना ने घुसपैठियों पर जमकर बमबारी की। 27 मई को दो भारतीय लड़ाकू विमानों को पाकिस्तानी सेना ने मार गिराया। फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता को पाकिस्तान ने युद्धबंदी बना लिया। वहीं, स्क्वॉड्रन लीडर अजय अहूजा ने सर्वोच्च बलिदान दे दिया। 31 मई, 1999 को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का बयान आया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में युद्ध जैसे हालात बन चुके हैं।