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पीयू रिसर्च स्कॉलर की मौत: पोस्टमार्टम में करंट से मौत की पुष्टि नहीं, अब हिस्टोपैथोलॉजी जांच पर टिकी नजर
Thu, 30 Jul 2026 07:58 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 30 Jul 2026 07:58 AM IST
सार
महेंद्रगढ़ के ककराला गांव की रहने वाली ज्योति माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पीएचडी कर रही थीं। 28 जुलाई की सुबह सेक्टर-25 में पंजाब यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस में करंट लगने से उसकी मौत हो गई थी।
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छात्रा की माैत के बाद पीयू में हंगामा
- फोटो : अमर उजाला/फाइल
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विस्तार
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की रिसर्च स्कॉलर ज्योति की माैत पर बड़ा अपडेट आया है। बुधवार को जीएमएसएच-16 में डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के दौरान विशेषज्ञ करंट लगने से मौत की पुष्टि नहीं कर पाए।
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अब मृतका के प्रमुख अंगों को हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए जीएमसीएच-32 भेज दिया गया है। अब अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट इसी जांच के बाद जारी होगी और तभी मौत के वास्तविक कारण पर अंतिम मुहर लग सकेगी।
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वहीं इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिजली विभाग के एक्सईएन अनिल ठाकुर और एसडीओ लखविंदर सिंह धनोआ को निलंबित कर दिया है। लगातार छात्र आंदोलन और परिजनों के साथ हुई बैठक के बाद प्रशासन ने मृतका के परिवार को 16 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनके भाई को इलेक्ट्रिशियन के पद पर नौकरी देने का फैसला भी लिया है। वह 10+2 के साथ आईटीआई उत्तीर्ण हैं और उन्हें पंजाब सरकार के नियमों के अनुसार वेतन व अन्य सेवा लाभ मिलेंगे।
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प्रशासन ने परिवार को कुल 16 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसमें पांच लाख रुपये कुलपति के विवेकाधीन कोष से और 11 लाख रुपये डीन स्टूडेंट वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) कार्यालय के माध्यम से दिए जाएंगे।
शरीर पर नहीं मिले निशान
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य तौर पर इलेक्ट्रोक्यूशन से मौत के मामलों में शरीर पर करंट के प्रवेश (एंट्री) और निकास (एग्जिट) बिंदु पर विशेष प्रकार के निशान मिलते हैं लेकिन ज्योति के शरीर पर ऐसे कोई निशान नहीं मिले।
हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की पानी में फैले करंट की चपेट में आने से मौत हुई हो तो कई बार शरीर पर एंट्री और एग्जिट पॉइंट के स्पष्ट निशान नहीं बनते। इसी संभावना को देखते हुए मृतका के अंगों की सूक्ष्म जांच कराई जा रही है। जांच में विशेष रूप से हृदय सहित अन्य अंगों के ऊतकों में होने वाले सूक्ष्म बदलावों का अध्ययन किया जाएगा, जिससे करंट से मौत की पुष्टि हो सके।
28 जुलाई को गई थी जान
मूलरूप से हरियाणा के जिला महेंद्रगढ़ के ककराला गांव की रहने वाली ज्योति माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पीएचडी कर रही थीं। 28 जुलाई की सुबह सेक्टर-25 में पंजाब यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस में करंट लगने से उनकी मौत हो गई थी। हादसे के बाद छात्रों में भारी आक्रोश फैल गया और उन्होंने लगातार प्रदर्शन कर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों का मुद्दा उठाया। विद्यार्थियों का कहना है कि कैंपस में विद्युत व्यवस्था की नियमित जांच और रखरखाव होता तो यह हादसा टाला जा सकता था। छात्रों ने यह भी कहा कि मुआवजा और नौकरी राहत का कदम है लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना भी उतना ही जरूरी है।