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ठगी के आरोपी को HC का आदेश: रद्द करवानी है FIR तो अखबारों में छपवाओ अपने कारनामों के इश्तेहार
Thu, 23 Jul 2026 09:59 AM IST
Nivedita
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 23 Jul 2026 09:59 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक नोटिस में आरोपी के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी और आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होगी। इसमें लंबित मामले, जिनमें फैसला हो चुका है और यहां तक कि पहले रद्द हो चुके मामले भी शामिल होंगे।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विदेश भेजने के नाम पर लोगों से ठगी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोपों से घिरे एक व्यक्ति के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है, जिससे उसका पूरा आपराधिक रिकॉर्ड सार्वजनिक हो जाएगा।
अदालत ने आरोपी को निर्देश दिया है कि वह अपने खर्च पर पंजाब के कम से कम पांच प्रमुख समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित करवाए। इनमें कम से कम दो पंजाबी समाचार पत्र होना अनिवार्य है।
जस्टिस आलोक जैन की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर प्राथमिकी रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि मामला केवल दो पक्षों के बीच पैसे के लेन-देन तक सीमित नहीं है। विदेश भेजने के नाम पर फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी और वीजा के नाम पर लोगों से ठगी जैसे आरोपों का असर कई लोगों के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों को छिपाकर केवल समझौते के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
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हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक नोटिस में आरोपी के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी और आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होगी। इसमें लंबित मामले, जिनमें फैसला हो चुका है और यहां तक कि पहले रद्द हो चुके मामले भी शामिल होंगे। इतना ही नहीं, विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी, गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या फर्जी वीजा से जुड़े वे मामले भी सार्वजनिक करने होंगे, जिनमें बाद में पीड़ितों को रकम लौटाकर समझौता कर लिया गया हो।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों की जानकारी भी जनता से छिपाई नहीं जा सकती।
अदालत ने आरोपी को आदेश दिया है कि 15 दिन में पांच समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित करवाकर अगली सुनवाई से पहले उसकी प्रतियां और अनुपालन का शपथपत्र दाखिल करे। नोटिस में आरोपी का नाम, पता, संपर्क विवरण और उसके खिलाफ दर्ज मामलों का पूरा ब्योरा देना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस में साफ लिखा जाए कि यह प्रकाशन हाईकोर्ट के आदेश पर किया जा रहा है।
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अदालत ने आरोपी को निर्देश दिया है कि वह अपने खर्च पर पंजाब के कम से कम पांच प्रमुख समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित करवाए। इनमें कम से कम दो पंजाबी समाचार पत्र होना अनिवार्य है।
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जस्टिस आलोक जैन की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर प्राथमिकी रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि मामला केवल दो पक्षों के बीच पैसे के लेन-देन तक सीमित नहीं है। विदेश भेजने के नाम पर फर्जी दस्तावेज, गलत जानकारी और वीजा के नाम पर लोगों से ठगी जैसे आरोपों का असर कई लोगों के जीवन पर पड़ता है। ऐसे में आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों को छिपाकर केवल समझौते के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
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हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक नोटिस में आरोपी के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी और आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होगी। इसमें लंबित मामले, जिनमें फैसला हो चुका है और यहां तक कि पहले रद्द हो चुके मामले भी शामिल होंगे। इतना ही नहीं, विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी, गलत जानकारी, फर्जी दस्तावेज या फर्जी वीजा से जुड़े वे मामले भी सार्वजनिक करने होंगे, जिनमें बाद में पीड़ितों को रकम लौटाकर समझौता कर लिया गया हो।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों की जानकारी भी जनता से छिपाई नहीं जा सकती।
अदालत ने आरोपी को आदेश दिया है कि 15 दिन में पांच समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित करवाकर अगली सुनवाई से पहले उसकी प्रतियां और अनुपालन का शपथपत्र दाखिल करे। नोटिस में आरोपी का नाम, पता, संपर्क विवरण और उसके खिलाफ दर्ज मामलों का पूरा ब्योरा देना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस में साफ लिखा जाए कि यह प्रकाशन हाईकोर्ट के आदेश पर किया जा रहा है।