विश्व जनसंख्या दिवस: पांच लाख के लिए बसे चंडीगढ़ पर 17 लाख का बोझ, 60 साल पुराने मास्टर प्लान पर दबाव
करीब 60 वर्ष पहले चंडीगढ़ के तैयार मास्टर प्लान उस दौर की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया था जब आबादी सीमित थी और निजी वाहनों की संख्या भी बेहद कम थी लेकिन छह दशक में जनसंख्या, वाहनों और व्यावसायिक गतिविधियों में कई गुना वृद्धि हुई।
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देश का सबसे सुनियोजित शहर चंडीगढ़ आज अपनी तय क्षमता से कई गुना अधिक आबादी का दबाव झेल रहा है। जिस चंडीगढ़ को करीब पांच से छह लाख लोगों की आबादी के लिए बसाया गया था, वहां अब स्थायी आबादी 12 लाख के करीब पहुंच चुकी है।
इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मोहाली, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी और न्यू चंडीगढ़ से प्रतिदिन चार से पांच लाख लोग रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए शहर आते हैं। ऐसे में कार्यदिवसों पर शहर की वास्तविक आबादी 16 से 17 लाख तक पहुंच जाती है।
करीब 60 वर्ष पहले तैयार मास्टर प्लान उस दौर की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया था जब आबादी सीमित थी और निजी वाहनों की संख्या भी बेहद कम थी लेकिन छह दशक में जनसंख्या, वाहनों और व्यावसायिक गतिविधियों में कई गुना वृद्धि हुई जबकि शहर का क्षेत्रफल आज भी करीब 114 वर्ग किलोमीटर ही है। वर्ष 2011 की जनगणना में चंडीगढ़ की आबादी 10.55 लाख थी जो अब प्रशासन के अनुमान के अनुसार करीब 12 लाख तक पहुंच गई है।
इस बढ़ते दबाव का असर शहर की लगभग हर व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। प्रमुख सड़कों पर सुबह-शाम जाम आम हो गया है। पार्किंग की समस्या लगातार बढ़ रही है। जलापूर्ति, सीवरेज, सार्वजनिक परिवहन और हरित क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है। सरकारी अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और प्रमुख बाजारों में भी क्षमता से अधिक भीड़ देखने को मिल रही है।
मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट में बड़े बदलाव प्रस्तावित
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट में बड़े बदलाव प्रस्तावित किए हैं। योजना के तहत चुनिंदा क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) बढ़ाने, मिक्स्ड लैंड यूज को बढ़ावा देने, हाईराइज भवनों के निर्माण और पुनर्विकास की नीति लागू करने की तैयारी है। प्रशासन का मानना है कि दक्षिणी सेक्टरों में हाईराइज भवनों के जरिए बढ़ती आबादी को समायोजित किया जा सकेगा। वहीं सेक्टर-1 से 30 तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा हेरिटेज क्षेत्र घोषित होने के कारण वहां किसी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव संभव नहीं है।
हालांकि इन प्रस्तावों का विरोध भी शुरू हो गया है। क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी और आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग का कहना है कि केवल ऊंची इमारतें बनाना समाधान नहीं होगा। सड़क, पार्किंग, पेयजल, सीवरेज और अन्य शहरी बुनियादी ढांचे का समान गति से विस्तार किए बिना बढ़ती आबादी की चुनौती से नहीं निपटा जा सकता।
बढ़ती आबादी, बढ़ती चुनौती
नियोजित आबादी : 5-6 लाख
वर्तमान स्थायी आबादी : करीब 12 लाख
प्रतिदिन फ्लोटिंग आबादी : 4-5 लाख
वर्किंग डे पर वास्तविक आबादी : 16-17 लाख
शहर का क्षेत्रफल : करीब 114 वर्ग किमी
समाधान : मास्टर प्लान-2031 में हाईराइज, एफएआर वृद्धि और री-डेवलपमेंट का प्रस्ताव