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3 बच्चों को नहर में फेंका: मां की अंगुली थाम मेला देखने जाते तीनों के चेहरों पर थी मुस्कान, महिला खुद भी कूदी

Wed, 01 Jul 2026 02:09 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली
अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 01 Jul 2026 02:09 PM IST
सार

मोहाली से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यहां मेला दिखाने के बहाने ले गई महिला ने अपने तीन मासूम बच्चों को सरहिंद नहर में फेंक दिया। इस बाद खुद भी नहर में कूद गई। हालांकि वो खुद तैरकर बाहर निकल आई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला पति की दस महीने पहले हुई मौत से तनाव में थी।

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Mother throws three innocent children into Sirhind Canal after taking out on pretext of visiting fair Mohali
ropar canal incident - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मोहाली के मटौर गांव की एक महिला पर अपने तीन मासूम बच्चों को रोपड़ की सरहिंद नहर में फेंकने का आरोप है। घटना में दो बच्चों के शव बरामद हो गए हैं जबकि तीसरे बच्चे की तलाश जारी है। महिला ने भी नहर में छलांग लगाई थी लेकिन वह तैरकर बाहर आ गई।
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पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल महिला के खिलाफ लगे आरोप ससुराल पक्ष के बयानों पर आधारित हैं और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार महिला सोमवार दोपहर अपने तीनों बच्चों को मेला दिखाने की बात कहकर घर से निकली थी। 
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काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। जांच के दौरान महिला के मोबाइल फोन की लोकेशन रोपड़ क्षेत्र में मिली। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो महिला नहर किनारे मिली। पूछताछ में सामने आया कि उसने भी आत्महत्या के इरादे से नहर में छलांग लगाई थी लेकिन तैरकर बाहर निकल आई।
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पुलिस और बचाव दल ने सरहिंद नहर में तलाशी अभियान शुरू किया। देर शाम तक दस वर्षीय तपिश और छह वर्षीय तनवी के शव रोपड़ के पास नहर से बरामद कर लिए गए। चार वर्षीय नितिन का देर शाम तक कोई सुराग नहीं मिला। उसकी तलाश के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है। घर पर रिश्तेदारों और आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। पूरे गांव में शोक का माहौल है।
 

मेला दिखाने के बहाने से बच्चों को लेकर आई
मृतक बच्चों के दादा रामबाबू ने पुलिस को बताया कि उनकी बहू शकुंतला उर्फ सुमन बच्चों को मेला दिखाने के बहाने घर से लेकर गई थी। उनका आरोप है कि उसने ही बच्चों को नहर में फेंका। रामबाबू के अनुसार पिछले कुछ समय से शकुंतला का व्यवहार सामान्य नहीं था और वह कई बार बच्चों को नुकसान पहुंचाने जैसी बातें भी करती थी। 

पुलिस के अनुसार महिला के पति की करीब दस महीने पहले मौत हो चुकी है। शुरुआती जांच में उसके मानसिक तनाव से गुजरने की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। महिला की मानसिक स्थिति, पारिवारिक परिस्थितियों और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
 

दंपती ने भी लगाई थी छलांग
24 मई को राजपुरा के मंडोली गांव के पास भी ऐसा ही मामला सामने आया था। वहां एक दंपती ने भाखड़ा मेन लाइन नहर में छलांग लगा दी थी। स्थानीय लोगों ने पति-पत्नी को बचा लिया था लेकिन उनके तीन नावालिग बच्चों की नहर में डूबने से मौत हो गई थी।
 

मां की अंगुली थामकर मेला देखने जाते बच्चों के चेहरों पर थी मुस्कान
मोहाली के मटौर गांव में मंगलवार को हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। जिन तीन मासूम बच्चों ने शायद सुबह घर से यह सोचकर कदम बाहर रखा होगा कि मां उन्हें मेला दिखाने ले जा रही है, उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। 10 वर्षीय तपिश, छह वर्षीय तनवी और चार वर्षीय नितिन मां के साथ खुशी-खुशी घर से निकले थे। 

मासूम बच्चों के चेहरे पर मुस्कान थी, किसी को जरा भी अंदेशा नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद उनकी आंखें हमेशा के लिए बंद हो जाएगी। मासूमों ने यह सोचा भी ना होगा कि वह जिस मां की अंगुली को थामकर घर से निकले वह उन्हें मौत के करीब ले जा रही है।

मासूमों के साथ नहर में छलांग लगाने पर चंद मिनटों में तीनों बच्चे मौत की गोद में समा गए। दो बच्चों के शव नहर से बरामद हुए, जबकि सबसे छोटे बेटे की तलाश में गोताखोर घंटों तक नहर की खाक छानते रहे।

करीब 10 महीने पहले बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया था। पिता की मौत के बाद दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्य ही इन मासूमों का सहारा बने हुए थे। दादा रामबाबू व दादी दिहाड़ी कर परिवार को पाल रहे थे।

जवान बेटे की मौत के बाद पिता के कंधों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया। घर में बच्चों की किलकारियां फिर से लौटेंगी, इस उम्मीद में परिवार किसी तरह जिंदगी आगे बढ़ा रहा था, लेकिन मंगलवार की घटना ने परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी।

गांव में पसरा मातम
दो बच्चों के शव मिलने की सूचना जैसे ही मटौर गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम पसर गया। बच्चों को जानने वाले पड़ोसी और रिश्तेदार परिवार के घर पहुंचने लगे। हर किसी की जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल था कि आखिर इन मासूमों का क्या कसूर था।
 

गांव के लोगों का कहना है कि बच्चों को अक्सर गली में खेलते और हंसते-मुस्कुराते देखा जाता था। किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनका अंत इतना दर्दनाक होगा। घर के बाहर पसरा सन्नाटा और परिजनों की चीखें हर आने वाले की आंखें नम कर रही थीं।

 

काश मासूमों की जिंदगी बचाई जा सकती
फिलहाल सबसे छोटे बच्चे की तलाश जारी है। पूरा गांव इस उम्मीद में है कि तलाश जल्द पूरी हो, लेकिन इस हादसे ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब शायद जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेंगे। वहीं, गांव के लोगों की जुबान पर सिर्फ एक बात है काश, इन मासूमों की जिंदगी बचाई जा सकती।

 

महिला को फिलहाल पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में रखा गया है। अभी तक महिला के खिलाफ लगाए गए आरोप ससुराल पक्ष के बयानों पर आधारित हैं। मामले की जांच जारी है। सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। - गुरचरन सिंह, डीएसपी सिटी-1
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