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आवासीय योजना में निवेश: 10 साल बाद भी प्लॉट नहीं हुआ विकसित, फरीदकोट ट्रस्ट को 13.16 लाख लौटाने का आदेश

Thu, 09 Jul 2026 07:59 PM IST
शाहिल शर्मा मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Thu, 09 Jul 2026 07:59 PM IST
सार

ट्रस्ट दस साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी साइट पर विकास कार्य पूरे करने में विफल रहा। बिजली और पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम भी अधूरा था।

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Order to Faridkot Trust to refund 13.16 lakh
पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फरीदकोट इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट को फरीदकोट के एक उपभोक्ता को 13 लाख 16 हजार रुपये लौटाने का आदेश दिया है। यह राशि एक आवासीय योजना के तहत साल 2013 में एक प्लॉट के लिए जमा की गई थी जबकि संबंधित प्रोजेक्ट को अभी तक डेवलप नहीं किया जा सका। शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए मुआवजे के तौर पर 40 हजार रुपये भी करने होंगे, जिसमें मुकदमे का खर्च भी शामिल है।
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मामले की सुनवाई आयोग की अध्यक्ष जस्टिस दया चौधरी, सदस्य सिमरजोत कौर और विश्व कांत गर्ग की बैंच के समक्ष हुई। सुनवाई के बाद आयोग ने फैसला सुनाते हुए कहा, ट्रस्ट ने 10 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संबंधित परियोजना पर विकास कार्य पूरे नहीं किए हैं। 
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शिकायतकर्ता सुरजीत कौर ने 2013 में बाबा जीवन सिंह नगर योजना में 200 वर्ग गज के प्लॉट के लिए आवेदन किया था। उन्होंने 1 लाख 10 हजार रुपये जमा किए थे। उन्हें 9 दिसंबर 2013 को प्लॉट नंबर 95 आवंटित किया गया। 

प्लॉट की कुल कीमत 11 लाख रुपये तय की गई थी। सुरजीत कौर ने ट्रस्ट को कुल 13 लाख 16 हजार रुपये का भुगतान किया। हालांकि, ट्रस्ट दस साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी साइट पर विकास कार्य पूरे करने में विफल रहा। बिजली और पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम भी अधूरा था। इस मामले में  जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 28 नवंबर 2024 को सुरजीत कौर की शिकायत को स्वीकार कर लिया था। 

जिला आयोग ने ट्रस्ट को 13 लाख 16 हजार रुपये 9 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया था। यह ब्याज शिकायत दर्ज करने की तारीख से देना तय किया गया था। इसके अतिरिक्त पांच हजार रुपये मानसिक परेशानी के लिए और पांच हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया गया था। 

सुरजीत कौर ने इस आदेश के खिलाफ राज्य आयोग में अपील की। उन्होंने ब्याज दर बढ़ाने और ब्याज की गणना, शिकायत करने की तारीख नहीं बल्कि जमा की तारीख से दिए जाने की मांग की। इस अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ब्याज की दर 9 फीसदी उचित है। हालांकि, ब्याज की गणना राशि जमा करने की संबंधित तारीखों से की जानी चाहिए, न कि शिकायत दर्ज करने की तारीख से। आयोग ने मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए दिए गए मुआवजे को भी कम पाया और इसे बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दिया।
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