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मुख्यमंत्री सेहत योजना: 6 महीनों में 914 मरीजों को मिला कैशलेस स्ट्रोक उपचार, सवा चार करोड़ की दी मदद

Wed, 15 Jul 2026 02:19 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 15 Jul 2026 02:19 PM IST
सार

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी पंजाब के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का 4.15 करोड़ रुपये की लागत से उपचार किया गया।

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Punjab CM Health Scheme 914 patients received cashless stroke treatment in 6 months worth ₹4.25 crore
डाॅ. बलबीर सिंह - फोटो : X @AAPbalbir

विस्तार

स्ट्रोक किसी परिवार के जीवन में आने से पहले दस्तक नहीं देता। किसी धमनी में रुकावट या मस्तिष्क के ब्लड वेसल फटने से, सामान्य दिन एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल में बदल सकता है।

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पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत स्ट्रोक उपचार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि राज्य की स्वास्थ्य योजना सामान्य स्ट्रोक प्रबंधन से लेकर एडवांस्ड इमेजिंग, इंटेंसिव केयर और लंबे समय तक चलने वाले उपचार तक मस्तिष्क संबंधी आपात स्थितियों में मरीजों की सहायता कर रही है।
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स्ट्रोक, जिसे अक्सर ‘ब्रेन अटैक’ कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या कोई ब्लड वेसल फट जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्ट्रोक आज भी दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसे जोखिम कारकों से जुड़ी है जिन्हें रोका जा सकता है। 
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स्ट्रोक का इलाज काफी महंगा हो सकता है, जिससे अनेक परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी पंजाब के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीजों का 4.15 करोड़ रुपये की लागत से उपचार किया गया। इनमें एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले दर्ज किए गए, जिन पर 14.27 लाख रुपये का सबसे अधिक खर्च आया।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के रिकॉर्ड के अनुसार, एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक श्रेणियों में सबसे अधिक मरीजों का इलाज हुआ, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले अपेक्षाकृत कम थे। 

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार आर्थिक चिंता के कारण इलाज में देरी न करे। मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार मिले। 

सोबती न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल तथा मोहंदाई ओसवाल हॉस्पिटल, लुधियाना के सीनियर कंसलटेंट न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन सर्जन डॉ. हरमन सोबती ने कहा कि स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपात स्थिति है, जिसमें समय पर जांच और उपचार मरीज के भविष्य का फैसला कर सकते हैं। 


डॉ. हरमन सोबती के अनुसार, उपचार किए गए मामलों में इस्कीमिक स्ट्रोक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है और सीटी स्कैन तथा एमआरआई जैसी उन्नत जांच तकनीकें स्ट्रोक मैनेजमेंट का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। 

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