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Punjab Smuggling: ड्रोन से खेप, सोशल मीडिया से जाल, सरहद के युवाओं को बना रहे मोहरा; तस्करी का नया पैटर्न

Mon, 10 Aug 2026 03:04 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 10 Aug 2026 03:04 PM IST
सार

पंजाब में नशा और हथियार तस्करी का तरीका बदल गया है। फिरोजपुर से पठानकोट तक तस्करी का नया पैटर्न चल रहा है। छात्र और बेरोजगार युवा निशाने पर हैं। फर्जी आईडी से दोस्ती, पैसे का लालच और फिर नशे-असलहे की डिलीवरी की जाती है। जांच एजेंसियां डिजिटल कड़ियां खंगाल रहीं हैं।

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Punjab Smuggling Network Drug and Arms Traffickers Use Drones and Social Media to Target Border Youth
Punjab Smuggling - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सीमा पार बैठे तस्करों ने पंजाब में नशे और हथियारों की तस्करी का तरीका बदल दिया है। अब चुनौती केवल ड्रोन के जरिये सीमा पार से खेप पहुंचाने तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के माध्यम से सीमावर्ती गांवों के युवाओं से संपर्क कर उन्हें स्थानीय तस्करी नेटवर्क का हिस्सा बनाने का नया पैटर्न सामने आया है।
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फिरोजपुर, अमृतसर, फाजिल्का, तरनतारन और पठानकोट से सामने आए मामलों में कई कड़ियां एक जैसी हैं। कम उम्र के छात्र, बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवा जल्दी पैसा कमाने के लालच में निशाने पर हैं। कुछ मामलों में सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल के जरिये पहले दोस्ती करने और बाद में युवाओं को तस्करी में शामिल करने की बात जांच में सामने आई है।
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शुरुआत छोटे-मोटे काम से होती है। बाद में युवाओं को नशे या हथियारों की खेप उठाने और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम दिया जाता है। जांच एजेंसियां विदेशी नंबरों, संदिग्ध बातचीत, सोशल मीडिया खातों और भुगतान की कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं।
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दूसरी ओर ड्रोन के जरिये तस्करी का सिलसिला भी जारी है। पंजाब में इस साल के पहले सात महीनों में 161 ड्रोन और 392.355 किलो हेरोइन बरामद हो चुकी है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने सीमा पर ड्रोन रोकने के साथ डिजिटल माध्यम से स्थानीय युवाओं तक पहुंच बना रहे तस्करी नेटवर्क को तोड़ने की भी चुनौती है।
 

फिरोजपुर : लालच देकर छात्रों को बना रहे नेटवर्क का हिस्सा
सरहद से सटे गांवों के कई छात्र और नाबालिग पाकिस्तानी तस्करों के संपर्क में हैं। सोशल मीडिया के जरिये पैसे का लालच देकर उन्हें हेरोइन और असलहा तस्करी से जोड़ने के मामले सामने आए हैं। एएनटीएफ और पुलिस द्वारा नशे व हथियारों की खेप के साथ छात्रों और नाबालिगों के पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ी है। पकड़े गए ज्यादातर युवाओं की उम्र 16 से 20 वर्ष के बीच है।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार सीमावर्ती गांवों में आधुनिक सैलून खोलकर उनकी आड़ में तस्करी का नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश भी सामने आई है। पुलिस ममदोट, अबोहर और कपूरथला में विदेशी पिस्तौल की खेप के साथ सैलून संचालकों को गिरफ्तार कर चुकी है।
 

हाल ही में फिरोजपुर एएनटीएफ ने सिविल इंजीनियरिंग के एक छात्र को 12 किलो हेरोइन के साथ पकड़ा। पूछताछ में उसने कई खेप सप्लाई करने और पाकिस्तानी तस्करों के कहने पर पांच विदेशी पिस्तौल संबंधित लोगों तक पहुंचाने की बात कही। पुलिस और बीएसएफ ने सीमावर्ती गांवों में निगरानी और तलाशी बढ़ा दी है।
 

एसएसपी भूपेंद्र सिंह सिद्धू ने युवाओं को तस्करी से दूर रहने और अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों व अचानक बढ़े खर्च पर नजर रखने की अपील की है।

अमृतसर : एक साल में 54 नाबालिग पकड़े, फर्जी महिला आईडी से फंसाने का आरोप
सीमावर्ती इलाकों में कम उम्र के युवाओं को नशे और हथियारों की तस्करी में इस्तेमाल करने का पैटर्न सामने आया है। जांच में आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार और जल्दी पैसा कमाने की चाह रखने वाले युवाओं को सोशल मीडिया के जरिये निशाना बनाने की बात सामने आई है।

 

शुरुआत में लड़कियों की फर्जी आईडी से दोस्ती कर उन्हें हनी ट्रैप में फंसाया जाता है। इसके बाद आसान काम और कम समय में अधिक कमाई का लालच देकर तस्करी से जोड़ने का आरोप है।
 

फाजिल्का : इंस्टाग्राम, फेसबुक और टेलीग्राम से युवाओं तक पहुंच
जल्दी अमीर बनने और ऐशो-आराम की जिंदगी के लालच में सीमावर्ती युवा तस्करी के जाल में फंस रहे हैं। पाकिस्तान में बैठे तस्करों और आईएसआई समर्थित नेटवर्क द्वारा सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को नशे और हथियारों की तस्करी से जोड़ने की कोशिशों से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।

प्रारंभिक जांच में इंस्टाग्राम, फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिये कम उम्र के युवाओं खासकर विद्यार्थियों से संपर्क साधने की बात सामने आई है। आर्थिक लालच देकर उन्हें नेटवर्क में शामिल किया जाता है। जांच एजेंसियां फर्जी पहचान, विदेशी नंबरों, पाकिस्तानी सिम, भुगतान के तरीकों और तस्करों के निर्देशों की पड़ताल कर रही हैं।

मई व जून माह में कई मामलों में स्थानीय नेटवर्क के जरिये ड्रोन से भेजी गई नशे और हथियारों की खेप नाबालिगों से हेरोइन व हथियार उठवाने की बात सामने आई है। जिला पुलिस प्रमुख गगन अजीत सिंह ने बताया कि युवाओं को जागरूक किया जा रहा है।

तरनतारन : सात महीने में 161 ड्रोन और 392.355 किलो हेरोइन बरामद
सीमा पार से ड्रोन के जरिये नशे और हथियारों की तस्करी के बीच जांच एजेंसियां पाकिस्तानी तस्करों के डिजिटल नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही हैं। सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले ऐप के जरिये पंजाब के युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने के संकेत मिले हैं।

इंस्टाग्राम, फेसबुक, टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर विदेशी नंबरों, संदिग्ध बातचीत, सोशल मीडिया खातों और भुगतान की जानकारी की जांच हो रही है। आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को पहले छोटे काम और ज्यादा कमाई का लालच दिया जाता है। बाद में उन्हें नशे या हथियारों की खेप उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पांच अगस्त को तरनतारन में बरामद हथियारों की खेप उठाने पहुंचे नाबालिग तस्करों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जांच में उनके सोशल मीडिया के जरिये पाकिस्तानी तस्करों के संपर्क में होने की बात सामने आई।

 

पंजाब में इस साल के पहले सात महीनों में 161 ड्रोन और 392.355 किलो हेरोइन बरामद हुई है। मियांवाल में करीब तीन किलो हेरोइन और एक पिस्तौल की खेप पकड़ी गई। छह अगस्त को तरनतारन में पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध हथियार तस्कर से एमपी-9 राइफल, सात विदेशी पिस्तौल, 89 कारतूस, मैगजीन और दो मोबाइल बरामद किए गए।

पठानकोट : युवाओं से मंगवा रहे ड्रोन की लोकेशन
सीमा क्षेत्र के लोगों के मुताबिक पिछले दो वर्षों में इलाके में नशा तस्करी बढ़ी है। सीमा पार बैठे तस्कर युवाओं को पैसे और नशे का लालच देकर नेटवर्क में शामिल कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय पाकिस्तानी एजेंट और आईएसआई हैंडलर इंस्टाग्राम व फेसबुक के जरिये युवाओं से संपर्क साधते हैं।
 

जांच में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें युवाओं ने दरिया समेत अन्य स्थानों की ड्रोन लोकेशन भेजकर नशे की खेप मंगवाई। कुछ माह पहले पुलिस ने सीमा पार से आए एके-47 जैसे हथियारों का जखीरा भी बरामद किया था। इस दौरान पुलिस ने जून और जुलाई में की गई कार्रवाई के दौरान पाया कि कुछ नाबालिग सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी तस्करों के संपर्क में थे।
 

हाल में पुलिस ने पाकिस्तानी जासूसी के आरोप में एक व्यक्ति को पकड़ा था। इसके बाद सैन्य गतिविधियों पर सीसीटीवी से नजर रखने वाले तीन-चार लोगों की भी गिरफ्तारी हुई। विदेशी नंबरों से संपर्क की जांच की जा रही है। पुलिस और बीएसएफ ने गश्त बढ़ा दी है।


 

युवाओं की काउंसलिंग और रोजगार पर जोर जरूरी
पंजाब के सीमावर्ती जिलों में युवाओं की काउंसलिंग बहुत जरूरी है ताकि उन्हें आपराधिक गतिविधियों से दूर रखा जा सके। केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। खेल गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ उन्हें कौशल प्रशिक्षण देने की भी जरूरत है। जब तक इन सभी पहलुओं पर काम नहीं किया जाता तब तक सीमावर्ती जिलों में युवाओं को आपराधिक गतिविधियों से दूर रखना बड़ी चुनौती बनी रहेगी।-अर्पित शुक्ला, पूर्व डीजीपी, पंजाब
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