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पंजाबियों पर बढ़ा कर्ज: 13 हजार करोड़ के पार पहुंचा गोल्ड लोन, हरियाणा-हिमाचल से आगे निकला सूबा

Wed, 12 Aug 2026 09:10 AM IST
Nivedita राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 12 Aug 2026 09:10 AM IST
सार

पंजाब में बड़ी संख्या में परिवार बच्चों को पढ़ाई और रोजगार के लिए विदेश भेजने के लिए कर्ज ले रहे हैं। समय पर किस्तें न चुका पाने से कई परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।

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Rising debt among Punjabis Gold loans cross 13,000 crore mark state surpasses Haryana Himachal
पंजाब में सोना गिरवी रखने का चलन बढ़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में सोना गिरवी रखकर बच्चों की पढ़ाई और रोजगार के लिए विदेश भेजने का चलन बढ़ रहा है। इसका असर गोल्ड लोन के बढ़ते बकाये के रूप में सामने आया है। 
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वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पंजाब के लोगों पर 13,057 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन बकाया है। यह पड़ोसी हरियाणा के 9,161 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 42 प्रतिशत अधिक है। पड़ोसी राज्यों में पंजाब गोल्ड लोन के बकाये में सबसे आगे है।

रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 971 करोड़ रुपये जबकि चंडीगढ़ में 479 करोड़ और जम्मू-कश्मीर में 845 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन बकाया है। पंजाब में बड़ी संख्या में परिवार बच्चों को पढ़ाई और रोजगार के लिए विदेश भेजने के लिए कर्ज ले रहे हैं। समय पर किस्तें न चुका पाने से कई परिवारों पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।
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तमिलनाडु में सबसे अधिक गोल्ड लोन बकाया
रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडु के लोगों पर गोल्ड लोन का बकाया सबसे अधिक 4,11,656 करोड़ रुपये है। दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश में 2,22,953 करोड़ और कर्नाटक में 98,962 करोड़ रुपये का बकाया है।

19.38% प्रवासी परिवारों ने संपत्ति बेचकर जुटाया पैसा
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की एक स्टडी के अनुसार 19.38 प्रतिशत प्रवासी परिवारों ने विदेश जाने का खर्च जुटाने के लिए जमीन, प्लॉट, मकान, सोना, कार और ट्रैक्टर जैसी संपत्तियां बेचीं। प्रति प्रवासी परिवार औसतन 1.23 लाख रुपये की संपत्ति बेची गई। पूरे पंजाब में यह राशि अनुमानित 5,639 करोड़ रुपये है। कम आय वाले, भूमिहीन, श्रमिक और निम्न जाति से जुड़े कई परिवारों ने मकान और सोने के आभूषण तक बेच दिए।

प्रोफेसर शालिनी शर्मा के नेतृत्व में हुई स्टडी के अनुसार करीब 56 प्रतिशत परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए कर्ज लिया। प्रवासी परिवारों पर औसतन 3.13 लाख रुपये प्रति परिवार का कर्ज मिला। इसमें 38.8 प्रतिशत कर्ज गैर-संस्थागत और 61.2 प्रतिशत संस्थागत स्रोतों से लिया गया।

लोन चुकाना बड़ी चुनौती
अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बिमल अंजुम ने कहा कि पंजाब में गोल्ड लोन का चलन बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग बच्चों को विदेश भेजने के लिए कर्ज लेते हैं लेकिन बाद में इसे चुकाने की स्थिति में नहीं होते। यह गंभीर समस्या है।
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