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अमेरिका-ईरान संकट: पंजाब में बढ़ेगी पेट्रोल, डीजल-एलपीजी की मांग, 5736 हजार मीट्रिक टन कुल खपत का अनुमान
Mon, 13 Jul 2026 04:02 PM IST
Nivedita
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 13 Jul 2026 04:02 PM IST
सार
पंजाब में पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। साथ ही कृषि में भी मशीनरी के बढ़ते उपयोग के कारण भी पहले के मुकाबले डीजल का उपयोग बढ़ा है।
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Petrol Pump
- फोटो : AdobeStock
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विस्तार
अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच पंजाब में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की मांग बढ़ेगी जो कुल 5736 हजार मीट्रिक टन पहुंचाने का अनुमान है।
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पेट्रोलियम व प्राकृतिक मंत्रालय की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है जिसके अनुसार प्रदेश उत्तर भारत के उन टॉप राज्यों में शामिल हैं जहां पेट्रोलियम पदार्थों की मांग सबसे अधिक बढ़ने वाली है। प्रदेश में पेट्रोल और डीजल वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। साथ ही कृषि में भी मशीनरी के बढ़ते उपयोग के कारण भी पहले के मुकाबले डीजल का उपयोग बढ़ा है।
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रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026-27 के दौरान सूबे में एलपीजी की खपत 1110 हजार मीट्रिक टन (टीएमटी) रहने वाली है और खपत के मामले में सूबा उत्तर भारत में चौथे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश 4828 हजार मीट्रिक टन की खपत के अनुमान के साथ पहले नंबर पर है जबकि राजस्थान 1858 और हरियाणा में एलपीजी की 1178 हजार मीट्रिक टन खपत की अनुमान के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर है।
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पिछले कुछ दिनों में प्रदेश में लोगों को एलपीजी का सिलेंडर की कमी का सामना करना पड़ा था और सिलेंडर लेने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा रहा था। अब स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ था लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा जंग शुरू होने के कारण लोगों की चिंता फिर से बढ़ गई है। प्रदेश में पहले से एलपीजी की मांग बढ़ी है और इसका अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान के दौरान एलपीजी की खपत पंजाब में 1088 हजार मीट्रिक टन बताई गई थी।
पेट्रोल की मांग 1330 हजार मीट्रिक तक पहुंचने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोल की मांग भी प्रदेश में 1330 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचाने का अनुमान है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में पेट्रोल की मांग 1607 और दिल्ली में 1130 हजार मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। पंजाब में पिछले साल के मुकाबले पेट्रोल की मांग अधिक रहने वाली है क्योंकि पिछले साल अनुमानित 1288 हजार मीट्रिक टन थी। सूबे में मई माह के दौरान भी पेट्रोल की खपत में वृद्धि देखने को मिली थी और प्रदेश उन राज्यों की सूची में शामिल रहा, जहां वृद्धि दर ठीक रही थी। इस तरह आगे खपत में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।
डीजल की प्रदेश में रिकार्ड 3296 हजार मीट्रिक टन की मांग
आंकड़ों के अनुसार डीजल की सूबे में रिकार्ड 3296 हजार मीट्रिक टन मांग रहने वाली है। राज्य में कुल डीजल खपत का लगभग 50% हिस्सा कृषि कार्यों में खर्च होता है। खेतों की जुताई, बुवाई, और फसल कटाई के लिए ट्रैक्टर कंबाइन हार्वेस्टर डीजल से चलते हैं। जिन क्षेत्रों में बिजली की कमी है या लोड अधिक है, वहां डीजल इंजन वाले ट्यूबवेलों से खेतों की सिंचाई की जाती है। इसी तरह प्रदेश में 1.56 करोड़ वाहन पंजीकृत होम चुके हैं।
वर्ष 2026 में ही 4,54,530 वाहन पंजीकृत हुए हैं जिनमें सबसे अधिक हिस्सेदारी पेट्रोल और डीजल वाहनों की है। यही कारण है कि प्रदेश में डीजल की खपत अधिक है और आगे इसके बढ़ने के कारण डीजल का संकट भी खड़ा हो सकता है। पहले भी युद्ध के कारण किसानों ने आरोप लगाया था कि खरीफ सीजन में धान की रोपाई के दौरान उन्हें डीजल भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिला था। पिछले साल डीजल की अनुमानित खपत 3247 हजार मीट्रिक टन रही थी। हालांकि हरियाणा में डीजल की अधिक 4406 हजार टन खपत पहुंचने का अनुमान है।