वर्ल्ड टीबी डे: पंजाब में पांच साल में 22 फीसदी बढ़े मरीज, सरकार ने बढ़ाई निगरानी; हाई-रिस्क जिलों पर खास फोकस
टीबी एक संक्रामक रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलता है। समय पर इलाज और पूरा उपचार लेने से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग में यह बीमारी अधिक घातक मानी जाती है।
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पंजाब में ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) का खतरा कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में टीबी मरीजों की संख्या में 22 फीसदी तक इजाफा हुआ है।
हालात यह हैं कि सूबे में रोजाना औसतन 164 लोग इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है, जिसे संसद में भी पेश किया गया है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पंजाब में 61,360 टीबी मरीज दर्ज किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 59,020 थी। इससे पहले 2023 में 55,224, 2022 में 55,150 और 2021 में 50,142 मरीज सामने आए थे। लगातार बढ़ते आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि टीबी मुक्त अभियान का लक्ष्य फिलहाल दूर होता नजर आ रहा है।
राज्य के पांच जिले लुधियाना, जालंधर, बठिंडा, पटियाला और अमृतसर टीबी के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील माने गए हैं। यहां सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों की भी निगरानी की जा रही है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। मरीजों को उपचार से जुड़े दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं और उनके संपर्क में आए लोगों की भी जांच की जा रही है।
बिना लक्षण वाले मरीज बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे मरीजों की पहचान है, जिनमें टीबी के स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इन्हें ‘एसिम्प्टोमैटिक’ मरीज कहा जाता है। ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। चेस्ट एक्स-रे के जरिए स्क्रीनिंग बढ़ाई गई है। साथ ही मरीजों को इलाज बीच में न छोड़ने के लिए जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि अधूरा इलाज संक्रमण को और खतरनाक बना सकता है।
हरियाणा में स्थिति और गंभीर
पड़ोसी राज्य हरियाणा में टीबी की स्थिति पंजाब से भी ज्यादा चिंताजनक है। वर्ष 2025 में वहां 88,513 और 2024 में 86,635 मरीज दर्ज किए गए। वहीं हिमाचल प्रदेश में 14,637 और जम्मू-कश्मीर में 11,959 मामले सामने आए।
केंद्र से 46 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें मिली हैं, जिन्हें सभी जिला अस्पतालों में भेजा गया है। इससे जांच और स्क्रीनिंग बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि एक लाख लोगों पर 1200 टेस्ट किए जा रहे हैं और टीबी मुक्त भारत अभियान को और तेज किया जा रहा है। -राजेश भास्कर, राज्य टीबी अधिकारी