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सियासी झटके: कई दिग्गज छोड़कर चले गए, 'आप' चुनौतियों का करती रही सामना; अब पार्टी को लगा बड़ा झटका

सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 26 Apr 2026 03:05 PM IST
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सार

आम आदमी पार्टी को कई दिग्गज छोड़कर चले गए, पार्टी चुनौतियों का सामना करती रही। शून्य से लेकर 42 फीसदी वोट तक का सफर और फिर सियासी झटके। अब राघव चड्ढा के नेतृत्व में सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में विलय पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है जो पहले ही अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही थी। 

AAP Punjab Journey: From Rapid Rise to Internal Challenges and Leadership Exits
भाजपा में शामिल हुए राघव समेत संदीप पाठक और अशोक मित्तल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी का सफर जितना तेज और रोमांचक रहा है उतना ही उतार-चढ़ाव और अंदरूनी अस्थिरता से भी भरा हुआ है। 2014 से 2024 तक पार्टी ने जहां एक ओर ऐतिहासिक सफलता हासिल की, वहीं दूसरी ओर गुटबाजी और नेता बदलने के कारण कई बार मुश्किल दौर भी देखे। 
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आम आदमी पार्टी की शुरुआत 2012 में एक आंदोलन के रूप में हुई थी और इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 24.5 फीसदी वोट हासिल कर 4 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया।
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खास बात यह थी कि सभी चार सीटें पंजाब से जीती गईं, जिनमें प्रमुख नेता हरिंदर सिंह खालसा, भगवंत मान, प्रो. साधू सिंह और धर्मवीर गांधी शामिल थे। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 23.9 फीसदी वोट शेयर के साथ 20 सीटें जीतीं और खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित किया लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का ग्राफ अचानक गिर गया। वोट शेयर घटकर 7.5 फीसदी हो गया और पार्टी केवल एक सीट पर सिमट गई।

2022 आप के लिए बदलाव का साल साबित हुआ। 42.3 फीसदी वोट शेयर के साथ पार्टी ने 92 सीटें जीतकर पंजाब में ऐतिहासिक जीत हासिल की। इसके बाद पार्टी ने 2024 में लोकसभा चुनाव में 26.2 फीसदी वोट शेयर हासिल किया और तीन सीटें जीतीं।

 

हालांकि यह सुधार था लेकिन 2022 जैसी लहर फिर से नहीं बन पाई। इस पूरे दौर में पार्टी को कई बड़े झटके भी लगे खासकर अपने ही नेताओं से। 2014 में सांसद बने डॉ. धर्मवीर गांधी ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस जॉइन की और हरिंदर सिंह खालसा को निष्कासित कर दिया गया। 

इसके बाद सुखपाल खैरा और एचएस फूलका जैसे प्रमुख नेता भी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में चले गए। कंवर संधू को अनुशासनहीनता के आरोप में बाहर किया गया और सुच्चा सिंह छोटेपुर, गुरप्रीत सिंह घुग्गी जैसे नेता भी पार्टी से अलग हो गए। हालांकि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस और अकाली दल के कई नेताओं को पार्टी में शामिल किया।

अब पार्टी को लगा बड़ा झटका
अब राघव चड्ढा के नेतृत्व में सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में विलय पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है जो पहले ही अंदरूनी मतभेदों से जूझ रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आप की सबसे बड़ी ताकत तेजी से नए चेहरे लाना अब उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है।

राजनीतिक झटकों से घबराने वाली नहीं आप
आप के सात राज्यसभा सांसदों का भाजपा में जाना निंदनीय और पार्टी की लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। पार्टी इस तरह के राजनीतिक झटकों से घबराने वाली नहीं है और हमेशा ऐसी चुनौतियों से मजबूत होकर उभरती रही है। राजनीति में सन्न और अपने स्टैंड पर कायम रहना बेहद जरूरी है। कुछ चेहरों के जाने से संगठन की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ेगा।-अमन अरोड़ा, प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री, आम आदमी पार्टी

प्रदेश के लोगों के साथ धोखा
लोग भारतीय जनता पार्टी के दबाव में पार्टी छोड़ रहे हैं, वे पंजाब के लोगों के साथ गद्दारी कर रहे हैं। इन सांसदों को पंजाब के किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, कर्मचारियों और आम लोगों की आवाज और उनके हकों की बात राज्यसभा में बुलंद करने के लिए भेजा गया। बावजूद इसके इन लोगों को प्रदेश के साथ धोखा किया है।-दीपक बाली, महासचिव, आम आदमी पार्टी

 

जो जैसा बोएगा, वैसा ही काटेगा
पंजाब में आप सरकार ने भ्रष्टाचार बोया, पैसे वालों को बोया, अवसरवादियों को बोया, बाहरी लोगों को बोया, तो फिर आप यह उम्मीद कैसे कर सकते थे कि आपको बदले में समर्पण और वफादारी मिलेगी? जो जैसा बोएगा, वैसा ही काटेगा। आप ने अपने स्वयंसेवकों और राज्य के लोगों के बजाय भ्रष्ट बाहरी लोगों और पैसे वालों को ज्यादा अहमियत दी।- सुखबीर बादल, अध्यक्ष, शिअद
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