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पंजाब में भाजपा की राजनीति: अकाली दल के बिना नया नेतृत्व तैयार, सिख चेहरों को अहम पद; ये है पार्टी का लक्ष्य

Wed, 19 Aug 2026 09:45 AM IST
Nivedita सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर Published by: Nivedita Updated Wed, 19 Aug 2026 09:45 AM IST
सार

भाजपा केवल सीटें बढ़ाने के बजाय सिख बहुल पंजाब में स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है। यदि भाजपा सिख समाज में प्रभाव बढ़ाती है तो अकाली दल के पारंपरिक आधार पर असर पड़ेगा। ग्रामीण और जाट सिख मतदाताओं में भाजपा की सक्रियता राज्य के राजनीतिक समीकरण बदल सकती है।

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BJP Sikh politics in Punjab assembly election new leadership without Akali Dal
पंजाब विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सिख राजनीति को नया स्वरूप देना शुरू किया है। पार्टी अब शिरोमणि अकाली दल के साथ राजनीतिक गठजोड़ तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसका लक्ष्य सिख समुदाय के भीतर अपने स्वतंत्र नेतृत्व का आधार मजबूत करना है। इसी रणनीति के तहत भाजपा ने कई प्रमुख सिख चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं।
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पंजाब की कुल आबादी में सिखों की हिस्सेदारी करीब 57.7 फीसदी है। राज्य की राजनीति में सिख समुदाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। सिख समाज में जाट सिख समुदाय का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव विशेष रहा है। पंजाब की खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इनकी मजबूत मौजूदगी है।

अकाली दल, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में जाट सिख नेतृत्व प्रभावशाली रहा है। भाजपा अब इसी प्रभावशाली सामाजिक आधार में अपनी राजनीतिक जगह बनाने का प्रयास कर रही है। पार्टी अब केवल हिंदू शहरी मतदाताओं तक सीमित नहीं रहना चाहती है। वह ग्रामीण पंजाब और सिख समाज में अपनी स्वतंत्र स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है। राजनीतिक माहिर डीएवी के प्रोफेसर कुणाल के अनुसार, जाट सिख नेतृत्व को नजरअंदाज करना आसान नहीं। भाजपा को सिख समाज के विभिन्न वर्गों और ग्रामीण जाट सिख मतदाताओं के बीच जगह बनानी होगी।
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राष्ट्रीय स्तर पर सिख चेहरों को अहम जिम्मेदारियां
भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य इकबाल सिंह लालपुरा सिख प्रतिनिधित्व का प्रमुख चेहरा हैं। हरजीत सिंह ग्रेवाल को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी मिली हुई है। राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू पार्टी के प्रभावशाली सिख चेहरों में शामिल हैं। वह शिक्षाविद और चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं। पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। यह भी भाजपा की व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
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पंजाब में नेतृत्व विस्तार
पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को भाजपा की राष्ट्रीय टीम में उपाध्यक्ष बनाया गया है। इससे पंजाब के सिख नेतृत्व को पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में अधिक स्थान मिला है। पंजाब भाजपा की कमान केवल सिंह ढिल्लों को सौंपना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। सिख चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने सिख मतदाताओं तक सीधा संदेश दिया है। यह पहली बार है जब पंजाब में कोई जाट सिख चेहरा प्रदेश अध्यक्ष बना है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब पर ध्यान केंद्रित करने के लिए केंद्रीय जिम्मेदारी छोड़ी है।

अकाली दल के विकल्प के रूप में स्थापित होने का प्रयास
भाजपा की रणनीति से संकेत मिलता है कि पार्टी अकाली दल पर निर्भर नहीं रहना चाहती। वह सिख समाज के भीतर सीधे भाजपा से जुड़ा नेतृत्व आगे बढ़ा रही है। यह रणनीति 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए और महत्वपूर्ण हो जाती है।
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