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100 करोड़ का जीएसटी फर्जीवाड़ा: कसा ईडी का शिकंजा, पंजाब से दिल्ली-एनसीआर तक छह ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे

Tue, 09 Jun 2026 12:37 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/जालंधर/लुधियाना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़/जालंधर/लुधियाना Published by: Nivedita Updated Tue, 09 Jun 2026 12:37 PM IST
सार

पंजाब के अन्य शहरों में भी कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की गई है। हालांकि, ईडी की ओर से अभी तक किसी व्यक्ति या संस्था का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई से कारोबारी वर्ग में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है।

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ED Raid in Jalandhar arvind Kejriwal ludhiana
जालंधर में ईडी की रेड - फोटो : संवाद

विस्तार

100 करोड़ रुपये के कथित जीएसटी फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को पंजाब, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में एक साथ छह ठिकानों पर छापे मारे। 
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कार्रवाई हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन और धन शोधन के आरोपों की जांच के तहत की गई। ईडी की टीमों ने जालंधर, लुधियाना, बरेली, नोएडा और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कई आवासीय और कारोबारी परिसरों की तलाशी ली।
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जालंधर में न्यू जवाहर नगर स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट अमित बजाज के आवास और कार्यालय पर दबिश दी गई। वहीं लुधियाना के शहीद भगत सिंह नगर में सीए अंकुर गर्ग के घर भी ईडी की टीम पहुंची। दोनों को पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा का करीबी माना जाता है। तलाशी के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, डिजिटल उपकरणों और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। सूत्रों के अनुसार कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एजेंसी ने अपने कब्जे में लिए हैं।
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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ईडी की कार्रवाई कंपनी से जुड़े सहयोगियों, निदेशकों और संपत्ति कारोबारियों के कार्यालयों तथा आवासीय परिसरों तक पहुंची। वहीं गुरुग्राम के उद्योग विहार स्थित मुख्य कार्यालयों और संबंधित कारोबारी इकाइयों में भी दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई।

ईडी सूत्रों के मुताबिक जांच का केंद्र हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क हैं। एजेंसी को संदेह है कि फर्जी कंपनियों और कागजी लेन-देन के जरिये जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया गया। साथ ही धन के प्रवाह और कथित मनी लॉन्ड्रिंग की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर धन किन व्यक्तियों और संस्थाओं तक पहुंचा तथा क्या राउंड-ट्रिपिंग के जरिये धन शोधन किया गया।


दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में कंपनी से जुड़े सहयोगियों, निदेशकों और कारोबारी संपर्कों के परिसरों की भी तलाशी ली गई। जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ इकाइयों का इस्तेमाल फर्जी मोबाइल फोन खरीद बिल तैयार करने, कर लाभ लेने और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किया गया। हालांकि ईडी ने अब तक बरामदगी या नई कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है।

उल्लेखनीय है कि इसी मामले में करीब एक माह पहले पंजाब सरकार के तत्कालीन मंत्री और हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के पूर्व निदेशक संजीव अरोड़ा को ईडी ने गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। गिरफ्तारी के बाद पंजाब सरकार ने उनके विभागों का प्रभार अन्य मंत्रियों को सौंप दिया था।

सीएम मान और केजरीवाल ने लगाया कारोबारियों को परेशान करने का आरोप

ईडी की कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर पंजाब के व्यापारियों और कारोबारियों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग को डरने की जरूरत नहीं है और पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है। उधर ईडी का कहना है कि दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व मंत्री के करीबी सीए भी जांच के घेरे में

जालंधर के सीए अमित बजाज और लुधियाना के सीए अंकुर गर्ग पर ईडी की कार्रवाई ने कारोबारी और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। अमित बजाज नगर निगमों और विभिन्न सरकारी विभागों के बड़े ठेकेदार परिवार से जुड़े हैं। वहीं अंकुर गर्ग पंजाब के कॉर्पोरेट जगत में टैक्स, जीएसटी और कॉर्पोरेट ऑडिट मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों के विभिन्न कारोबारी समूहों और प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंधों की भी जांच की जा रही है।

5,300 भारतीय सिम साइबर ठगी में इस्तेमाल

ईडी ने एक अन्य जांच में कंबोडिया से संचालित 36 हजार सक्रिय भारतीय सिम कार्डों की पहचान की थी। इनमें से करीब 5,300 सिम देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़े पाए गए। जांच में सामने आया कि भारतीय मोबाइल नंबर फर्जी तरीके से सक्रिय कर विदेशी नागरिकों को उपलब्ध कराए गए थे। बाद में इनका इस्तेमाल कंबोडिया से भारत में साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया गया।
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