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Chandigarh: बम डिटेक्शन टीम में तैनात आठ जवानों ने नहीं लिया औपचारिक प्रशिक्षण, सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी
संदीप खत्री, संवाद, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 20 Apr 2026 09:14 AM IST
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सार
हाल ही में 30 से अधिक स्कूलों और कई सरकारी व सार्वजनिक स्थानों जैसे एयरपोर्ट, पासपोर्ट कार्यालय, जिला अदालत, हाईकोर्ट और सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं।
चंडीगढ़ पुलिस
- फोटो : अमर उजाला/फाइल
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विस्तार
चंडीगढ़ में लगातार मिल रही बम धमकियों के बीच सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी सामने आई है। चंडीगढ़ पुलिस की बम डिटेक्शन टीम में तैनात 28 कर्मियों में से आठ जवान ऐसे हैं, जिन्होंने बम डिटेक्शन का कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया है। इसके बावजूद ये जवान पिछले तीन से चार वर्षों से टीम में सक्रिय ड्यूटी निभा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पूर्व डीजीपी सुरेंद्र यादव के कार्यकाल में प्रशिक्षित जवानों के तबादले के बाद बिना प्रशिक्षण वाले कर्मियों को टीम में शामिल कर लिया गया। बम डिटेक्शन का विशेष प्रशिक्षण जालंधर और मानेसर में होता है लेकिन पिछले करीब चार वर्षों से यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। बम की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचने वाले जवान जोखिम के बीच काम करने को मजबूर हैं।
हाल ही में 30 से अधिक स्कूलों और कई सरकारी व सार्वजनिक स्थानों जैसे एयरपोर्ट, पासपोर्ट कार्यालय, जिला अदालत, हाईकोर्ट और सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। इन घटनाओं में सर्च ऑपरेशन कई-कई घंटों तक चला जिससे टीम की सीमित संख्या और संसाधनों की कमी साफ नजर आई। एक साथ कई स्थानों पर जांच की जरूरत पड़ने पर टीमों को बारी-बारी से सर्च करना पड़ा।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शहर की बम डिटेक्शन टीम फिलहाल केवल संदिग्ध वस्तुओं की पहचान तक सीमित है। विस्फोटक को निष्क्रिय करने की आधुनिक तकनीक और उपकरणों का अभाव है। इससे पहले भी बम मिलने की घटनाओं में सेना या अन्य विशेष एजेंसियों की मदद लेनी पड़ी है।
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सूत्रों के अनुसार पूर्व डीजीपी सुरेंद्र यादव के कार्यकाल में प्रशिक्षित जवानों के तबादले के बाद बिना प्रशिक्षण वाले कर्मियों को टीम में शामिल कर लिया गया। बम डिटेक्शन का विशेष प्रशिक्षण जालंधर और मानेसर में होता है लेकिन पिछले करीब चार वर्षों से यह प्रक्रिया ठप पड़ी है। बम की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचने वाले जवान जोखिम के बीच काम करने को मजबूर हैं।
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हाल ही में 30 से अधिक स्कूलों और कई सरकारी व सार्वजनिक स्थानों जैसे एयरपोर्ट, पासपोर्ट कार्यालय, जिला अदालत, हाईकोर्ट और सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। इन घटनाओं में सर्च ऑपरेशन कई-कई घंटों तक चला जिससे टीम की सीमित संख्या और संसाधनों की कमी साफ नजर आई। एक साथ कई स्थानों पर जांच की जरूरत पड़ने पर टीमों को बारी-बारी से सर्च करना पड़ा।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शहर की बम डिटेक्शन टीम फिलहाल केवल संदिग्ध वस्तुओं की पहचान तक सीमित है। विस्फोटक को निष्क्रिय करने की आधुनिक तकनीक और उपकरणों का अभाव है। इससे पहले भी बम मिलने की घटनाओं में सेना या अन्य विशेष एजेंसियों की मदद लेनी पड़ी है।
