पंजाब चुनाव: डेरा बल्लां के गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र पर क्रेडिट वार शुरू, 23 सीट जीतने की कवायद
पंजाब की राजनीति में दोआबा क्षेत्र का विशेष महत्व है। जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर को मिलाकर दोआबा में कुल 23 विधानसभा सीटें हैं। यह 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा का लगभग पांचवां हिस्सा है।
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पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले डेरा सचखंड बल्लां राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। श्री गुरु रविदास बाणी अध्ययन केंद्र की आधारशिला रखे जाने के बाद आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है।
यह लड़ाई केवल परियोजनाओं के श्रेय तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य रविदासिया समाज और व्यापक दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है।
दलित आबादी का गढ़ है दोआबा
दोआबा में दलित आबादी करीब 38 फीसदी है। इन 23 सीटों में से आठ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। बाकी 15 सामान्य सीटों पर भी दलित मतदाताओं का प्रभाव चुनावी नतीजे तय करता है। डेरा बल्लां का सामाजिक नेटवर्क जालंधर और होशियारपुर के अलावा कपूरथला और नवांशहर तक फैला है। इसका राजनीतिक प्रभाव दोआबा की सभी 23 सीटों पर महसूस किया जा सकता है।
आम आदमी पार्टी मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा बाणी अध्ययन केंद्र की आधारशिला को अपनी उपलब्धि बता रही है। यह परियोजना पहले घोषित हुई थी, जिसे अब जमीन पर उतारा जा रहा है।
कांग्रेस दावा करती है कि इस केंद्र की मूल पहल और फंडिंग उसके शासनकाल में शुरू हुई थी। पार्टी इसे अपने सामाजिक न्याय और दलित नेतृत्व की विरासत से जोड़ना चाहती है। भाजपा भी दलित समाज, खासकर रविदासिया समुदाय तक पहुंच बनाने में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डेरा यात्रा और संत निरंजन दास को पद्मश्री मिलना इसी रणनीति का हिस्सा है।
एक दल का समर्थक नहीं है दलित समाज
हालांकि, पंजाब का दलित समाज किसी एक पार्टी को वोट देने वाला एकजुट समूह नहीं है। रविदासिया, आद-धर्मी और रामदासिया जैसे विभिन्न दलित समूहों की धार्मिक पहचान और राजनीतिक पसंद अलग-अलग हैं। डेरा बल्लां का प्रभाव भी हर दलित समूह पर समान नहीं माना जा सकता। 2027 में मतदाता धार्मिक सम्मान के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर भी विचार करेंगे। अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होगा, जिन्हें साधे बिना किसी भी दल के लिए सत्ता का गणित पूरा करना आसान नहीं होगा।
दोआबा का चुनावी गणित
2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दोआबा की 23 में से 10 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को नौ सीटें मिली थीं। 2017 में कांग्रेस ने यहां 15 सीटें जीतकर अपना मजबूत आधार दिखाया था। यह दर्शाता है कि दोआबा में चुनावी हवा बदलने पर सीटों का गणित तेजी से बदल सकता है। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में 34 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। दोआबा में आठ आरक्षित सीटों के अलावा 15 सामान्य सीटों पर भी दलित मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।