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बिट्टू की कुर्सी खाली: भाजपा को जनाधार बढ़ाने वाले चेहरे की तलाश, केंद्रीय मंत्री के लिए चर्चा में ये नाम
Sun, 26 Jul 2026 03:06 PM IST
Sharukh Khan
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 26 Jul 2026 03:06 PM IST
सार
केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे के बाद भाजपा में मंथन तेज हो गया है। भाजपा बड़ा राजनीतिक दांव खेल सकती है। तरुण चुघ से सुनील जाखड़ तक कई नाम चर्चा में हैं।
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ravneet singh bittu
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे के बाद पंजाब से केंद्र सरकार में भाजपा का प्रतिनिधित्व है। राष्ट्रपति ने 24 जुलाई 2026 को उनका इस्तीफा स्वीकार किया।
अब मोदी सरकार पंजाब से अगला केंद्रीय मंत्री किसे बनाएगी, इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। भाजपा आलाकमान ने अभी तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। संभावित कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की अटकलों के बीच कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
भाजपा के लिए यह फैसला 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक, सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने का होगा। पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो संगठन को मजबूत करे और राज्य में जनाधार बढ़ाए। पूर्व पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ प्रमुख दावेदारों में से हैं।
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अब मोदी सरकार पंजाब से अगला केंद्रीय मंत्री किसे बनाएगी, इस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। भाजपा आलाकमान ने अभी तक किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। संभावित कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की अटकलों के बीच कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
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भाजपा के लिए यह फैसला 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक, सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने का होगा। पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो संगठन को मजबूत करे और राज्य में जनाधार बढ़ाए। पूर्व पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ प्रमुख दावेदारों में से हैं।
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उनकी साफ-सुथरी छवि, प्रशासनिक अनुभव और किसान परिवार से जुड़ाव उन्हें एक मजबूत विकल्प बनाता है। हालांकि, वह फिलहाल संसद सदस्य नहीं हैं। यदि उन्हें मंत्री बनाया जाता है तो छह महीने के भीतर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनना होगा।
जाखड़ का पंजाब की राजनीति में गहरा प्रभाव है और वह प्रधानमंत्री मोदी व अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। रवनीत सिंह बिट्टू को भी पंजाब संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलें हैं।
अन्य प्रमुख दावेदार
दूसरे मजबूत दावेदारों में तरुण चुघ का नाम सबसे आगे है। वह भाजपा संगठन के भरोसेमंद रणनीतिकार और राष्ट्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं। हाल ही में राज्यसभा पहुंचने से उनका राजनीतिक कद बढ़ा है। हालांकि, संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मंत्री बनने में बाधा बन सकती है।
दूसरे मजबूत दावेदारों में तरुण चुघ का नाम सबसे आगे है। वह भाजपा संगठन के भरोसेमंद रणनीतिकार और राष्ट्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं। हाल ही में राज्यसभा पहुंचने से उनका राजनीतिक कद बढ़ा है। हालांकि, संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मंत्री बनने में बाधा बन सकती है।
नए चेहरों पर भी नजर
हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और विक्रमजीत सिंह साहनी के नाम भी चर्चा में हैं। तीनों के पास संसदीय अनुभव है और अलग-अलग सामाजिक वर्गों में प्रभाव रखते हैं। राघव चड्ढा युवा नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में उनके हालिया प्रवेश से उन्हें तुरंत केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलना मुश्किल होगा।
हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और विक्रमजीत सिंह साहनी के नाम भी चर्चा में हैं। तीनों के पास संसदीय अनुभव है और अलग-अलग सामाजिक वर्गों में प्रभाव रखते हैं। राघव चड्ढा युवा नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में उनके हालिया प्रवेश से उन्हें तुरंत केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलना मुश्किल होगा।
उद्योगपति एवं शिक्षाविद अशोक मित्तल उद्योग और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी मजबूत पहचान रखते हैं, जबकि उद्योगपति एवं समाजसेवी विक्रमजीत सिंह साहनी पंजाब और प्रवासी भारतीय समुदाय में अच्छी पकड़ रखते हैं। इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा में उनका प्रवेश अपेक्षाकृत हाल का होने के कारण उन्हें तुरंत केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान मिलना आसान नहीं होगा।
बिट्टू के भविष्य को लेकर भी अटकलें जारी
रवनीत सिंह बिट्टू के भविष्य को लेकर भी राजनीतिक अटकलें जारी हैं। मंत्री पद छोड़ने के बावजूद भाजपा में उनकी भूमिका खत्म होती नहीं दिख रही। पार्टी उन्हें पंजाब संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि यदि भाजपा पंजाब में नए नेतृत्व के साथ चुनावी रणनीति बनाती है तो बिट्टू को प्रदेश अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
रवनीत सिंह बिट्टू के भविष्य को लेकर भी राजनीतिक अटकलें जारी हैं। मंत्री पद छोड़ने के बावजूद भाजपा में उनकी भूमिका खत्म होती नहीं दिख रही। पार्टी उन्हें पंजाब संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि यदि भाजपा पंजाब में नए नेतृत्व के साथ चुनावी रणनीति बनाती है तो बिट्टू को प्रदेश अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह ऐसा चेहरा चुने जो सिख, हिंदू, शहरी, ग्रामीण और दलित सभी वर्गों के बीच सकारात्मक संदेश दे सके। इसके साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव, संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय संतुलन, संसदीय क्षमता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के प्रति विश्वास जैसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पंजाब का केंद्र की राजनीति में हमेशा महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राज्य ने देश को दो प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और इंद्र कुमार गुजराल दिए। इसके अलावा सरदार स्वर्ण सिंह, ज्ञानी जैल सिंह, बूटा सिंह, सुरजीत सिंह बरनाला, प्रकाश सिंह बादल, सुखदेव सिंह ढींडसा, हरसिमरत कौर बादल, अंबिका सोनी, अश्वनी कुमार, मनीष तिवारी, एम.एस. गिल, सोम प्रकाश, विजय सांपला और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे अनेक नेता केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री या राज्य मंत्री के रूप में पंजाब का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ज्ञानी ज़ैल सिंह तो राष्ट्रपति भी बने।
अब सभी की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं। यदि जल्द कैबिनेट विस्तार होता है तो पंजाब को दोबारा केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।