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Ludhiana News: जगरांव में नशे से उजड़े 14 परिवार, न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Updated Mon, 08 Jun 2026 10:09 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगराओं। सोमवार को जगरांव में वह परिवार सड़क पर उतर आए जिन्होंने नशे की ओवरडोज के कारण अपने बेटे, पति और भाइयों को खो दिया है। पेंडू मजदूर यूनियन की अगुवाई में पीड़ित परिवारों ने रोष मार्च निकालकर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया तथा नशे से हुई मौतों की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की मांग उठाई। बस स्टैंड परिसर में एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों के हाथों में अपने दिवंगत परिजनों की तस्वीरें थीं और आंखों में इंसाफ की उम्मीद। परिवारों ने आरोप लगाया कि नशे की ओवरडोज से होने वाली कई मौतों को पुलिस हार्ट अटैक बताकर मामले को दबा देती है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि नशा तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय कई बार नशे के शिकार युवाओं पर ही मामले दर्ज कर दिए जाते हैं। यूनियन नेताओं ने कहा कि इस रवैये से नशा तस्करी के नेटवर्क को संरक्षण मिलने का संदेह पैदा होता है।
बस स्टैंड पर छलका परिवारों का दर्द
जगरांव बस स्टैंड का माहौल उस समय बेहद भावुक हो गया जब करीब 14 प्रभावित परिवार अपने प्रियजनों की तस्वीरें लेकर वहां पहुंचे। हर तस्वीर एक उजड़े हुए घर की कहानी कह रही थी।
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रानी वाला खूह इलाके की एक मासूम बच्ची अपने दिवंगत पिता की तस्वीर सीने से लगाए लगातार रोती रही। उसके चेहरे पर भविष्य की चिंता साफ झलक रही थी।
मृतक शरणजीत सिंह की पत्नी ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। पति चिट्टे की लत का शिकार हो गया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा, जहां उसकी मौत हो गई। अब परिवार का गुजर-बसर बुजुर्ग ससुर की दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है।
वहीं गुरमीत सिंह ने बताया कि उनके दोनों बेटे नशे की चपेट में आकर दम तोड़ चुके हैं। अब वह अकेलेपन और आर्थिक तंगी के बीच गुरुद्वारे के लंगर के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
माई जीना क्षेत्र की मनजीत कौर ने आरोप लगाया कि उनके इलाके में लंबे समय से खुलेआम नशा बिकता रहा, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि विरोध करने पर उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश भी की गई।
15 मौतों का हवाला, 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने हाल के समय में नशे के कारण हुई करीब 15 मौतों का हवाला देते हुए प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। साथ ही मृतकों के आश्रितों के लिए रोजगार, बच्चों की मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति, विधवा पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू करने की मांग उठाई गई।
यूनियन नेताओं ने कहा कि नशा प्रभावित इलाकों में तैनात अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और नशा तस्करी के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने तथा वहां बेहतर इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की।
ये हैं प्रमुख मांगें
नशा तस्करों के साथ कथित मिलीभगत रखने वाले राजनीतिक नेताओं और पुलिस अधिकारियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।
जिन इलाकों में नशा बिक रहा है, वहां के संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
नशा प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को भी जवाबदेह बनाया जाए।
नशे से मरने वाले युवाओं के परिवारों को कम से कम 10 लाख रुपये मुआवजा और रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
मृतकों की पत्नियों और बच्चों को मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति, विधवा पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाए।
सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर उनमें बेहतर उपचार और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए।
नशा छोड़ चुके युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं और पीड़ित परिवारों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
जगराओं। सोमवार को जगरांव में वह परिवार सड़क पर उतर आए जिन्होंने नशे की ओवरडोज के कारण अपने बेटे, पति और भाइयों को खो दिया है। पेंडू मजदूर यूनियन की अगुवाई में पीड़ित परिवारों ने रोष मार्च निकालकर सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया तथा नशे से हुई मौतों की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की मांग उठाई। बस स्टैंड परिसर में एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों के हाथों में अपने दिवंगत परिजनों की तस्वीरें थीं और आंखों में इंसाफ की उम्मीद। परिवारों ने आरोप लगाया कि नशे की ओवरडोज से होने वाली कई मौतों को पुलिस हार्ट अटैक बताकर मामले को दबा देती है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि नशा तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय कई बार नशे के शिकार युवाओं पर ही मामले दर्ज कर दिए जाते हैं। यूनियन नेताओं ने कहा कि इस रवैये से नशा तस्करी के नेटवर्क को संरक्षण मिलने का संदेह पैदा होता है।
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बस स्टैंड पर छलका परिवारों का दर्द
जगरांव बस स्टैंड का माहौल उस समय बेहद भावुक हो गया जब करीब 14 प्रभावित परिवार अपने प्रियजनों की तस्वीरें लेकर वहां पहुंचे। हर तस्वीर एक उजड़े हुए घर की कहानी कह रही थी।
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मृतक शरणजीत सिंह की पत्नी ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। पति चिट्टे की लत का शिकार हो गया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा, जहां उसकी मौत हो गई। अब परिवार का गुजर-बसर बुजुर्ग ससुर की दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर है।
वहीं गुरमीत सिंह ने बताया कि उनके दोनों बेटे नशे की चपेट में आकर दम तोड़ चुके हैं। अब वह अकेलेपन और आर्थिक तंगी के बीच गुरुद्वारे के लंगर के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
माई जीना क्षेत्र की मनजीत कौर ने आरोप लगाया कि उनके इलाके में लंबे समय से खुलेआम नशा बिकता रहा, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि विरोध करने पर उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश भी की गई।
15 मौतों का हवाला, 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग
प्रदर्शनकारियों ने हाल के समय में नशे के कारण हुई करीब 15 मौतों का हवाला देते हुए प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। साथ ही मृतकों के आश्रितों के लिए रोजगार, बच्चों की मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति, विधवा पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू करने की मांग उठाई गई।
यूनियन नेताओं ने कहा कि नशा प्रभावित इलाकों में तैनात अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और नशा तस्करी के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने तथा वहां बेहतर इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की।
ये हैं प्रमुख मांगें
नशा तस्करों के साथ कथित मिलीभगत रखने वाले राजनीतिक नेताओं और पुलिस अधिकारियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।
जिन इलाकों में नशा बिक रहा है, वहां के संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
नशा प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को भी जवाबदेह बनाया जाए।
नशे से मरने वाले युवाओं के परिवारों को कम से कम 10 लाख रुपये मुआवजा और रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
मृतकों की पत्नियों और बच्चों को मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति, विधवा पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाए।
सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर उनमें बेहतर उपचार और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए।
नशा छोड़ चुके युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं और पीड़ित परिवारों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।