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बिक्रम सिंह मजीठिया को राहत: कोर्ट ने बढ़ाई अग्रिम जमानत की अवधि, क्या बोले वकील?
Mon, 22 Jun 2026 07:46 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Mon, 22 Jun 2026 07:46 PM IST
सार
वकील ने आरोप लगाया कि जब मजीठिया जांच के लिए थाना मजीठा पहुंचे तो उनके साथ गए अधिवक्ताओं को करीब साढ़े तीन घंटे तक थाने के बाहर इंतजार करवाया गया।
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बिक्रम सिंह मजीठिया, अकाली दल के वरिष्ठ नेता
- फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को एफआईआर नंबर 91 मामले में कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अमृतसर की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई तक स्थगित कर दी है। इस दौरान कोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से सुनवाई करेगी।
सुनवाई के बाद मजीठिया के वकील प्रदीप सैनी ने बताया कि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बिक्रम मजीठिया 20 जून को थाना मजीठा में जांच में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अदालत में पेश स्टेटस रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि मजीठिया ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। इसी के चलते कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई निर्धारित की है।
वकील ने आरोप लगाया कि जब मजीठिया जांच के लिए थाना मजीठा पहुंचे तो उनके साथ गए अधिवक्ताओं को करीब साढ़े तीन घंटे तक थाने के बाहर इंतजार करवाया गया। इसके बाद भी पूछताछ के दौरान उन्हें अपने मुवक्किल के साथ रहने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देने के बावजूद पुलिस ने वकीलों को अंदर नहीं जाने दिया।
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प्रदीप सैनी ने घोषणा की कि इस मामले में एसआईटी के सदस्यों और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) दायर की जाएगी। वहीं, अधिवक्ता बिक्रमजीत सिंह बाठ ने कहा कि अदालत द्वारा अग्रिम जमानत बढ़ाई जाना मजीठिया के लिए बड़ी राहत है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
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सुनवाई के बाद मजीठिया के वकील प्रदीप सैनी ने बताया कि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बिक्रम मजीठिया 20 जून को थाना मजीठा में जांच में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अदालत में पेश स्टेटस रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि मजीठिया ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। इसी के चलते कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई निर्धारित की है।
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वकील ने आरोप लगाया कि जब मजीठिया जांच के लिए थाना मजीठा पहुंचे तो उनके साथ गए अधिवक्ताओं को करीब साढ़े तीन घंटे तक थाने के बाहर इंतजार करवाया गया। इसके बाद भी पूछताछ के दौरान उन्हें अपने मुवक्किल के साथ रहने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देने के बावजूद पुलिस ने वकीलों को अंदर नहीं जाने दिया।
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प्रदीप सैनी ने घोषणा की कि इस मामले में एसआईटी के सदस्यों और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) दायर की जाएगी। वहीं, अधिवक्ता बिक्रमजीत सिंह बाठ ने कहा कि अदालत द्वारा अग्रिम जमानत बढ़ाई जाना मजीठिया के लिए बड़ी राहत है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।