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Ludhiana: सिफेट के वरिष्ठ वैज्ञानिक पर एफआईआर, संस्थान की ही महिला वैज्ञानिक से छेड़छाड़ और पीछा करने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)
Published by: Nivedita
Updated Thu, 25 Jun 2026 10:02 AM IST
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सार
महिला वैज्ञानिक ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उनकी निजी तस्वीरें, चैट और अन्य व्यक्तिगत जानकारी बिना अनुमति विभिन्न लोगों और संस्थान से जुड़े कुछ वेंडरों तक को साझा की। इससे उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिफेट) में के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने, मानहानि करने और मॉर्फ्ड तस्वीरें वायरल करने की धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। केस सिफेट में कार्यरत एक वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक की शिकायत पर दर्ज किया गया है।
पुलिस ने जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपी ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (एआईसीआरपी) में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर तैनात हैं। शिकायतकर्ता भी सिफेट के फूड ग्रेन्स एंड ऑयलसीड्स प्रोसेसिंग डिवीजन में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं।
महिला वैज्ञानिक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह आरोपी को केवल पेशेवर तौर पर जानती थीं और उनके बीच कभी कोई निजी संबंध नहीं रहा। शिकायत के अनुसार हाल ही में लुधियाना में दोबारा तैनाती के बाद आरोपी का व्यवहार उनके प्रति अनुचित हो गया, जिसके चलते उन्होंने उससे दूरी बना ली।
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इसके बाद आरोपी ने वॉट्सऐप के जरिए लगातार अनचाहे संदेश भेजने शुरू कर दिए। इन संदेशों में अभद्र भाषा, अपमानजनक टिप्पणियां और धमकी भरी बातें शामिल थीं। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी ने दावा किया कि उसके पास उनकी एडिट और मॉर्फ्ड तस्वीरें मौजूद हैं, जिन्हें वह सार्वजनिक कर उनकी सामाजिक छवि, वैवाहिक जीवन और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है।
महिला वैज्ञानिक ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उनकी निजी तस्वीरें, चैट और अन्य व्यक्तिगत जानकारी बिना अनुमति विभिन्न लोगों और संस्थान से जुड़े कुछ वेंडरों तक को साझा की। इससे उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने वीडियो कॉल की स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ली थी और बाद में उसी के आधार पर धमकी भरे संदेश भेजे। आरोप है कि रिकॉर्डिंग और चैट के स्क्रीनशॉट अन्य सहकर्मियों तक भी पहुंचाए गए।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मामले की सुनवाई संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के समक्ष भी लंबित है। यह समिति कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम-2013 के तहत गठित की गई है। समिति ने आरोपी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की विस्तृत जांच की गई। जांच के उपरांत 22 जून को पीएयू थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों एक ही संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। जांच के दौरान आरोपी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दोनों के बीच पहले से मित्रतापूर्ण संबंध थे और वे आपस में बातचीत व चैट किया करते थे।
फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपी ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (एआईसीआरपी) में वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद पर तैनात हैं। शिकायतकर्ता भी सिफेट के फूड ग्रेन्स एंड ऑयलसीड्स प्रोसेसिंग डिवीजन में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं।
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महिला वैज्ञानिक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह आरोपी को केवल पेशेवर तौर पर जानती थीं और उनके बीच कभी कोई निजी संबंध नहीं रहा। शिकायत के अनुसार हाल ही में लुधियाना में दोबारा तैनाती के बाद आरोपी का व्यवहार उनके प्रति अनुचित हो गया, जिसके चलते उन्होंने उससे दूरी बना ली।
इसके बाद आरोपी ने वॉट्सऐप के जरिए लगातार अनचाहे संदेश भेजने शुरू कर दिए। इन संदेशों में अभद्र भाषा, अपमानजनक टिप्पणियां और धमकी भरी बातें शामिल थीं। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी ने दावा किया कि उसके पास उनकी एडिट और मॉर्फ्ड तस्वीरें मौजूद हैं, जिन्हें वह सार्वजनिक कर उनकी सामाजिक छवि, वैवाहिक जीवन और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है।
महिला वैज्ञानिक ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उनकी निजी तस्वीरें, चैट और अन्य व्यक्तिगत जानकारी बिना अनुमति विभिन्न लोगों और संस्थान से जुड़े कुछ वेंडरों तक को साझा की। इससे उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने वीडियो कॉल की स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ली थी और बाद में उसी के आधार पर धमकी भरे संदेश भेजे। आरोप है कि रिकॉर्डिंग और चैट के स्क्रीनशॉट अन्य सहकर्मियों तक भी पहुंचाए गए।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मामले की सुनवाई संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के समक्ष भी लंबित है। यह समिति कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निवारण) अधिनियम-2013 के तहत गठित की गई है। समिति ने आरोपी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मामले की विस्तृत जांच की गई। जांच के उपरांत 22 जून को पीएयू थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों एक ही संस्थान में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। जांच के दौरान आरोपी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि दोनों के बीच पहले से मित्रतापूर्ण संबंध थे और वे आपस में बातचीत व चैट किया करते थे।
फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।