वृंदावन नाव हादसा: हादसे में बची रेखा जैन गंभीर हालत में पीजीआई में भर्ती, बेटे का आरोप-कोई मदद नहीं मिल रही
रेखा जैन अपने बेटे श्वेत जैन के साथ वृंदावन में दर्शन करने गई थीं और उसी नाव में सवार थीं, जो यमुना में डूब गई थी। हादसे के बाद से ही उनका इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार न होने के कारण प्रशासनिक निर्देशों पर उन्हें एंबुलेंस के जरिए चंडीगढ़ भेजा गया।
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वृंदावन में हुए नाव हादसे में बची जगरांव के शास्त्री नगर की रहने वाली रेखा जैन की हालत बेहद गंभीर है। हादसे के दिन से ही वह वृंदावन के रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती थीं, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर अब उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।
रेखा जैन अपने बेटे श्वेत जैन के साथ वृंदावन में दर्शन करने गई थीं और उसी नाव में सवार थीं, जो यमुना में डूब गई थी। हादसे के बाद से ही उनका इलाज चल रहा था, लेकिन हालत में सुधार न होने के कारण प्रशासनिक निर्देशों पर उन्हें एंबुलेंस के जरिए चंडीगढ़ भेजा गया।
पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। रेखा जैन के बेटे श्वेत जैन ने एक वीडियो जारी करते हुए बताया कि उनकी मां को सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही थी और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर ही चंडीगढ़ लाया गया था।
श्वेत के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी मां को एक सामान्य वार्ड में लिटा दिया गया, जहां पहले से ही करीब 100 मरीज मौजूद थे। समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण उनकी तबीयत और बिगड़ती चली गई।
वीडियो में रोते हुए श्वेत जैन ने कहा कि प्रशासन और सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही। उसने कहा कि जगरांव की एसडीएम उसका फोन तक नहीं उठा रही और उसे समझ नहीं आ रहा कि वह अकेला क्या करे।
जगरांव के सोनू मल्होत्रा, जिनके मोबाइल शोरूम पर श्वेत जैन काम करता है, ने बताया कि रेखा जैन की हालत बेहद गंभीर है, लेकिन उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल पा रहा। परिवार मजबूरी में अब निजी अस्पताल का सहारा लेने की कोशिश कर रहा है।
मामले ने सरकार द्वारा घायलों को मुफ्त और बेहतर इलाज देने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार सभी घायलों को हर संभव इलाज देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है।
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