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Mohali News: 15 साल बाद भी प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं की, बिल्डर को उपभोक्ता आयोग की फटकार
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मोहाली। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग एसएएस नगर (मोहाली) ने प्लॉट खरीदार को 15 वर्षों तक रजिस्ट्री और कब्जा न देने पर बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को दो माह के भीतर प्लॉट की रजिस्ट्री कर कब्जा सौंपने के आदेश दिए हैं। तय समय में आदेश का पालन न होने पर कंपनी को खरीदार से वसूली गई 25.76 लाख रुपये की राशि ब्याज सहित लौटानी होगी। साथ ही मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 2.50 लाख रुपये मुआवजा भी देना होगा। मामला एक प्लॉट खरीदार के दायर उपभोक्ता शिकायत से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उसने 25 अप्रैल 2011 को बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ 138.89 वर्ग गज के प्लॉट की खरीद के लिए एग्रीमेंट किया था। प्लॉट की कीमत 17,900 रुपये प्रति वर्ग गज तय की गई थी और कुल कीमत करीब 24.88 लाख रुपये बनी थी। शिकायतकर्ता ने जनवरी 2011 से दिसंबर 2013 के बीच कंपनी को कुल 25,76,523 रुपये का भुगतान किया, जिसमें ईडीसी शुल्क भी शामिल था। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि अंतिम भुगतान 28 दिसंबर 2012 को किया था। कंपनी ने भरोसा दिया कि 10 दिन के भीतर रजिस्ट्री पूरी कर दी जाएगी, लेकिन वर्षों तक मामला लंबित रखा गया।
बाद में 12 मार्च 2019 को कंपनी ने पुराने प्लॉट के बदले गोल्ड सिटी, सेक्टर-123, सन्नी एनक्लेव, खरड़ में 141 वर्ग गज का नया प्लॉट नंबर-1861 आवंटित कर दिया, मगर उसकी भी रजिस्ट्री नहीं करवाई गई। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष एग्रीमेंट, रसीदें और भुगतान संबंधी दस्तावेज पेश किए। कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि वह रजिस्ट्री कराने के लिए तैयार थी या शिकायतकर्ता ने रजिस्ट्री में रुचि नहीं दिखाई। आयोग के चेयरमैन एसके अग्रवाल, सदस्य परमजीत कौर और लेफ्टिनेंट कर्नल जसबीर सिंह बाठ ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर की लगातार देरी सेवा में गंभीर कमी है। आयोग ने कंपनी को दो महीने में प्लॉट नंबर-1861 की रजिस्ट्री कर कब्जा सौंपने, सभी जरूरी मंजूरियां देने और पूर्णता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार उसने 25 अप्रैल 2011 को बाजवा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ 138.89 वर्ग गज के प्लॉट की खरीद के लिए एग्रीमेंट किया था। प्लॉट की कीमत 17,900 रुपये प्रति वर्ग गज तय की गई थी और कुल कीमत करीब 24.88 लाख रुपये बनी थी। शिकायतकर्ता ने जनवरी 2011 से दिसंबर 2013 के बीच कंपनी को कुल 25,76,523 रुपये का भुगतान किया, जिसमें ईडीसी शुल्क भी शामिल था। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि अंतिम भुगतान 28 दिसंबर 2012 को किया था। कंपनी ने भरोसा दिया कि 10 दिन के भीतर रजिस्ट्री पूरी कर दी जाएगी, लेकिन वर्षों तक मामला लंबित रखा गया।
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बाद में 12 मार्च 2019 को कंपनी ने पुराने प्लॉट के बदले गोल्ड सिटी, सेक्टर-123, सन्नी एनक्लेव, खरड़ में 141 वर्ग गज का नया प्लॉट नंबर-1861 आवंटित कर दिया, मगर उसकी भी रजिस्ट्री नहीं करवाई गई। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष एग्रीमेंट, रसीदें और भुगतान संबंधी दस्तावेज पेश किए। कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि वह रजिस्ट्री कराने के लिए तैयार थी या शिकायतकर्ता ने रजिस्ट्री में रुचि नहीं दिखाई। आयोग के चेयरमैन एसके अग्रवाल, सदस्य परमजीत कौर और लेफ्टिनेंट कर्नल जसबीर सिंह बाठ ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डर की लगातार देरी सेवा में गंभीर कमी है। आयोग ने कंपनी को दो महीने में प्लॉट नंबर-1861 की रजिस्ट्री कर कब्जा सौंपने, सभी जरूरी मंजूरियां देने और पूर्णता प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।