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Mohali News: विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी.. एजेंट को तीन साल की सजा, 1.02 लाख रुपये जुर्माना
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मोहाली। विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी करने के मामले में स्थानीय अदालत ने एक इमिग्रेशन एजेंट को दोषी ठहराया है। तीन साल की सजा के साथ-साथ दोषी पर 1.02 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। यह मामला 18 जनवरी 2024 को मटौर पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। मामला 19 लाख रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चंडीगढ़ के सेक्टर-48 की रहने वाली छवि शर्मा को आईपीसी की धारा 420 और इमिग्रेशन एक्ट की धारा 24 के तहत दोषी ठहराया है।
अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपी को धारा 420 के तहत तीन साल की कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। साथ ही इमिग्रेशन एक्ट के तहत एक साल की कैद और 2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दी जाए।
मामला यह है कि शिकायतकर्ता अपनी बेटी के लिए ऑस्ट्रेलिया का स्टडी वीजा दिलाने के लिए मोहाली के सेक्टर-70 में स्थित स्टार फ्यूचर एजुकेशन एंड इमिग्रेशन सर्विसेज के पास गया था। आरोपी ने 90 दिन के भीतर वीजा दिलाने का वादा किया और कई किस्तों में लगभग 19 लाख रुपये जमा कर लिए। इसके बाद न तो तय समय सीमा के भीतर वीजा की प्रक्रिया पूरी हुई और न ही पैसे वापस किए गए। एक साल से ज्यादा इंतजार करने के बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि आरोपी द्वारा दिया गया यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर नकली था, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
मुकदमे के दौरान, अदालत ने पाया कि बैंक रिकॉर्ड और गवाहों की गवाही के जरिए वित्तीय लेन-देन और धोखाधड़ी के तत्व स्पष्ट रूप से साबित हो गए थे। हालांकि, अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता संबंधित यूनिवर्सिटी से ऑफर लेटर की प्रामाणिकता की पुष्टि करने में विफल रहा। सबूतों का मूल्यांकन करने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने आरोपी को जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन उसे धोखाधड़ी करने और इमिग्रेशन एक्ट के तहत बिना उचित अनुमति के काम करने का दोषी ठहराया।
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अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपी को धारा 420 के तहत तीन साल की कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। साथ ही इमिग्रेशन एक्ट के तहत एक साल की कैद और 2 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दी जाए।
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मामला यह है कि शिकायतकर्ता अपनी बेटी के लिए ऑस्ट्रेलिया का स्टडी वीजा दिलाने के लिए मोहाली के सेक्टर-70 में स्थित स्टार फ्यूचर एजुकेशन एंड इमिग्रेशन सर्विसेज के पास गया था। आरोपी ने 90 दिन के भीतर वीजा दिलाने का वादा किया और कई किस्तों में लगभग 19 लाख रुपये जमा कर लिए। इसके बाद न तो तय समय सीमा के भीतर वीजा की प्रक्रिया पूरी हुई और न ही पैसे वापस किए गए। एक साल से ज्यादा इंतजार करने के बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि आरोपी द्वारा दिया गया यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर नकली था, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
मुकदमे के दौरान, अदालत ने पाया कि बैंक रिकॉर्ड और गवाहों की गवाही के जरिए वित्तीय लेन-देन और धोखाधड़ी के तत्व स्पष्ट रूप से साबित हो गए थे। हालांकि, अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता संबंधित यूनिवर्सिटी से ऑफर लेटर की प्रामाणिकता की पुष्टि करने में विफल रहा। सबूतों का मूल्यांकन करने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने आरोपी को जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन उसे धोखाधड़ी करने और इमिग्रेशन एक्ट के तहत बिना उचित अनुमति के काम करने का दोषी ठहराया।

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