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Mohali News: मोहाली से खरड़ तक सड़कें बनीं तालाब, बारिश ने खोली ड्रेनेज सिस्टम की पोल
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मोहाली। शुक्रवार को हुई बारिश ने मोहाली, खरड़ और आसपास के इलाकों में ड्रेनेज सिस्टम की तैयारियों की पोल खोल दी। शहर के कई पॉश सेक्टर, नई कॉलोनियां, एयरपोर्ट रोड और इंडस्ट्रियल एरिया घंटों तक पानी में डूबे रहे। कई जगह सड़कें तालाब में बदल गईं, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। टूटी और अधूरी सड़कों पर फिसलन के कारण लोगों को चोटें भी लगीं। वाहन चालकों को लंबा जाम झेलना पड़ा और कई छोटे वाहन पानी में फंस गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बरसात में यही हाल होता है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकाला गया।
टीडीआई सिटी और एयरपोर्ट रोड पर जलभराव
एयरपोर्ट रोड स्थित टीडीआई सिटी सेक्टर-117 और सेक्टर-118 में सबसे ज्यादा परेशानी देखने को मिली। स्थानीय निवासी गुरदयाल सिंह ने बताया कि टीडीआई की ओर से पहले से खोदे गए एक गड्ढे में बारिश का पानी भर गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद मौके पर कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा। एयरपोर्ट रोड से नगर निगम की हद में शामिल गांव बल्लोमाजरा जाने वाली सड़क भी पूरी तरह जलमग्न रही, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। एयरोसिटी की कई सड़कें भी पानी में डूबी नजर आईं। जुबली पार्क लेन प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के कारण ऐतिहासिक गांव दाऊं जाने वाले रास्ते पर पानी भर गया। इंडस्ट्रियल एरिया और शहर के कई पार्क भी बारिश के बाद तालाब जैसे दिखाई दिए। पीटीएल लाइट प्वाइंट के पास टूटी सड़क पर पानी भरने से कई वाहन बीच रास्ते में फंस गए।
शिवालिक सिटी और खरड़ में पुराना संकट
खरड़-लांडरां रोड स्थित शिवालिक सिटी में एक बार फिर मुख्य गेट के बाहर भारी जलभराव हुआ। पानी कई घरों तक पहुंच गया और लोगों को आने-जाने में दिक्कत हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से हर बारिश में मुख्य गेट पर यही स्थिति बनती है और कई दिनों तक पानी नहीं निकलता। इसी तरह खरड़ फ्लाईओवर के नीचे निज्जर चौक के पास भी सड़क पानी में डूबी रही। सेक्टर-70 और 71 में नगर निगम द्वारा खोदी गई तथा शहर के विभिन्न इलाकों में प्राइवेट बिल्डर की टूटी सड़कों पर पानी भरने से फिसलन बढ़ गई। कई लोग गिरकर चोटिल हुए।
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नई कॉलोनियों में ड्रेनेज की कमी
सेक्टर-125, न्यू सनी एनक्लेव, गुलमोहर कॉम्प्लेक्स, मुंडी खरड़ और देसूमाजरा में भी पानी निकासी नहीं होने से सड़कों और गलियों में लंबे समय तक जलभराव बना रहा। शहर से सटी नई कॉलोनियों और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में भी बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नई कॉलोनियों में विकास कार्यों के साथ मजबूत ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करना जरूरी है, अन्यथा हर बारिश में हालात इसी तरह बिगड़ते रहेंगे। लोगों ने मांग की कि हर साल अस्थायी इंतजाम करने की बजाय ड्रेनेज सिस्टम को स्थायी रूप से मजबूत किया जाए।
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टीडीआई सिटी और एयरपोर्ट रोड पर जलभराव
एयरपोर्ट रोड स्थित टीडीआई सिटी सेक्टर-117 और सेक्टर-118 में सबसे ज्यादा परेशानी देखने को मिली। स्थानीय निवासी गुरदयाल सिंह ने बताया कि टीडीआई की ओर से पहले से खोदे गए एक गड्ढे में बारिश का पानी भर गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद मौके पर कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा। एयरपोर्ट रोड से नगर निगम की हद में शामिल गांव बल्लोमाजरा जाने वाली सड़क भी पूरी तरह जलमग्न रही, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। एयरोसिटी की कई सड़कें भी पानी में डूबी नजर आईं। जुबली पार्क लेन प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के कारण ऐतिहासिक गांव दाऊं जाने वाले रास्ते पर पानी भर गया। इंडस्ट्रियल एरिया और शहर के कई पार्क भी बारिश के बाद तालाब जैसे दिखाई दिए। पीटीएल लाइट प्वाइंट के पास टूटी सड़क पर पानी भरने से कई वाहन बीच रास्ते में फंस गए।
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शिवालिक सिटी और खरड़ में पुराना संकट
खरड़-लांडरां रोड स्थित शिवालिक सिटी में एक बार फिर मुख्य गेट के बाहर भारी जलभराव हुआ। पानी कई घरों तक पहुंच गया और लोगों को आने-जाने में दिक्कत हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से हर बारिश में मुख्य गेट पर यही स्थिति बनती है और कई दिनों तक पानी नहीं निकलता। इसी तरह खरड़ फ्लाईओवर के नीचे निज्जर चौक के पास भी सड़क पानी में डूबी रही। सेक्टर-70 और 71 में नगर निगम द्वारा खोदी गई तथा शहर के विभिन्न इलाकों में प्राइवेट बिल्डर की टूटी सड़कों पर पानी भरने से फिसलन बढ़ गई। कई लोग गिरकर चोटिल हुए।
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नई कॉलोनियों में ड्रेनेज की कमी
सेक्टर-125, न्यू सनी एनक्लेव, गुलमोहर कॉम्प्लेक्स, मुंडी खरड़ और देसूमाजरा में भी पानी निकासी नहीं होने से सड़कों और गलियों में लंबे समय तक जलभराव बना रहा। शहर से सटी नई कॉलोनियों और तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में भी बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नई कॉलोनियों में विकास कार्यों के साथ मजबूत ड्रेनेज नेटवर्क तैयार करना जरूरी है, अन्यथा हर बारिश में हालात इसी तरह बिगड़ते रहेंगे। लोगों ने मांग की कि हर साल अस्थायी इंतजाम करने की बजाय ड्रेनेज सिस्टम को स्थायी रूप से मजबूत किया जाए।