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Mohali News: जीरकपुर के वार्ड-27 में सीवर व्यवस्था चरमराई, सड़क पर फैली गंदगी
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जीरकपुर। वार्ड नंबर-27 में सीवर व्यवस्था पूरी तरह चरमराने से इलाके के लोग कठिन हालात का सामना कर रहे हैं। समाजसेवी योगेश अरोड़ा और स्थानीय निवासी गौरव, राहुल, निखिल, वीपी सिंह, संजीव, अनवर अहमद ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
उनका कहना है कि सीवर ओवरफ्लो और टूटी पाइपों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। विशेषकर शिवालिक विहार में सैनी डेयरी के सामने बरसाती पाइपें हमेशा जाम रहती हैं और गंदा पानी सड़कों पर फैलता है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि पहले से ही डायरिया जैसी बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं और बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं के लिए संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय निवासी संजीव, राहुल, निखिल और गौरव ने बताया कि वे इस समस्या की शिकायत कई बार संबंधित विभाग को दे चुके हैं। हर बार अधिकारी अस्थायी मरम्मत कर चले जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर जस के तस हो जाते हैं। योगेश अरोड़ा ने प्रशासन से सीवर लाइनों की नियमित सफाई, टूटी पाइपों का बदलाव और जाम बरसाती पाइपों की तुरंत मरम्मत करने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। जीरकपुर की आबादी अब लगभग 6 लाख के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन इसके मुकाबले शहर की सीवरेज व्यवस्था बेहद कमजोर साबित हो रही है। पूरे शहर के लिए केवल 17.3 एमएलडी क्षमता का एक ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी आबादी के लिए यह क्षमता नाकाफी है, जिसके चलते शहर के अलग-अलग हिस्सों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या आम हो गई है।
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उनका कहना है कि सीवर ओवरफ्लो और टूटी पाइपों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। विशेषकर शिवालिक विहार में सैनी डेयरी के सामने बरसाती पाइपें हमेशा जाम रहती हैं और गंदा पानी सड़कों पर फैलता है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि पहले से ही डायरिया जैसी बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं और बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं के लिए संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
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स्थानीय निवासी संजीव, राहुल, निखिल और गौरव ने बताया कि वे इस समस्या की शिकायत कई बार संबंधित विभाग को दे चुके हैं। हर बार अधिकारी अस्थायी मरम्मत कर चले जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर जस के तस हो जाते हैं। योगेश अरोड़ा ने प्रशासन से सीवर लाइनों की नियमित सफाई, टूटी पाइपों का बदलाव और जाम बरसाती पाइपों की तुरंत मरम्मत करने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। जीरकपुर की आबादी अब लगभग 6 लाख के करीब पहुंच चुकी है, लेकिन इसके मुकाबले शहर की सीवरेज व्यवस्था बेहद कमजोर साबित हो रही है। पूरे शहर के लिए केवल 17.3 एमएलडी क्षमता का एक ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी आबादी के लिए यह क्षमता नाकाफी है, जिसके चलते शहर के अलग-अलग हिस्सों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या आम हो गई है।