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3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण: ट्राइसिटी में सिर्फ 25 मिनट दिखेगा असर, सिंह राशि वालों के लिए कष्टकारी
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मोहाली/चंडीगढ़। वर्ष 2026 का पहला खग्रास चंद्रग्रहण 3 मार्च मंगलवार को लगेगा। यह खग्रास ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण होगा, जिसका स्पष्ट दर्शन देश के सुदूर पूर्वी राज्यों में संभव होगा। उत्तर भारत, खासकर ट्राइसिटी क्षेत्र में ग्रहण का प्रभाव केवल ग्रहण समाप्ति के समय ही दिखाई देगा और वह भी बेहद संक्षिप्त अवधि के लिए।
फेज-1 के प्राचीन श्री शिव मंदिर के मुख्य पुजारी पंंडित सुन्दरलाल बिजल्वाण ने कहा कि खगोलीय गणना के मुताबिक ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे होगा और मोक्ष शाम 6:47 बजे होगा। चंडीगढ़-मोहाली क्षेत्र में चंद्र उदय शाम 6:22 बजे होगा। ऐसे में यहां ग्रहण का दृश्य प्रभाव केवल 25 मिनट तक ही रहेगा।
ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से नौ घंटे पूर्व, यानी 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे से शुरू हो जाएगा। सूतक लगते ही सुबह 6:20 बजे से शाम लगभग 7:00 बजे तक मंदिरों के कपाट और पर्दे बंद रहेंगे। इस दौरान नियमित पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी।
क्या करें और क्या न करें
बिजल्वाण ने कहा कि ग्रहण काल में जप, पाठ, मंत्र जाप और दान विशेष फलदायी होते हैं। हालांकि सूतक और ग्रहण के दौरान भोजन, निद्रा, मूर्ति स्पर्श, तेल लगाना और अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। बालक, वृद्ध, रोगी और गर्भवती महिलाओं को भोजन या दवाई लेने में कोई दोष नहीं माना गया है। सूतक से पहले दूध, दही, अचार जैसे तरल पदार्थों में कुशा या तुलसी पत्र डालना शुभ माना गया है। अपनी राशि के अनुसार दान का संकल्प 3 मार्च को सूर्यास्त से पहले लें और ग्रहण मोक्ष के बाद या अगले दिन सूर्योदय पर दान करें।
राशियों पर प्रभाव
यह चंद्रग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सिंह राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण कष्टकारी हो सकता है। उन्हें चंद्रमा और सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान एवं जप-पाठ करने की सलाह दी गई है।
अन्य राशियों पर प्रभाव इस प्रकार रहेगा—
मेष: अधिक भागदौड़ और खर्च
वृष: कार्य सिद्धि, धन लाभ
मिथुन: प्रगति और उत्साह में वृद्धि
कर्क: धन हानि व यात्रा
कन्या: आर्थिक परेशानी
तुला: धन प्राप्ति व सुख लाभ
वृश्चिक: रोग और चिंता
धनु: संतान संबंधी चिंता
मकर: शत्रु भय व दुर्घटना आशंका
कुंभ: दांपत्य कष्ट
मीन: रोग और कार्य में विलंब
2 मार्च को होगा होलिका दहन
पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे शुरू होकर 3 मार्च को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार 2 मार्च (सोमवार) को प्रदोष काल में भद्रा के मुख काल को त्यागकर भद्रा की पूंछ के समय होलिका दहन करना शुभ रहेगा। शाम 6:22 बजे से रात 8:53 बजे के बीच दहन शास्त्र सम्मत होगा। 3 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा।
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फेज-1 के प्राचीन श्री शिव मंदिर के मुख्य पुजारी पंंडित सुन्दरलाल बिजल्वाण ने कहा कि खगोलीय गणना के मुताबिक ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे होगा और मोक्ष शाम 6:47 बजे होगा। चंडीगढ़-मोहाली क्षेत्र में चंद्र उदय शाम 6:22 बजे होगा। ऐसे में यहां ग्रहण का दृश्य प्रभाव केवल 25 मिनट तक ही रहेगा।
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ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से नौ घंटे पूर्व, यानी 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे से शुरू हो जाएगा। सूतक लगते ही सुबह 6:20 बजे से शाम लगभग 7:00 बजे तक मंदिरों के कपाट और पर्दे बंद रहेंगे। इस दौरान नियमित पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी।
क्या करें और क्या न करें
बिजल्वाण ने कहा कि ग्रहण काल में जप, पाठ, मंत्र जाप और दान विशेष फलदायी होते हैं। हालांकि सूतक और ग्रहण के दौरान भोजन, निद्रा, मूर्ति स्पर्श, तेल लगाना और अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। बालक, वृद्ध, रोगी और गर्भवती महिलाओं को भोजन या दवाई लेने में कोई दोष नहीं माना गया है। सूतक से पहले दूध, दही, अचार जैसे तरल पदार्थों में कुशा या तुलसी पत्र डालना शुभ माना गया है। अपनी राशि के अनुसार दान का संकल्प 3 मार्च को सूर्यास्त से पहले लें और ग्रहण मोक्ष के बाद या अगले दिन सूर्योदय पर दान करें।
राशियों पर प्रभाव
यह चंद्रग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सिंह राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण कष्टकारी हो सकता है। उन्हें चंद्रमा और सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान एवं जप-पाठ करने की सलाह दी गई है।
अन्य राशियों पर प्रभाव इस प्रकार रहेगा—
मेष: अधिक भागदौड़ और खर्च
वृष: कार्य सिद्धि, धन लाभ
मिथुन: प्रगति और उत्साह में वृद्धि
कर्क: धन हानि व यात्रा
कन्या: आर्थिक परेशानी
तुला: धन प्राप्ति व सुख लाभ
वृश्चिक: रोग और चिंता
धनु: संतान संबंधी चिंता
मकर: शत्रु भय व दुर्घटना आशंका
कुंभ: दांपत्य कष्ट
मीन: रोग और कार्य में विलंब
2 मार्च को होगा होलिका दहन
पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे शुरू होकर 3 मार्च को शाम 5:08 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार 2 मार्च (सोमवार) को प्रदोष काल में भद्रा के मुख काल को त्यागकर भद्रा की पूंछ के समय होलिका दहन करना शुभ रहेगा। शाम 6:22 बजे से रात 8:53 बजे के बीच दहन शास्त्र सम्मत होगा। 3 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा।