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Mohali News: 135 दिनों से डीपीआई कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे बेरोजगार शिक्षक, नहीं निकला कोई हल
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मोहाली। पंजाब सरकार की ईटीटी 5994 भर्ती प्रक्रिया पूरी न होने से गुस्साए बेरोजगार शिक्षकों के संघर्ष में अब 9 जनवरी का दिन बेहद निर्णायक होने वाला है। प्रशासन ने शिक्षकों के भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी कुमार अमित और शिक्षा सचिव आनंदिता मित्रा के साथ 9 जनवरी को एक उच्च स्तरीय बैठक तय करवाई है।
यूनियन प्रधान अशोक बावा ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि इस बैठक में भर्ती को लेकर कोई ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो बेरोजगार शिक्षक फेज-7 का रोड जाम कर देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की अनदेखी ने उन्हें तीखे आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है और अब वे पानी की टंकियों व टॉवरों पर चढ़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे। किसी भी जानी-माली नुकसान के लिए सीधे तौर पर शिक्षा विभाग और सरकार जिम्मेदार होगी।
डीपीआई कार्यालय के बाहर चल रहे धरने को बुधवार को 135 दिन पूरे हो गए हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह भर्ती मौजूदा सरकार की पहली कैबिनेट का पहला वादा थी, लेकिन 135 दिन बीत जाने के बाद भी फाइलें दफ्तरों में धूल फैंक रही हैं। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकार केवल आश्वासनों के सहारे समय काट रही है, जबकि धरातल पर नियुक्तियां अधूरी हैं।
प्रशासन के दखल के बाद टला प्रदर्शन
यूनियन ने बुधवार को एक विशाल रोष प्रदर्शन की तैयारी की थी, लेकिन मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से बैठक का लिखित आश्वासन देकर फिलहाल इसे टलवा दिया। अब सबकी नजरें 9 जनवरी को होने वाली मीटिंग पर टिकी हैं। इस धरने को विभिन्न शिक्षक संगठनों और अन्य सामाजिक जत्थेबंदियों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
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यूनियन प्रधान अशोक बावा ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि इस बैठक में भर्ती को लेकर कोई ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो बेरोजगार शिक्षक फेज-7 का रोड जाम कर देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की अनदेखी ने उन्हें तीखे आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है और अब वे पानी की टंकियों व टॉवरों पर चढ़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे। किसी भी जानी-माली नुकसान के लिए सीधे तौर पर शिक्षा विभाग और सरकार जिम्मेदार होगी।
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डीपीआई कार्यालय के बाहर चल रहे धरने को बुधवार को 135 दिन पूरे हो गए हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह भर्ती मौजूदा सरकार की पहली कैबिनेट का पहला वादा थी, लेकिन 135 दिन बीत जाने के बाद भी फाइलें दफ्तरों में धूल फैंक रही हैं। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकार केवल आश्वासनों के सहारे समय काट रही है, जबकि धरातल पर नियुक्तियां अधूरी हैं।
प्रशासन के दखल के बाद टला प्रदर्शन
यूनियन ने बुधवार को एक विशाल रोष प्रदर्शन की तैयारी की थी, लेकिन मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से बैठक का लिखित आश्वासन देकर फिलहाल इसे टलवा दिया। अब सबकी नजरें 9 जनवरी को होने वाली मीटिंग पर टिकी हैं। इस धरने को विभिन्न शिक्षक संगठनों और अन्य सामाजिक जत्थेबंदियों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।