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Punjab: किसान मजदूर मोर्चा ने मनाया शहीदी दिवस, दो साल पहले गोली लगने से मारे गए शुभकरण को दी श्रद्धांजलि

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 21 Feb 2026 04:02 PM IST
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सार

पंजाब में अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, होशियारपुर, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, मोगा, फिरोजपुर, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, संगरूर, पटियाला, फरीदकोट, मोहाली, नवांशहर और मालेरकोटला में आयोजन किए गए।

Kisan Mazdoor Morcha celebrate Martyrdom Day today tribute to Shubkaran
किसान आंदोलन - फोटो : संवाद/फाइल
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विस्तार

पंजाब के 18 जिलों में किसान मजदूर मोर्चा ने आज शहीदी दिवस मनाया। 21 फरवरी 2024 को खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले युवक शुभकरण सिंह को श्रद्धांजलि दी गई।  
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मोगा की दाना मंडी में बड़ी संख्या में किसानों और महिलाओं ने एकत्रित होकर शंभू बॉर्डर पर किसान आंदोलन-2 के दौरान पुलिस की गोली लगने से मारे गए नौजवान शुभकरण की पहली बरसी मनाई। 
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इस मौके पर किसानों ने पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान नेताओं ने बताया कि आज पूरे पंजाब में शुभकरण की बरसी श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि शंभू बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में शहीद हुए नौजवान को किसान कभी नहीं भूलेंगे। कार्यक्रम के बाद किसानों ने पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया और मोगा डीसी दफ्तर के बाहर पंजाब के मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने की चेतावनी दी। 

किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज बिल 2025 लाने की तैयारी में है। उनका आरोप है कि यदि बिजली संशोधन बिल लागू किया गया तो बिजली सब्सिडी समाप्त हो जाएगी, बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी होगी और प्री-पेड मीटर लगाए जाएंगे। ऐसे में उपभोक्ताओं को पहले मीटर में पैसे डालने होंगे, तभी बिजली मिलेगी। 

बीज बिल 2025 को लेकर नेताओं ने कहा कि इस कानून के तहत बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी व्यापारी ब्रांडेड बीजों के अलावा अन्य बीज नहीं बेच सकेगा। इससे धीरे-धीरे बड़े कॉर्पोरेट घरानों का खेती पर कब्जा बढ़ेगा और बीज किसानों की पहुंच से बाहर हो जाएंगे। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों की जगह चार लेबर कोड लागू किए हैं, जो मजदूर वर्ग के हित में नहीं हैं। 
उनका कहना है कि इससे बेरोजगारी बढ़ेगी और कर्मचारियों के यूनियन बनाने के अधिकार कमजोर होंगे। इसके अलावा मनरेगा कानून में बदलाव और अमेरिका के साथ संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को भी उन्होंने किसान और मजदूर विरोधी बताया। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकारों ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में पंजाब सरकार के मंत्रियों और विधायकों का कड़ा विरोध किया जाएगा।
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