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जासूसी केस में जसबीर को मिली नियमित जमानत: पाकिस्तान से गोपनीय जानकारी साझा करने के थे आरोप; क्या बोला कोर्ट?
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Tue, 28 Apr 2026 11:19 PM IST
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सार
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी करीब दस माह से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ आरोप मुख्य रूप से गुप्त सूचना और कथित स्वीकारोक्ति बयान पर आधारित हैं।
यूट्यूबर जसबीर को कोर्ट से मिली नियमित जमानत
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पंजाब- हरियाणा हाईकोर्ट ने ने जासूसी और संवेदनशील सूचनाएं साझा करने के आरोपी यूट्यूबर जसबीर सिंह को नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने देश की सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा की हो।
अदालत ने यह भी माना कि आरोपी करीब दस माह से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ आरोप मुख्य रूप से गुप्त सूचना और कथित स्वीकारोक्ति बयान पर आधारित हैं। जसबीर सिंह पर आरोप था कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में रहकर सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा कर रहा था। हालांकि जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से किसी प्रकार की चैट या संपर्क का ठोस प्रमाण नहीं मिला।
अदालत ने कहा कि जिन वीडियो के आधार पर मामला दर्ज किया गया वे भाखड़ा बांध और मोहाली हवाई अड्डे जैसे सार्वजनिक स्थानों से जुड़े हैं, जहां आम लोगों की पहुंच रहती है। ऐसे में इन्हें गोपनीय सूचना मानना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी पाया कि संबंधित धाराओं और कानूनी प्रक्रिया के पालन में कमी रही है, जिससे अभियोजन का पक्ष कमजोर हुआ है।
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अदालत ने यह भी माना कि आरोपी करीब दस माह से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और उसके खिलाफ आरोप मुख्य रूप से गुप्त सूचना और कथित स्वीकारोक्ति बयान पर आधारित हैं। जसबीर सिंह पर आरोप था कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में रहकर सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा कर रहा था। हालांकि जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन से किसी प्रकार की चैट या संपर्क का ठोस प्रमाण नहीं मिला।
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अदालत ने कहा कि जिन वीडियो के आधार पर मामला दर्ज किया गया वे भाखड़ा बांध और मोहाली हवाई अड्डे जैसे सार्वजनिक स्थानों से जुड़े हैं, जहां आम लोगों की पहुंच रहती है। ऐसे में इन्हें गोपनीय सूचना मानना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी पाया कि संबंधित धाराओं और कानूनी प्रक्रिया के पालन में कमी रही है, जिससे अभियोजन का पक्ष कमजोर हुआ है।

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