{"_id":"6a86c5c9fdd0c98c210201bf","slug":"ajmer-jail-drug-network-1283-calls-50-lakh-transaction-five-booked-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"अजमेर जेल में नशे का खेल: एक नंबर पर 1,283 कॉल, खातों में 50 लाख का लेन-देन; पांच पर केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अजमेर जेल में नशे का खेल: एक नंबर पर 1,283 कॉल, खातों में 50 लाख का लेन-देन; पांच पर केस
Thu, 20 Aug 2026 02:47 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Thu, 20 Aug 2026 02:47 PM IST
सार
Rajasthan News: अजमेर केंद्रीय कारागृह में नशे की गोलियों की कथित अवैध आपूर्ति और पैसों के लेन-देन का मामला सामने आया है। जांच में जेल एसटीडी से एक नंबर पर 1,283 कॉल और उससे जुड़े खातों में करीब 49.80 लाख रुपये के क्रेडिट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच शुरू की है।
विज्ञापन
अजमेर जेल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय कारागृह में नशे की गोलियों की अवैध आपूर्ति का बड़ा मामला उजागर हुआ है। जेल प्रशासन की आंतरिक जांच में पता चला है कि जेल के फोन से एक ही मोबाइल नंबर पर 1,283 बार कॉल किए गए। इस नंबर से जुड़े बैंक खातों में 50 लाख रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ है। मामले में सिविल लाइंस थाना पुलिस ने केंद्रीय कारागृह के अधिकारी की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बंदियों की शिकायत से खुलासा
प्रकरण की शुरुआत 22 जुलाई, 2025 को हुई, जब हत्या के दो मामलों में बंद कैदी भीकाराम ने जेल एसटीडी के माध्यम से कारागार महानिदेशालय को शिकायत भेजी। उसने आरोप लगाया कि जेल में बंद विचाराधीन बंदी करण सिंह और कमल ने उससे मारपीट की। दोनों आरोपियों पर आरोप है कि वे जेल के भीतर नशे की एक गोली लगभग 500 रुपये में बेचते थे और इसकी राशि खास मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन डलवाते थे। विरोध करने पर पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने जांच शुरू की।
बैंक खातों में भारी लेन-देन
जांच में सामने आया कि जेल एसटीडी से एक ही नंबर पर प्रतिदिन तीन से लेकर 29 बार तक कॉल किए जाते थे। यह मोबाइल नंबर कानाखेड़ी निवासी जयराम रावत के नाम पंजीकृत था। जयराम के बैंक खाते का विवरण खंगालने पर 1 जनवरी, 2024 से 20 अप्रैल, 2026 के बीच 49,79,967 रुपये क्रेडिट होने की पुष्टि हुई, जबकि अंतिम शेष राशि केवल 13,358 रुपये ही बची थी।
विज्ञापन
पूछताछ में जयराम के चचेरे भाई शिवराज सिंह ने बताया कि वह कैदियों के लिए सामान पहुंचाता था, जिसके बदले उनके परिजन ऑनलाइन पैसे भेजते थे। यह नंबर बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय स्टेट बैंक के तीन खातों से जुड़ा हुआ पाया गया।
पुलिस जांच और मिलीभगत की आशंका
मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 अगस्त 2026 को सिविल लाइंस थाने में करण सिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। सभी आरोपी पहले जेल में बंद थे और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जांच सिविल लाइंस थाने के सहायक उपनिरीक्षक लक्ष्मण को सौंपी गई है।
आमतौर पर जेल में एक बंदी के लिए कैंटीन खर्च की मासिक सीमा 3,500 रुपये तय होती है। 15 बंदियों का वार्षिक खर्च लगभग 6.30 लाख रुपये बैठता है। ऐसे में 50 लाख रुपये का लेन-देन जेल कर्मचारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। पुलिस यह जांच कर रही है कि इस नंबर को जेल एसटीडी से जोड़ने में किसकी भूमिका थी।
विज्ञापन
बंदियों की शिकायत से खुलासा
प्रकरण की शुरुआत 22 जुलाई, 2025 को हुई, जब हत्या के दो मामलों में बंद कैदी भीकाराम ने जेल एसटीडी के माध्यम से कारागार महानिदेशालय को शिकायत भेजी। उसने आरोप लगाया कि जेल में बंद विचाराधीन बंदी करण सिंह और कमल ने उससे मारपीट की। दोनों आरोपियों पर आरोप है कि वे जेल के भीतर नशे की एक गोली लगभग 500 रुपये में बेचते थे और इसकी राशि खास मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन डलवाते थे। विरोध करने पर पीड़ित को जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने जांच शुरू की।
विज्ञापन
बैंक खातों में भारी लेन-देन
जांच में सामने आया कि जेल एसटीडी से एक ही नंबर पर प्रतिदिन तीन से लेकर 29 बार तक कॉल किए जाते थे। यह मोबाइल नंबर कानाखेड़ी निवासी जयराम रावत के नाम पंजीकृत था। जयराम के बैंक खाते का विवरण खंगालने पर 1 जनवरी, 2024 से 20 अप्रैल, 2026 के बीच 49,79,967 रुपये क्रेडिट होने की पुष्टि हुई, जबकि अंतिम शेष राशि केवल 13,358 रुपये ही बची थी।
विज्ञापन
पूछताछ में जयराम के चचेरे भाई शिवराज सिंह ने बताया कि वह कैदियों के लिए सामान पहुंचाता था, जिसके बदले उनके परिजन ऑनलाइन पैसे भेजते थे। यह नंबर बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय स्टेट बैंक के तीन खातों से जुड़ा हुआ पाया गया।
पुलिस जांच और मिलीभगत की आशंका
मामले की गंभीरता को देखते हुए 19 अगस्त 2026 को सिविल लाइंस थाने में करण सिंह, कमल, जयराम, शिवराज और धनराज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। सभी आरोपी पहले जेल में बंद थे और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जांच सिविल लाइंस थाने के सहायक उपनिरीक्षक लक्ष्मण को सौंपी गई है।
आमतौर पर जेल में एक बंदी के लिए कैंटीन खर्च की मासिक सीमा 3,500 रुपये तय होती है। 15 बंदियों का वार्षिक खर्च लगभग 6.30 लाख रुपये बैठता है। ऐसे में 50 लाख रुपये का लेन-देन जेल कर्मचारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। पुलिस यह जांच कर रही है कि इस नंबर को जेल एसटीडी से जोड़ने में किसकी भूमिका थी।