Ajmer: RTI मामले में कार्मिक विभाग पर राज्य सूचना आयोग सख्त, संयुक्त शासन सहित अधिकारियों से मांगा जवाब
राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने RTI के तहत सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर कार्मिक विभाग के संयुक्त शासन सचिव धीरज सिंह सहित संबंधित अधिकारियों से धारा 20(1) के तहत दंड क्यों न लगाया जाए, इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। मामला तबादला प्रक्रिया से जुड़ी सूचना का है।
राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने RTI के तहत सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर कार्मिक विभाग के संयुक्त शासन सचिव धीरज सिंह सहित संबंधित अधिकारियों से धारा 20(1) के तहत दंड क्यों न लगाया जाए, इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। मामला तबादला प्रक्रिया से जुड़ी सूचना का है।
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राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत सूचना उपलब्ध नहीं कराने के मामले में कार्मिक विभाग के अधिकारियों के प्रति सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने संयुक्त शासन सचिव (कार्मिक) धीरज सिंह (आईएएस) सहित संबंधित अधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के तहत दंड लगाए जाने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
मामला परिवादी पंकज चौधरी द्वारा मांगी गई सूचना से जुड़ा है। आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 25 नवंबर 2025 को पारित आदेश के बावजूद कार्मिक विभाग ने निर्धारित अवधि में मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई। प्रथम अपील के बाद भी सूचना नहीं मिलने पर पंकज चौधरी ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।
तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त मोहन लाठर ने सुनवाई के दौरान विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए आदेश प्राप्त होने के 21 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। परिवादी का आरोप है कि विभाग ने वास्तविक सूचना उपलब्ध कराने के बजाय मामले को अनावश्यक रूप से उलझाने का प्रयास किया।
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इसके बाद पंकज चौधरी ने अप्रैल 2026 में आयोग के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयोग ने 17 जुलाई 2026 को नोटिस जारी किया। आयोग ने प्रथम दृष्टया सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के उल्लंघन की स्थिति मानते हुए संबंधित अधिकारियों से पूछा है कि उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। साथ ही उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश भी दिए हैं।
सुनवाई के दौरान पंकज चौधरी स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित हुए और अपने पक्ष में विस्तृत तर्क रखे। इसके बाद आयोग ने संबंधित अधिकारियों को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए। बताया जा रहा है कि मामला राज्य सरकार की तबादला प्रक्रिया और उससे जुड़ी पारदर्शिता से संबंधित है। ऐसे में आयोग की यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही और सूचना के अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब विभाग के जवाब और अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।