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10 साल बाद मिला न्याय: पाटा हत्याकांड में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष समेत आठ दोषियों को उम्रकैद; जानें पूरा मामला
Sat, 18 Jul 2026 09:59 PM IST
अलवर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: अलवर ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 09:59 PM IST
सार
अलवर के बहुचर्चित पाटा हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने करीब 10 साल बाद फैसला सुनाते हुए पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह समेत आठ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। यह मामला 2016 में सरपंच चुनाव की रंजिश में हुई हत्या से जुड़ा था।
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पाटा गांव हत्याकांड के आठ दोषियों को उम्रकैद की सजा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
अलवर में करीब एक दशक तक चले बहुचर्चित पाटा गांव हत्याकांड में आखिरकार न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों को सजा दे दी है। शनिवार को जिला एवं सेशन न्यायालय ने वर्ष 2016 के इस चर्चित हत्या प्रकरण में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह समेत आठ आरोपियों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
फैसला आने के बाद लोगों के चेहरे में आई मुस्कान
फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर का एक दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सजा मिलने के बावजूद सभी दोषी बिना किसी घबराहट के कोर्ट से बाहर निकले और उनके चेहरों पर मुस्कान दिखाई दी। यह नजारा वहां मौजूद लोगों को हैरान कर गया।
सरपंच चुनाव की रंजिश ने ली थी जान
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह चौहान और अजय मोहन मुखिजा ने बताया कि यह मामला 10 जून 2016 का है। उस समय नौगांव थाना क्षेत्र के पाटा गांव में सरपंच चुनाव को लेकर दो गुटों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था।
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पुरानी रंजिश ने हिंसक रूप लिया था
चुनाव परिणाम आने के बाद पुरानी रंजिश ने हिंसक रूप ले लिया। आरोपियों ने अवतार सिंह और उनके परिजनों पर हथौड़े, तलवार, चाकू, लोहे के पाइप, हॉकी और लाठियों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल अवतार सिंह को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।
10 साल चली कानूनी लड़ाई
हत्या के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन और बचाव पक्ष की लंबी बहस के बाद जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह सहित आठों आरोपियों को हत्या का दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
ये भी पढ़ें- राजस्थान में अवैध प्रवासियों पर बड़ा एक्शन: 1000 से अधिक बांग्लादेशी हुए डिपोर्ट; रोहिंग्या ने बढ़ाई चिंता
परिवार बोला- 10 साल 18 दिन बाद मिला न्याय
फैसले के बाद मृतक अवतार सिंह के बेटे अजयपाल ने भावुक होते हुए कहा कि उनके परिवार को करीब 10 साल 18 दिन बाद न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे संघर्ष और इंतजार के बाद अदालत के फैसले से परिवार को संतोष मिला है। उन्हें न्यायपालिका पर हमेशा विश्वास था और आखिरकार सच की जीत हुई।
चर्चित मामले का कानूनी अध्याय हुआ समाप्त
पाटा गांव का यह हत्याकांड उस समय अलवर जिले के सबसे चर्चित मामलों में शामिल था। चुनावी रंजिश से शुरू हुआ विवाद हत्या तक पहुंच गया था, जिसकी गूंज वर्षों तक अदालत और राजनीति दोनों में सुनाई देती रही। अब जिला एवं सेशन न्यायालय के फैसले के साथ इस बहुचर्चित मामले का कानूनी अध्याय एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच गया है।
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फैसला आने के बाद लोगों के चेहरे में आई मुस्कान
फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर का एक दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सजा मिलने के बावजूद सभी दोषी बिना किसी घबराहट के कोर्ट से बाहर निकले और उनके चेहरों पर मुस्कान दिखाई दी। यह नजारा वहां मौजूद लोगों को हैरान कर गया।
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सरपंच चुनाव की रंजिश ने ली थी जान
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह चौहान और अजय मोहन मुखिजा ने बताया कि यह मामला 10 जून 2016 का है। उस समय नौगांव थाना क्षेत्र के पाटा गांव में सरपंच चुनाव को लेकर दो गुटों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था।
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पुरानी रंजिश ने हिंसक रूप लिया था
चुनाव परिणाम आने के बाद पुरानी रंजिश ने हिंसक रूप ले लिया। आरोपियों ने अवतार सिंह और उनके परिजनों पर हथौड़े, तलवार, चाकू, लोहे के पाइप, हॉकी और लाठियों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल अवतार सिंह को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।
10 साल चली कानूनी लड़ाई
हत्या के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया गया। सुनवाई के दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन और बचाव पक्ष की लंबी बहस के बाद जिला एवं सेशन न्यायाधीश ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह सहित आठों आरोपियों को हत्या का दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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परिवार बोला- 10 साल 18 दिन बाद मिला न्याय
फैसले के बाद मृतक अवतार सिंह के बेटे अजयपाल ने भावुक होते हुए कहा कि उनके परिवार को करीब 10 साल 18 दिन बाद न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे संघर्ष और इंतजार के बाद अदालत के फैसले से परिवार को संतोष मिला है। उन्हें न्यायपालिका पर हमेशा विश्वास था और आखिरकार सच की जीत हुई।
चर्चित मामले का कानूनी अध्याय हुआ समाप्त
पाटा गांव का यह हत्याकांड उस समय अलवर जिले के सबसे चर्चित मामलों में शामिल था। चुनावी रंजिश से शुरू हुआ विवाद हत्या तक पहुंच गया था, जिसकी गूंज वर्षों तक अदालत और राजनीति दोनों में सुनाई देती रही। अब जिला एवं सेशन न्यायालय के फैसले के साथ इस बहुचर्चित मामले का कानूनी अध्याय एक महत्वपूर्ण मुकाम पर पहुंच गया है।