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Rajasthan: आस्था का महापर्व, तिलवाड़ा में मनाया गया श्री रावल मल्लीनाथ जी का 708वां जन्मोत्सव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा Published by: बालोतरा ब्यूरो Updated Sun, 08 Mar 2026 08:41 PM IST
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सार

तिलवाड़ा स्थित ऐतिहासिक थान मल्लीनाथ मंदिर में मालाणी क्षेत्र के संस्थापक, वीर योद्धा और महान संत श्री रावल मल्लीनाथ जी का 708वां जन्मोत्सव रविवार को श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया।

708th birth anniversary of Shri Rawal Mallinath Ji in Balotra
तिलवाड़ा में धूमधाम से मनाया गया श्री रावल मल्लीनाथ जी का 708वां जन्मोत्सव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

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मालाणी क्षेत्र के संस्थापक, वीर योद्धा, महान संत और जनआस्था के केंद्र श्री रावल मल्लीनाथ जी के 708वें जन्मोत्सव के पावन अवसर पर रविवार को तिलवाड़ा स्थित ऐतिहासिक थान मल्लीनाथ मंदिर में भव्य धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति, आस्था और उत्सव का अनूठा संगम दिखाई दिया।

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मंगला आरती से हुई कार्यक्रमों की शुरुआत
जन्मोत्सव के कार्यक्रमों की शुरुआत प्रातःकालीन मंगला आरती से हुई। सुबह होते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई और भक्तों ने भगवान के दर्शन कर जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मंदिर परिसर में अष्ट प्रकृति महायज्ञ का आयोजन किया गया।

महायज्ञ में विद्वान आचार्यों और पंडितों ने विधि-विधान के साथ यज्ञ की आहुतियां अर्पित कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यज्ञ के दौरान श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और उन्होंने भी यज्ञ में आहुति देकर धर्म लाभ प्राप्त किया। महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद परंपरा अनुसार मंदिर परिसर में ध्वजारोहण किया गया।

तीन मंदिरों में विशेष भोग अर्पित
जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर थान मल्लीनाथ, श्री राणी रूपादे जी मंदिर पालिया और श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर मालाजाल में विशेष पूजा-अर्चना कर भोग अर्पित किया गया। इस दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

कन्या पूजन और महाप्रसादी का आयोजन
धार्मिक कार्यक्रमों के क्रम में तिलवाड़ा, बोरावास और थान मल्लीनाथ ग्राम पंचायत की कन्याओं का विधिवत पूजन किया गया। कन्याओं को प्रसाद और दक्षिणा देकर सम्मानित किया गया तथा उनके आशीर्वाद प्राप्त किए गए। इसके बाद मंदिर परिसर में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को महाप्रसादी वितरित की गई।

संध्याकालीन आरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
दिनभर चले धार्मिक कार्यक्रमों के बाद शाम को मंदिर परिसर में भव्य संध्याकालीन आरती का आयोजन किया गया। इस आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की प्रार्थना की।

लोक संस्कृति की झलक से सजा आयोजन
जन्मोत्सव के इस आयोजन में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ लोक संस्कृति की भी सुंदर झलक देखने को मिली। पुष्कर से आए नगारची कलाकारों, घुड़ नृत्य कलाकारों, गैर नृत्य मंडलियों और स्थानीय दमामी कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से वातावरण को उत्सवमय बना दिया। इन प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और मालाणी की लोक परंपराओं की झलक भी प्रस्तुत की।

ध्वजारोहण समारोह में प्रबुद्धजन रहे उपस्थित
ध्वजारोहण का कार्यक्रम कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल द्वारा मालाणी क्षेत्र के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में सम्पन्न किया गया। इस अवसर पर उन्होंने महायज्ञ में आहुति अर्पित कर क्षेत्र के लोगों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

पहली बार मंदिर परिसर में मनाया गया जन्मोत्सव
कार्यक्रम के दौरान कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने बताया कि श्री रावल मल्लीनाथ जी के जन्मोत्सव को मंदिर परिसर में औपचारिक रूप से मनाने की शुरुआत इस वर्ष पहली बार की गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और अधिक भव्य और दिव्य स्वरूप में आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने मालाणी क्षेत्र के लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस पावन तिथि को सभी श्रद्धालु अपने-अपने घरों और गांवों में भी श्रद्धा के साथ मनाएं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को श्री रावल मल्लीनाथ जी के जन्मोत्सव के बारे में जानकारी मिल सके।

सामाजिक समरसता के प्रतीक रहे मल्लीनाथ जी
कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने कहा कि श्री रावल मल्लीनाथ जी मालाणी क्षेत्र के संस्थापक होने के साथ-साथ सामाजिक समरसता के महान प्रतीक भी रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन और भजनों के माध्यम से लगभग सात सौ वर्ष पहले ही समाज को सत्य, धर्म, सेवा और एकता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया था।

उन्होंने बताया कि श्री रावल मल्लीनाथ जी और श्री राणी रूपादे जी निजिया पंथ से जुड़े हुए थे। उनके गुरु उगमसी भाटी थे और उनके गुरु भाई मेघधारू जी थे। तिलवाड़ा का ऐतिहासिक पशु मेला भी संत परंपरा से जुड़ा हुआ है, जिसकी शुरुआत संत समागम से हुई थी।

संत समागम की ऐतिहासिक परंपरा
इतिहास के अनुसार सैकड़ों वर्ष पूर्व गुरु उगमसी भाटी के सानिध्य में संत समागम आयोजित हुआ था, जिसमें मेवाड़ से महाराणा कुम्भा, उनकी राणी, गुजरात से जैसल-तोरल, बाबा रामदेवजी सहित कई संत-महात्मा शामिल हुए थे। इस पंथ की विशेषता निराकार उपासना रही है, जो आज भी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

धार्मिक परंपराओं को मिला नया संबल
उन्होंने बताया कि श्री रावल मल्लीनाथ जी के 25वें गादीपति श्री रावल किशन सिंह जी जसोल के मार्गदर्शन में पिछले कई वर्षों से तिलवाड़ा मेले के ध्वजारोहण के दिन मंदिर परिसर में अष्ट प्रकृति महायज्ञ का आयोजन किया जाता रहा है। वर्ष 2011 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने धर्म, सेवा और समाज कल्याण के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

अगले वर्ष और भव्य आयोजन का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया गया कि अगले वर्ष श्री रावल मल्लीनाथ जी के 709वें जन्मोत्सव को और अधिक भव्य और दिव्य रूप में आयोजित किया जाएगा। साथ ही यह आशा भी व्यक्त की गई कि जिस प्रकार सक्षम संस्थान ने पिछले वर्ष रामदेवरा में नेत्र कुंभ का सफल आयोजन किया था, उसी तरह आगामी वर्ष तिलवाड़ा के प्रसिद्ध श्री मल्लीनाथ पशु मेले के दौरान नेत्र कुंभ का आयोजन भी किया जा सकता है, जिससे क्षेत्र के लोगों को बड़ा लाभ मिलेगा।

प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश
महायज्ञ के मुख्य आचार्य अभिषेक जोशी ने कहा कि अष्ट प्रकृति महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना है। वेदों में भी प्रकृति, वृक्षों और पशु-पक्षियों के संरक्षण का स्पष्ट संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि मानव प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करेगा तो प्रकृति भी विनाश का कारण बन सकती है।

उन्होंने बताया कि श्री रावल मल्लीनाथ जी ने अपने जीवन के माध्यम से वृक्षों और पशुओं की रक्षा तथा प्रकृति के सम्मान का संदेश दिया था। इसलिए आज के समय में प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद
इस अवसर पर श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा, श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के समिति सदस्य, मालाणी क्षेत्र के प्रबुद्धजन, श्री रावल मल्लीनाथ जी के वंशज तथा सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। पूरे दिन चले इस आयोजन ने मालाणी क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक को जीवंत कर दिया।

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