Rajasthan: जहरीला पानी बना काल! बालोतरा में 70 से ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत, 100 से अधिक पशु बीमार
राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र के बागुंडी और खेमा बाबा नगर में दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में पशुओं की मौत हो गई। अब तक करीब 70 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा पशु बीमार बताए जा रहे हैं।
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राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा क्षेत्र में स्थित बागुंडी और खेमा बाबा नगर इलाके में दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में पशुओं की मौत का मामला सामने आया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक करीब 70 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 100 से ज्यादा पशु बीमार बताए जा रहे हैं। अचानक हुई इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और पशुपालकों में गहरा आक्रोश और चिंता देखने को मिल रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बागुंडी-पचपदरा मुख्य जल पाइपलाइन से जुड़े एक वाल्व से पशुओं ने पानी पिया था। पानी पीने के कुछ ही देर बाद कई पशु अचानक गिरने लगे और उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। कुछ ही समय में दर्जनों भेड़-बकरियों की मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि पानी में किसी जहरीले पदार्थ की मिलावट होने की आशंका है, जिसके कारण यह घटना हुई।
घटना में बागुंडी निवासी पोकरराम मेघवाल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। उनकी 15 भेड़ और 19 बकरियों सहित कुल 34 पशुओं की मौत हो गई। वहीं खेमा बाबा नगर निवासी अमराराम जाट की करीब 40 भेड़ों की मौत हो गई और कई भेड़ें अभी भी गंभीर हालत में हैं।
जानकारी के अनुसार इसी घटना में ग्वाला निवासी विशनाराम की दो गायों की भी मौत हो गई है। कई पशु बेहोशी की हालत में पड़े हुए हैं और उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। पशुपालकों के अनुसार जैसे ही पशुओं ने पाइपलाइन के वाल्व से पानी पिया, वे कुछ ही मिनटों में लड़खड़ाने लगे और जमीन पर गिरने लगे। इसके बाद लगातार पशुओं के मरने का सिलसिला शुरू हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पशुपालन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पशुधन निरीक्षक मनोज कुमार यादव ने घटनास्थल पर पहुंचकर बीमार पशुओं का प्राथमिक उपचार शुरू करवाया। इसके बाद 1962 पशु हेल्पलाइन के माध्यम से पशु चिकित्सक डॉ. गणपत लाल डूडी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित पशुओं को एट्रोपिन इंजेक्शन, लीवर टॉनिक और एंटीबायोटिक दवाइयां देकर इलाज शुरू किया।
इस घटना से पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। कई परिवारों की आजीविका पूरी तरह पशुपालन पर निर्भर है और इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से वे गहरे संकट में आ गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।