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Banswara: शिक्षक भर्ती परीक्षा में तीन अभ्यर्थियों के जनेऊ उतरवाने का आरोप, विप्र फाउंडेशन ने जताया आक्रोश
Thu, 16 Jul 2026 09:02 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
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Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2026 09:02 PM IST
सार
बांसवाड़ा में द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान तीन ब्राह्मण अभ्यर्थियों के जनेऊ उतरवाने का आरोप लगा। विप्र फाउंडेशन ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताते हुए विरोध जताया और दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की मांग की।
बांसवाड़ा में द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान तीन ब्राह्मण अभ्यर्थियों के जनेऊ उतरवाने का आरोप लगा। विप्र फाउंडेशन ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताते हुए विरोध जताया और दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की मांग की।
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सांकेतिक
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा में बांसवाड़ा में तीन ब्राह्मण अभ्यर्थियों के यज्ञोपवित (जनेऊ) उतरवाने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम की जानकारी मिलने के बाद विप्रफाउंडेशन ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया और आक्रोश व्यक्त किया है।
द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के अन्तर्गत बांसवाड़ा में रतलाम मार्ग पर एक निजी अंकुर शिक्षण संस्थान में केंद्र बनाया गया था। बताया गया कि वहां परीक्षा देने पहुंचे परीक्षार्थी मन्तव्य पानेरी पुत्र महेश पानेरी निवासी बड़ोदिया और दो अन्य परीक्षार्थियों के यज्ञोपवित (जनेऊ) उतरवाए दिए गए। प्रवेश द्वार पर मौजूद पुलिसकर्मी पर जबरन यज्ञोपवित (जनेऊ) उतरवाने का आरोप लगाते हुए परीक्षार्थी के पिता ने कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से पूर्व में इस संबंध में आदेश जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद भी पुलिसकर्मी नहीं माना।
पढ़ें: भतीजे की डिग्री पर चाचा बना डॉक्टर, तीन जिलों में करता रहा सरकारी नौकरी; ऐसे खुली पोल
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आला अधिकारियों को कराया अवगत
इस संबंध में जानकारी मिलने पर विप्र फाउंडेशन जोन 1-जी के प्रदेश अध्यक्ष योगेश जोशी और अन्य अभिभावकों ने पुलिस अधिकारियों को मामले से अवगत कराते हुए आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विप्र बंधु को एक बार यज्ञोपवित संस्कार होने के बाद पूरे जीवन और मृत्यु के बाद भी जनेऊ उतारी नहीं जाती है। इसे बावजूद पुलिसकर्मी ने जबरन जनेऊ उतरवाई है। इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी के निर्देश पर परीक्षार्थी ने जनेऊ पहनी। इस प्रकरण में विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने राज्य सरकार के आदेश का पत्र सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को तुरंत रोका जाए।
रीट के दौरान हुआ था हंगामा
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष फरवरी में डूंगरपुर में रीट परीक्षा के दौरान विप्र परीक्षार्थी की जनेऊ उतरवाने के प्रकरण का विरोध हुआ था। परीक्षा केन्द्र राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुन्दरपुर पर मामला संज्ञान में आया था। जिसके संबंध में विस्तृत जांच मुख्य जिला शिक्षा डूंगरपुर से कराई गई थी। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी डूंगरपुर ने मामले की जांच की थी। इसके बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार दोषी कार्मिक सुनीता कुमारी प्राध्यापक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, खेडा कच्छवासा (फील्ड सुपरवाईजर रीट परीक्षा) के विरुद्ध विभागीय जांच प्रस्तावित करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था।
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द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के अन्तर्गत बांसवाड़ा में रतलाम मार्ग पर एक निजी अंकुर शिक्षण संस्थान में केंद्र बनाया गया था। बताया गया कि वहां परीक्षा देने पहुंचे परीक्षार्थी मन्तव्य पानेरी पुत्र महेश पानेरी निवासी बड़ोदिया और दो अन्य परीक्षार्थियों के यज्ञोपवित (जनेऊ) उतरवाए दिए गए। प्रवेश द्वार पर मौजूद पुलिसकर्मी पर जबरन यज्ञोपवित (जनेऊ) उतरवाने का आरोप लगाते हुए परीक्षार्थी के पिता ने कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से पूर्व में इस संबंध में आदेश जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद भी पुलिसकर्मी नहीं माना।
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आला अधिकारियों को कराया अवगत
इस संबंध में जानकारी मिलने पर विप्र फाउंडेशन जोन 1-जी के प्रदेश अध्यक्ष योगेश जोशी और अन्य अभिभावकों ने पुलिस अधिकारियों को मामले से अवगत कराते हुए आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विप्र बंधु को एक बार यज्ञोपवित संस्कार होने के बाद पूरे जीवन और मृत्यु के बाद भी जनेऊ उतारी नहीं जाती है। इसे बावजूद पुलिसकर्मी ने जबरन जनेऊ उतरवाई है। इस मामले में संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारी के निर्देश पर परीक्षार्थी ने जनेऊ पहनी। इस प्रकरण में विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने राज्य सरकार के आदेश का पत्र सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को तुरंत रोका जाए।
रीट के दौरान हुआ था हंगामा
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष फरवरी में डूंगरपुर में रीट परीक्षा के दौरान विप्र परीक्षार्थी की जनेऊ उतरवाने के प्रकरण का विरोध हुआ था। परीक्षा केन्द्र राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सुन्दरपुर पर मामला संज्ञान में आया था। जिसके संबंध में विस्तृत जांच मुख्य जिला शिक्षा डूंगरपुर से कराई गई थी। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी डूंगरपुर ने मामले की जांच की थी। इसके बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार दोषी कार्मिक सुनीता कुमारी प्राध्यापक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, खेडा कच्छवासा (फील्ड सुपरवाईजर रीट परीक्षा) के विरुद्ध विभागीय जांच प्रस्तावित करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था।