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Rajasthan: राजस्थान में चांदीपुरा वायरस की दस्तक, डूंगरपुर में छह साल की बच्ची की मौत से मचा हड़कंप
Sat, 18 Jul 2026 07:10 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 07:10 PM IST
सार
डूंगरपुर के रतनपुरा गांव में चांदीपुरा वायरस के संदिग्ध संक्रमण से छह वर्षीय बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। गांव में 353 लोगों की स्क्रीनिंग की गई, हालांकि किसी में संक्रमण के लक्षण नहीं मिले। एहतियात के तौर पर सर्वे, फॉगिंग और एंटी-लार्वल अभियान चलाया जा रहा है।
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रतनपुरा गांव में फॉगिंग शुरू
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
डूंगरपुर जिले में चांदीपुरा वायरस के संदिग्ध संक्रमण से छह वर्षीय बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है। गुजरात सरकार से सूचना मिलने के बाद चिकित्सा विभाग ने प्रभावित गांव रतनपुरा में स्वास्थ्य सर्वेक्षण, स्क्रीनिंग और संक्रमण रोकथाम के विशेष अभियान शुरू कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, धंबोला थाना क्षेत्र के रतनपुरा गांव की रहने वाली बच्ची को तेज बुखार और अन्य गंभीर लक्षणों के बाद इलाज के लिए गुजरात के हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 जुलाई को डॉक्टरों ने उसके सैंपल जांच के लिए भेजे, लेकिन उसी दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजन शव लेकर गांव लौट आए। उस समय स्वास्थ्य विभाग को मामले की जानकारी नहीं मिल सकी। बाद में हिम्मतनगर अस्पताल ने सैंपल की जानकारी गुजरात स्वास्थ्य विभाग को भेजी। मरीज के डूंगरपुर का निवासी होने के कारण गुजरात सरकार ने यह सूचना स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई। 18 जुलाई को सूचना मिलने के बाद डूंगरपुर स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
353 लोगों की जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने शनिवार को रतनपुरा गांव में घर-घर जाकर 353 लोगों की स्वास्थ्य जांच की। स्क्रीनिंग के दौरान किसी भी ग्रामीण में चांदीपुरा वायरस से संबंधित लक्षण नहीं मिले, जिससे फिलहाल राहत की स्थिति है। हालांकि संभावित संक्रमण के खतरे को देखते हुए गांव में लगातार निगरानी जारी रखी जा रही है। संक्रमण फैलने की आशंका को कम करने के लिए गांव में पायरेथ्रम स्प्रे, फॉगिंग और एंटी-लार्वल गतिविधियां संचालित की गईं।
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क्या बोले सीएमएचओ?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अलंकार गुप्ता ने बताया कि विभाग की टीमें लगातार गांव में सर्वेक्षण और निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे या अन्य व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दौरे, बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं, ताकि समय पर उपचार मिल सके। चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाइज (रेतीली मक्खियों) और कुछ मामलों में मच्छरों के जरिए फैलता है तथा यह संक्रमण बच्चों के लिए अधिक गंभीर हो सकता है। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है और एहतियात के तौर पर सभी आवश्यक स्वास्थ्य एवं संक्रमण नियंत्रण उपाय जारी हैं।
ये भी पढ़ें- राजस्थान में अवैध प्रवासियों पर बड़ा एक्शन: 1000 से अधिक बांग्लादेशी हुए डिपोर्ट; रोहिंग्या ने बढ़ाई चिंता
गुजरात में हो चुकी 12 मौतें
गुजरात में संक्रमण से एक महीने में अब तक 12 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से तीन बच्चे चांदीपुरा वायरस से संक्रमित थे। अन्य 9 बच्चों की मौत भी इसी वायरस से होने की आशंका है। संक्रमण के मामले गांधीनगर, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली और पंचमहल जिलों में सामने आए हैं।
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस में बुखार और फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके कारण दिमाग में सूजन (एक्यूट एन्सेफलाइटिस) भी हो सकती है। यह वायरस 'रैबडोविरीडे' परिवार के 'वेसिकुलोवायरस' जीनस का हिस्सा है। इस संक्रमण मुख्य रूप से मच्छरों, किलनी (टिक्स) और सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलता है। सबसे पहले इस वायरस की पहचान सबसे पहले साल 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में एक मरीज में हुई थी।
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जानकारी के अनुसार, धंबोला थाना क्षेत्र के रतनपुरा गांव की रहने वाली बच्ची को तेज बुखार और अन्य गंभीर लक्षणों के बाद इलाज के लिए गुजरात के हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 जुलाई को डॉक्टरों ने उसके सैंपल जांच के लिए भेजे, लेकिन उसी दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजन शव लेकर गांव लौट आए। उस समय स्वास्थ्य विभाग को मामले की जानकारी नहीं मिल सकी। बाद में हिम्मतनगर अस्पताल ने सैंपल की जानकारी गुजरात स्वास्थ्य विभाग को भेजी। मरीज के डूंगरपुर का निवासी होने के कारण गुजरात सरकार ने यह सूचना स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई। 18 जुलाई को सूचना मिलने के बाद डूंगरपुर स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
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353 लोगों की जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने शनिवार को रतनपुरा गांव में घर-घर जाकर 353 लोगों की स्वास्थ्य जांच की। स्क्रीनिंग के दौरान किसी भी ग्रामीण में चांदीपुरा वायरस से संबंधित लक्षण नहीं मिले, जिससे फिलहाल राहत की स्थिति है। हालांकि संभावित संक्रमण के खतरे को देखते हुए गांव में लगातार निगरानी जारी रखी जा रही है। संक्रमण फैलने की आशंका को कम करने के लिए गांव में पायरेथ्रम स्प्रे, फॉगिंग और एंटी-लार्वल गतिविधियां संचालित की गईं।
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क्या बोले सीएमएचओ?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अलंकार गुप्ता ने बताया कि विभाग की टीमें लगातार गांव में सर्वेक्षण और निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे या अन्य व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दौरे, बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं, ताकि समय पर उपचार मिल सके। चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाइज (रेतीली मक्खियों) और कुछ मामलों में मच्छरों के जरिए फैलता है तथा यह संक्रमण बच्चों के लिए अधिक गंभीर हो सकता है। फिलहाल गांव में स्थिति सामान्य है और एहतियात के तौर पर सभी आवश्यक स्वास्थ्य एवं संक्रमण नियंत्रण उपाय जारी हैं।
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गुजरात में हो चुकी 12 मौतें
गुजरात में संक्रमण से एक महीने में अब तक 12 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से तीन बच्चे चांदीपुरा वायरस से संक्रमित थे। अन्य 9 बच्चों की मौत भी इसी वायरस से होने की आशंका है। संक्रमण के मामले गांधीनगर, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली और पंचमहल जिलों में सामने आए हैं।
क्या है चांदीपुरा वायरस?
चांदीपुरा वायरस में बुखार और फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इसके कारण दिमाग में सूजन (एक्यूट एन्सेफलाइटिस) भी हो सकती है। यह वायरस 'रैबडोविरीडे' परिवार के 'वेसिकुलोवायरस' जीनस का हिस्सा है। इस संक्रमण मुख्य रूप से मच्छरों, किलनी (टिक्स) और सैंडफ्लाई (रेतीली मक्खी) के काटने से फैलता है। सबसे पहले इस वायरस की पहचान सबसे पहले साल 1965 में महाराष्ट्र के नागपुर जिले के चांदीपुरा गांव में एक मरीज में हुई थी।