{"_id":"69a7e9176bd935fc0803925f","slug":"holi-was-celebrated-by-pelting-stones-at-each-other-to-avoid-any-untoward-incident-banswara-news-c-1-1-noi1402-4015554-2026-03-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dungarpur News: अनहोनी को टालने के लिए खेली पत्थरमार होली, रंग-गुलाल की जगह बरसे पत्थर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dungarpur News: अनहोनी को टालने के लिए खेली पत्थरमार होली, रंग-गुलाल की जगह बरसे पत्थर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर
Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Wed, 04 Mar 2026 04:26 PM IST
विज्ञापन
सार
धुलेंडी पर जिले के भीलूड़ा गांव में सदियों पुरानी परंपरा के तहत अनोखी पत्थरमार होली खेली गई। रंग-गुलाल की जगह एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए गए, जिसमें 35 लोग घायल हो गए, लेकिन मान्यता के चलते श्रद्धा और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
होली की अनोखी परंपरा, पत्थरमार होली
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
जिले के भीलूड़ा गांव में अनहोनी को टालने और खुशहाली की कामना से धुलेंडी पर ऐसी होली खेली गई, जिसमें 35 लोग घायल हो गए और उनका उपचार कराना पड़ गया। यहां वर्षों की परंपरा के अनुसार रंग-गुलाल की बजाय एक-दूसरे पर पत्थर बरसाकर होली मनाई गई। हाथ, पैर, सिर आदि जगह चोटें आने के बाद भी किसी का भी उत्साह कम नहीं हुआ।
भीलूड़ा गांव में भगवान रघुनाथजी के मंदिर के समीप मैदान में यह होली खेली गई। भीलूड़ा, सेलोता, दीवड़ा बड़ा, कानपुर, सूरजगांव, सेमलिया सहित आसपास के अन्य गांवों के कई लोग इस होली को खेलने के लिए पहुंचे। पहले सभी ने मंदिर में भगवान के दर्शन किए। ढोल, थाली और कुण्डी की थाप पर गेर लोकनृत्य किया। इसके बाद सभी लोग मंदिर के समीप मैदान में पहुंचे, जहां एकत्र लोग दो अलग-अलग समूहों में बंट गए।
ये भी पढ़ें: Bikaner: खाकी पर चढ़ा फागुन का रंग,पुलिस लाइन में अफसर-जवानों ने साथ खेली होली
ढोल बजते रहे, पत्थर बरसते रहे
मैदान में पहुंचने और दो समूहों में बंटते ही एक-दूसरे पर लोगों ने पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। कई लोग हाथ से तो कई लोग रस्सी से बनी गोफन में पत्थर को फंसाकर फेंकते रहे। इससे दोनों समूहों के लोगों को पत्थर लगे। लोग पत्थरों से बचने का प्रयास भी करते रहे। इस होली में कई लोगों के हाथ, पैर, सिर और शरीर पर पत्थर लगे।
इस दौरान कई लोगों को चोटें आईं, जिसमें कइ लोग घायलों को कस्बे के अस्पताल पहुंचाने में जुटे। इस बार पत्थरमार होली में कुल 35 लोग घायल हुए। इसे लेकर चिकित्सा विभाग की ओर से पहले से ही तैयारियां की गई थीं। चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने घायलों का उपचार किया।
यह है मान्यता
ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा वर्षों पुरानी है। मान्यता है कि पत्थर की चोट से जमीन पर गिरने वाला खून गांव में अनहोनी को टालता है और खुशहाली बनी रहती है। इसी मान्यता के चलते बरसों से लोग एक-दूसरे पर पत्थरों की बरसात करते हैं। इस दौरान सभी गांवों के मुखिया, सरपंच, जनप्रतिनिधि आदि भी सम्मिलित होते हैं।
Trending Videos
भीलूड़ा गांव में भगवान रघुनाथजी के मंदिर के समीप मैदान में यह होली खेली गई। भीलूड़ा, सेलोता, दीवड़ा बड़ा, कानपुर, सूरजगांव, सेमलिया सहित आसपास के अन्य गांवों के कई लोग इस होली को खेलने के लिए पहुंचे। पहले सभी ने मंदिर में भगवान के दर्शन किए। ढोल, थाली और कुण्डी की थाप पर गेर लोकनृत्य किया। इसके बाद सभी लोग मंदिर के समीप मैदान में पहुंचे, जहां एकत्र लोग दो अलग-अलग समूहों में बंट गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Bikaner: खाकी पर चढ़ा फागुन का रंग,पुलिस लाइन में अफसर-जवानों ने साथ खेली होली
ढोल बजते रहे, पत्थर बरसते रहे
मैदान में पहुंचने और दो समूहों में बंटते ही एक-दूसरे पर लोगों ने पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। कई लोग हाथ से तो कई लोग रस्सी से बनी गोफन में पत्थर को फंसाकर फेंकते रहे। इससे दोनों समूहों के लोगों को पत्थर लगे। लोग पत्थरों से बचने का प्रयास भी करते रहे। इस होली में कई लोगों के हाथ, पैर, सिर और शरीर पर पत्थर लगे।
इस दौरान कई लोगों को चोटें आईं, जिसमें कइ लोग घायलों को कस्बे के अस्पताल पहुंचाने में जुटे। इस बार पत्थरमार होली में कुल 35 लोग घायल हुए। इसे लेकर चिकित्सा विभाग की ओर से पहले से ही तैयारियां की गई थीं। चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने घायलों का उपचार किया।
यह है मान्यता
ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा वर्षों पुरानी है। मान्यता है कि पत्थर की चोट से जमीन पर गिरने वाला खून गांव में अनहोनी को टालता है और खुशहाली बनी रहती है। इसी मान्यता के चलते बरसों से लोग एक-दूसरे पर पत्थरों की बरसात करते हैं। इस दौरान सभी गांवों के मुखिया, सरपंच, जनप्रतिनिधि आदि भी सम्मिलित होते हैं।